यूपी के आगरा में आलू किसानों की बढ़ी चिंता, महंगे बीज और कम भाव से बुकिंग में भारी गिरावट
पिछले दो साल से आलू की मंदी झेल रहे किसानों के लिए सरकारी आलू बीज खरीदना मुश्किल हो गया है। ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
सरकारी आलू बीज की बुकिंग में भारी गिरावट दर्ज।
कम आलू भाव और महंगे बीज से किसान परेशान।
आगरा में 2000 क्विंटल बीज अब भी शेष।
जागरण संवाददाता, आगरा। पिछले दो साल से आलू की मंदी से जूझ रहे किसान के लिए सरकारी आलू बीज खरीदना मुश्किल हो रहा है। गत वर्षों के आंकड़ों पर नजर डाले तो आलू बीज के लिए आवेदन करने वालों की संख्या न के बराबर है। पिछले साल तक सरकारी आलू बीज के लिए किसान जुगाड़ लगाते थे कि समय पर उन्हें बीज मिल जाए, अब वे ही किसान मनाने पर भी नया बीज लेने को तैयार नहीं हैं।
इसका प्रमुख कारण है आलू पर आई मंदी है। अभी तक मात्र 190 ही आवेदन हो सके हैं, जबकि पिछले सालों में दो से ढाई हजार किसान आवेदन करते आए हैं।
आगरा जिले को आवंटित 4716 क्विंटल बीज में करीब दो हजार क्विंटल अब भी बुकिंग के लिए शेष है। ऐसी ही स्थिति रही तो सरकारी बीज की पूरी खेप खपाना भी मुश्किल हो सकता है।
अभी तक 190 ने कराई बुकिंग
जिले में पिछले साल 85 हजार हेक्टेयर में आलू की बोआई हुई थी। पैदावार भी अच्छी हुई। यहां तक तो ठीक था, लेकिन यहां से आगे स्थिति बिगड़ती चली गई। हालात ऐसे हो गए कि पूरे सीजन में एक बार भी संतोष जनक भाव नहीं आ सका, जिससे किसान आलू को बेच देता। आलू पर आई मंदी से किसान पूरी तरह टूट गया। यही नहीं कर्ज की स्थित में आ गए। इसका असर चारों ओर दिखाई दिया। सितंबर से आवेदन शुरू होने के बावजूद किसान बीज खरीदने से पीछे हट रहे हैं। इसकी बड़ी वजह बाजार में आलू के बेहद कम भाव और सरकारी बीज की ऊंची कीमत है।
आलू बेचकर बीज खरीदना भी मुश्किल
वर्तमान में ओवर साइज आलू 500 से 800 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। गुल्ला और किर्री जैसी छोटी श्रेणी के आलू की बिक्री से किसानों को कोल्ड स्टोर का किराया तक निकालना मुश्किल हो रहा है। इसके उलट सरकारी बीज की कीमत 2980 से 3630 रुपये प्रति क्विंटल तक है। जिस आलू को बेचकर किसान अगली फसल की तैयारी करना चाहते हैं, उसकी कीमत के मुकाबले नया बीज कई गुना महंगा पड़ रहा है। सरकार की ओर से प्रति क्विंटल एक हजार रुपये का अनुदान दिए जाने के बावजूद किसानों को बीज खरीदने के लिए बड़ी रकम जुटानी पड़ रही है।
पुराने बीज के सहारे बुआई की तैयारी
खंदौली के किसान संजीव कुमार का कहना है कि आलू के मौजूदा भाव को देखते हुए महंगा बीज खरीदना घाटे का सौदा है। सरकार को बाजार के भाव के हिसाब से नए बीज की कीमत तय करनी चाहिए। और अतिरिक्त छूट देनी चाहिए। बमान के किसान जितेंद्र कुमार बताते हैं कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार आलू की स्थिति ज्यादा खराब है।
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बीज की श्रेणी सीड साइज की कीमत ओवर साइज की कीमत
- आधारित प्रथम 3630 3040
- आधारित द्वितीय 3480 2980
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