औषधीय ताकत की खान है खेतों में उगने वाली पुनर्नवा, किडनी-लिवर की संजीवनी; बिसकपरा नाम से भी होती पहचान
पुनर्नवा, जिसे आगरा में बिसकपरा कहते हैं, बरसात के बाद खेतों में उगने वाली एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि है। यह ...और पढ़ें

HighLights
पुनर्नवा आयुर्वेद में किडनी, लिवर और हृदय रोगों में उपयोगी।
आगरा में इसे बिसकपरा नाम से जाना जाता है, सूजन में प्रभावी।
गंभीर बीमारियों में चिकित्सक की सलाह के बिना उपयोग न करें।
जागरण संवाददाता, आगरा। खेतों और खाली मैदानों में बरसात के बाद अपने आप उगने वाली पुनर्नवा को देखकर शायद ही कोई इसकी औषधीय ताकत का अंदाजा लगा सके। आगरा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बिसकपरा के नाम से पहचानी जाने वाली यह वनस्पति गर्मी आते ही सूख जाती है, लेकिन आयुर्वेद में इसे महत्वपूर्ण औषधियों में स्थान मिला है। शरीर को पुनर्नवा यानी नया करने की अवधारणा से जुड़े इसके नाम ने इसे आयुर्वेद में खास पहचान दी है।
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय बमरौली कटारा के चिकित्सक डाॅ. योगेश कुमार के अनुसार, पुनर्नवा का प्रयोग आयुर्वेद में मुख्य रूप से मूत्र विकार, शरीर में पानी रुकने से होने वाली सूजन तथा किडनी, लिवर और हृदय से जुड़ी विभिन्न स्थितियों में किया जाता है। इसे मूत्रल और शोथहर गुणों वाली औषधि माना जाता है। पेशाब कम आने, रुक-रुककर आने या जलन जैसी समस्याओं में भी चिकित्सकीय सलाह के अनुसार इसके विभिन्न योगों का प्रयोग किया जाता है।
किडनी रोग में सावधानी के साथ उपयोग
किडनी की बीमारी में शरीर में अतिरिक्त द्रव जमा होने पर हाथ-पैर और शरीर के अन्य हिस्सों में सूजन आ सकती है। आयुर्वेद में पुनर्नवा आधारित औषधीय योगों का उपयोग ऐसी स्थिति में किया जाता है। डाॅ. योगेश कुमार का कहना है कि हालांकि डायलिसिस करा रहे मरीजों को स्वयं से पुनर्नवा या कोई अन्य औषधि शुरू नहीं करनी चाहिए। ऐसे मरीजों में किडनी की कार्यक्षमता, दवाओं और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को देखते हुए चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक है।
लिवर और सूजन संबंधी रोगों में भी प्रयोग
पीलिया, हेपेटाइटिस, फैटी लिवर तथा लिवर से जुड़ी अन्य स्थितियों में भी पुनर्नवा के विभिन्न आयुर्वेदिक योगों का प्रयोग किया जाता है। एसजीपीटी और एसजीओटी जैसे लिवर एंजाइम बढ़ने की स्थिति में भी आयुर्वेदिक चिकित्सक इसे सहायक औषधि के रूप में देखते हैं। गठिया, गाउट और घुटनों की सूजन जैसी समस्याओं में भी इसके प्रयोग की परंपरा रही है।
रसायन के रूप में पहचान
आयुर्वेद में पुनर्नवा को रसायन वर्ग की औषधियों से जोड़ा गया है। इसका उपयोग स्वरस, चूर्ण, क्वाथ और विभिन्न आयुर्वेदिक योगों के रूप में किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी सब्जी भी बनाई जाती है। आचार्य चरक के आयुर्वेदिक ग्रंथों में भी पुनर्नवा का औषधीय महत्व मिलता है।
बरसात में आसानी से दिखती है वनौषधि
पुनर्नवा देश के विभिन्न हिस्सों में वर्षा के बाद खेतों, मैदानों और खाली जमीन पर उगती है। ग्रामीण परिवेश में सामान्य घास-फूस समझी जाने वाली यह वनस्पति गर्मी में सूख जाती है। औषधीय पौधों की बढ़ती मांग और आयुर्वेद के प्रति बढ़ती रुचि के बीच पुनर्नवा जैसी देशज वनौषधियां एक बार फिर चर्चा में हैं।
विशेषज्ञ चेतावनी
किडनी, लिवर या हृदय की गंभीर बीमारी, कम पेशाब, शरीर में तेजी से बढ़ती सूजन अथवा डायलिसिस की स्थिति में किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का सेवन चिकित्सक की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।
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