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आगरा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को राहत: पुलिस ने हटाई हत्या के प्रयास की धारा; कोर्ट ने दी जमानत

Published: Sun, 04 Oct 2026 08:38 AM (IST)Updated: Sun, 04 Oct 2026 08:45 AM (IST)

आगरा पुलिस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के पैतृक आवास पर प्रदर्शन के मामले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज हत्या ...और पढ़ें

दीवानी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के वकील।

दीवानी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के वकील।

HighLights

  1. पुलिस ने हत्या प्रयास की धारा विवेचना से हटाई।

  2. सीजेएम कोर्ट ने छह कांग्रेसियों को जमानत दी।

  3. मुख्य चुनाव आयुक्त के आवास पर हुआ था प्रदर्शन।

जागरण संवाददाता, आगरा। मुख्य चुनाव आयुक्त के पैतृक आवास पर कांग्रेस पदाधिकारियों के प्रदर्शन के मामले में पुलिस बैकफुट पर आ गई है। विवेचना में हत्या प्रयास की धारा का हटा दिया है। जेल भेजे गए कांग्रेसियों की ओर शनिवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्र पेश किया गया। सुनवाई के बाद सीजेएम शारिब अली ने आरोपितों का जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए उनकी रिहाई के आदेश दिए। रविवार को उनकी रिहाई के लिए बड़ी संख्या में कांग्रेसी जिला कारागर पर एकत्रित हुए।

विजय नगर कॉलोनी में 28 सितंबर को कांग्रेसियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास पर प्रदर्शन किया था। इस दौरान दीवार पर आपत्तिजनक भाषा लिखी थी। पुलिस ने नौ नामजद और 15-20 अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने आरोपितों के विरुद्ध जानलेवा हमला, रास्ता अवरुद्ध करने,सरकारी कार्य में बाधा, गृह अतिचार, दंगा, मारपीट, जान से मारने की धमकी एवं सात क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।

पुलिस ने छह कांग्रेसियों को भेजा था जेल

कांग्रेस के छह कार्यकर्ताओं मुकेश धनगर, अनिल कुमार यादव, राजेश कुमार, मनोज गौड़, राजेश गौतम उर्फ राजा गौतम व पंकज चौधरी को गिरफ्तार करके जेल भेजा था। कोर्ट ने विवेचक को तीन अक्टूबर तक इस विवेचना पूरी करने के आदेश दिए थे। साथ ही विवेचना के बाद आरोपितों के विरुद्ध हत्या प्रयास का आरोप नहीं पाया जाता है तो संबंधित धारा का लोप करने के निर्देश दिए थे।

कांग्रेसियों की ओर से जमानत प्रार्थना पत्र पेश किया गया

शनिवार को जेल भेजे गए आरोपित कांग्रेसियों की ओर से जमानत प्रार्थना पत्र पेश किया गया। कांग्रेसियों की ओर से अधिवक्ताओं ने कहा कि पुलिस ने हत्या प्रयास की धारा को हटा दिया है। वे निर्दोष हैं। उन्होंने कोई अपराध कारित नहीं किया है। जमानत दिए जाने की याचना की गई। वहीं, अभियोजन की ओर से अभियोजन अधिकारी बृजमोहन सिंह कुशवाहा ने जमानत अर्जी का विरोध किया। कहा कि मामला गंभीर प्रकृति का है और लोकसेवक के खिलाफ अपराध किया गया है। जमानत अर्जी खारिज किए जाने की प्रार्थना की।

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कोर्ट ने आरोपितों की ओर से पेश की गई जमानत अर्जियां स्वीकार कर लीं

कोर्ट ने आरोपितों की ओर से पेश की गई जमानत अर्जियां स्वीकार कर लीं। आदेश में लिखा कि आरोपियों पर आरोपित धाराएं सात वर्ष या उससे कम कारावास से दंडनीय हैं। आरोपितों का कोई आपराधिक इतिहास पेश नहीं किया गया है। कोर्ट ने आरोपितों को 20-20 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र व इसी धनराशि की की दो-दो प्रतिभूति दाखिल करने पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। 

सुनवाई के दौरान रामनाथ सिकरवार, अमित सिंह सहित तमाम कांग्रेसी नेता मौजूद रहे। कांग्रेसियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार दीक्षित, रामदत्त दिवाकर, पवन शर्मा, बिलाल अहमद आदि द्वारा पैरवी की गई।