अब 18000 फीट की बर्फीली चोटियों में स्वदेशी पैराशूट से उतरेंगे भारतीय सेना के जवान, लद्दाख में सफल परीक्षण
इसका पहला लाइव जंप परीक्षण न्योमा, लद्दाख में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

न्योमा लद्दाख स्थित मुध ड्रॉप जोन में पैराट्रूपर के साथ मौजूद एडीआरडीई टीम के सदस्य। सौ. संस्था
HighLights
एडीआरडीई ने एडवांस्ड हाई एल्टीट्यूड पैराशूट (एएचएपी) विकसित किया।
भारतीय सेना अब 18 हजार फीट की चोटियों पर आसानी से उतरेगी।
न्योमा, लद्दाख में पहला लाइव जंप परीक्षण सफल रहा।
जागरण संवाददाता, आगरा। पैराशूट की दुनिया में हवाई वितरण अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एडीआरडीई) ने एक और कीर्तिमान रच दिया है। दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए अब भारतीय सेना के जवान 18 हजार फीट की ऊंची बर्फीली चोटियों में आसानी से उतर सकेंगे।
इसके लिए एडीआरडीई ने एडवांस्ड हाई एल्टीट्यूड पैराशूट (एएचएपी) विकसित किया है। मंगलवार को न्योमा, लद्दाख के मुध ड्रॉप जोन में स्वदेशी पैराशूट का पहला लाइव जंप किया गया। यह पूरी तरह से सफल रहा है। इस पैराशूट को भारतीय रक्षा बलों की ऊंचाई वाले इलाकों की विशेष सामरिक जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
वहीं पैराशूट के सफल परीक्षण पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बधाई दी है। इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बताया है।
एडीआरडीई ने विकसित किया एडवांस्ड हाई एल्टीट्यूड पैराशूट, रक्षा मंत्री ने दी बधाई
एडीआरडीई देश में एक मात्र संस्थान है जहां पर पैराशूट की डिजाइन तैयार की जाती है और फिर इन्हें विकसित भी किया जाता है। देश के पास अभी तक एडवांस्ड हाई एल्टीट्यूड पैराशूट (एएचएपी) नहीं है। अगर इस तरीके के पैराशूट होते हैं तो कारगिल जैसे युद्ध में मदद मिल सकती थी। जिसे देखते हुए एडीआरडीई ने डेढ़ साल पूर्व स्वदेशी पैराशूट को तैयार करना शुरू किया था। इस पैराशूट के प्रारंभिक परीक्षण मलपुरा ड्रॉपिंग जोन में हुए। मंगलवार को न्योमा लद्दाख के मुध ड्रॉप जोन में स्वदेशी पैराशूट का पहला लाइव जंप परीक्षण हुआ।

न्योमा लद्दाख स्थित मुध ड्रॉप जोन में पैराशूट से उतरता पैराट्रूपर। सौ. एडीआरडीई
स्वदेशी पैराशूट का न्योमा, लद्दाख में पहला लाइव जंप रहा सफल
भारतीय वायुसेना के एक विमान से एक पैराट्रूपर ने 16 हजार फीट की ऊंचाई से छलांग लगाई। पैराट्रूपर तेजी से बर्फीली चोटियों की तरफ गिरने लगा। साढ़े 15 हजार फीट की ऊंचाई पर पहुंचने पर पैराट्रूपर ने पैराशूट को खोला और फिर मुध ड्रॉप जोन में सफल लैंडिंग की। इस लैंडिंग की सबसे खास बात यह है कि 13,700 हजार फीट की ऊंचाई पर पैराट्रूपर आसानी से उतरा है।
स्टैटिक लाइन पैराशूट सिस्टम है
एडीआरडीई के एक अधिकारी ने बताया कि यह स्टैटिक लाइन पैराशूट सिस्टम है। जिसके माध्यम से बड़ी संख्या में पैराट्रूपर्स को एक साथ ड्रॉप कराया जा सकता है। 18 हजार फीट की ऊंचाई तक यह पैराशूट कार्य करने में सक्षम है। सिस्टम में विभिन्न तैनाती मोड की भी सुविधा उपलब्ध है। इतनी अधिक ऊंचाई पर पैराशूट से छलांग लगाना चुनौतीपूर्ण होता है।
कम वायुदाब, कम तापमान और हवा की बदलती परिस्थितियां सबसे खतरनाक होती हैं। स्टैटिक लाइन के पैराशूट के खुलने पर तेज झटका लगता है। एएचएपी का डिजाइन इसी तरीके से तैयार किया गया है।
कानपुर की फैक्ट्री में हुआ निर्माण
एडीआरडीई द्वारा विकसित एडवांस्ड हाई एल्टीट्यूड पैराशूट का निर्माण ऑर्डिनेंस पैराशूट फैक्ट्री (ओपीएफ) कानपुर ने किया है। डिजाइन से लेकर निर्माण, निरीक्षण और प्रमाणन तक विभिन्न रक्षा संस्थानों की अहम भूमिका रही है।
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