यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 05, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आगरा के स्कूल से आधा दर्जन गरीब छात्रों को निकाला गया
जानकारी मिलते ही अभिभावक विद्यालय पहुंचे लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई, अभिभावकों का कहना है कि स्कूल संचालक फीस मांग रहा है।

आगरा (जागरण संवाददाता)। शिक्षा अधिकार अधिनियम का निजी स्कूल मखौल उड़ा रहे हैं। मंगलवार को धनौली के एक स्कूल ने आधा दर्जन छात्रों को इसलिए निकाल दिया, क्योंकि उनका दाखिला गरीबों के लिए आरक्षित निशुल्क फीस वाली सीटों पर हुआ था। साथ ही अभिभावकों से कह दिया कि बच्चों को पढ़ाना है तो फीस जमा कराओ।
मामला धनौली स्थित एसएन कॉन्वेंट स्कूल का है। धनौली सत्य नगर निवासी दीपचंद की बेटी मुस्कान, मैना की बेटी शिवानी और कैलाशी के आवेश व कुशल का दाखिला शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के तहत हुआ था। इसी विद्यालय से शिवानी कक्षा एक और मुस्कान यूकेजी उत्तीर्ण कर चुकी हैं।
सभी विद्यार्थी मंगलवार को स्कूल पहुंचे। प्रार्थना सभा के बाद वे अपनी-अपनी क्लास में बैठ गए। क्लास टीचर ने उपस्थिति दर्ज की। टीचर ने उन आधा दर्जन छात्र-छात्रओं को क्लास से बाहर निकाल दिया, जिनके दाखिला फ्री सीट पर हुआ था। उन्हें 20 मिनट तक प्रांगण में खड़े किए रखा। आरोप है कि बाद में प्रबंधक ने इन छात्रों को विद्यालय से बाहर निकाल दिया। बच्चे घर पहुंचे और उन्होंने आपबीती अभिभावकों को बताई।
जानकारी मिलते ही अभिभावक विद्यालय पहुंचे, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल संचालक फीस मांग रहा है। साथ ही कह रहा है कि या फिर दाखिला को ऑनलाइन आवेदन करो, जबकि आवेदन करने का समय निकल गया है।
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जबकि इसी सत्र में अप्रैल से मई तक बच्चे पढ़ाई कर चुके हैं। बच्चों की किताब और ड्रेस भी आ चुकी हैं। आवेश और कुशल के पिता कैलाशी ने बताया कि तहसील दिवस में अफसरों से स्कूल प्रबंधक की शिकायत की गई है।
