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होटल में ठहरा परिवार, एसी ने कमरे में नहीं की ठंडक, मोहाली उपभोक्ता आयोग ने ठोका जुर्माना

Published: Fri, 16 Oct 2026 08:01 PM (IST)

बठिंडा के कंट्री इन एंड सुइट्स होटल को एसी खराब होने और शिकायत पर देर से कार्रवाई के लिए मोहाली ...और पढ़ें

उपभोक्ता आयोग ने होटल को सेवा में कमी का जिम्मेदार माना। (सांकेतिक फोटो)

उपभोक्ता आयोग ने होटल को सेवा में कमी का जिम्मेदार माना। (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. बठिंडा होटल को एसी खराब होने पर दोषी ठहराया गया।

  2. मोहाली उपभोक्ता आयोग ने सेवा में कमी मानी।

  3. होटल को 10 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश।

जागरण संवाददाता, मोहाली।  होटल में ठहरने के दौरान एसी खराब रहने और शिकायत के बावजूद समय पर राहत नहीं मिलने के मामले में उपभोक्ता आयोग ने बठिंडा के कंट्री इन एंड सुइट्स बाय रेडिसन होटल को सेवा में कमी का जिम्मेदार माना है।

आयोग ने होटल प्रबंधन को मानसिक परेशानी और मुकदमेबाजी के खर्च के लिए कुल 10 हजार रुपये एकमुश्त देने का आदेश दिया। फैसले में शिकायत आंशिक रूप से स्वीकार की गई। शिकायतकर्ताओं ने बुकिंग राशि लौटाने और अधिक मुआवजे की मांग की थी, लेकिन आयोग ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सीमित राहत दी।

शिकायत के मुताबिक, डेराबस्सी निवासी कुलवीर सिंह कौड़ा और संगरूर जिले की धूरी तहसील के कलैरां निवासी कुलविंदर सिंह ने 17 मई 2022 को परिवार के साथ ठहरने के लिए होटल में कमरे बुक किए थे। रात करीब 11:55 बजे बाहर से लौटने के बाद उन्होंने एसी चलाए, लेकिन 20 से 25 मिनट इंतजार करने पर भी ठंडक नहीं हुई।

शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि कर्मचारी भेजने का आश्वासन दिया गया, लेकिन तत्काल मदद नहीं मिली। सुबह करीब पांच बजे कर्मचारी एसी की जांच करने पहुंचा, मगर खराबी का कारण नहीं बता सका। गर्मी के कारण एक व्यक्ति को कमरे के फर्श पर सोना पड़ा।

शिकायत दर्ज कराने के लिए रजिस्टर मांगा गया तो कथित तौर पर बताया गया कि होटल में ऐसा कोई रजिस्टर नहीं है। शिकायतकर्ताओं ने 25 मई 2022 को ईमेल से होटल प्रबंधन को घटना की जानकारी दी। उनका कहना था कि समाधान का भरोसा देने के बावजूद जवाब नहीं मिला।

30 मई को कानूनी नोटिस भेजा गया, जिसका भी जवाब नहीं आया। उन्होंने 18 हजार रुपये की बुकिंग राशि, उस पर 18 प्रतिशत सालाना ब्याज, मानसिक और शारीरिक परेशानी के लिए एक लाख रुपये और मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 33 हजार रुपये मांगे थे।

सुनवाई के दौरान होटल का बिल पेश किया

सुनवाई के दौरान कमरे नंबर 810 का आठ हजार रुपये और कमरे नंबर 814 का पांच हजार रुपये का टैक्स बिल पेश किया गया। इनसे कुल 13 हजार रुपये के भुगतान की पुष्टि हुई। तीसरे कमरे का बिल नहीं होने से 18 हजार रुपये के कुल भुगतान का दावा पूरी तरह साबित नहीं हुआ।

आयोग ने हलफनामों, वीडियो और अन्य साक्ष्यों पर विचार किया। नोटिस के बावजूद होटल की ओर से कोई पक्ष पेश नहीं हुआ, इसलिए एकतरफा कार्यवाही हुई। आयोग ने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना।