आगरा, जागरण संवाददाता। फिरोजाबाद की ग्लास मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, आगरा का फाउंड्री उद्योग और भरतपुर राजस्थान में स्टोन क्रशर प्लांट को छोड़कर ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में 242 उद्योगों का रास्ता साफ हो गया है। राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) की रिपोर्ट पर पर्यावरण मंत्रालय, वन एवं जलवायु परिवर्तन ने रेड, आरेंज, ग्रीन और सफेद श्रेणी का झंझट खत्म कर दिया है।

अब सिर्फ वायु प्रदूषण स्कोर के मानक का पालन किया जाएगा। बीस हजार वर्ग मीटर से अधिक की ग्रुप हाउसिंग का नक्शा पास हो सकेगा। इकाइयों के संचालकों को हर साल थर्ड पार्टी आडिट कराना होगा। इसकी रिपोर्ट उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) कार्यालय में जमा होगी।

आठ दिसंबर 2016 को उद्योगों पर रोक लगाई थी

पर्यावरण मंत्रालय, वन एवं जलवायु परिवर्तन ने आठ दिसंबर 2016 को उद्योगों पर रोक लगाई थी। रेड, आरेंज, ग्रीन और सफेद श्रेणी गठित की गई थी। इसी आधार पर टीटीजेड क्षेत्र में उद्योग लग रहे थे। बंदिशों की मार के चलते आगरा में नए उद्योग लगना बिल्कुल बंद हो गया था। सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2019 में नीरी को रिपोर्ट देने के लिए कहा था। दिसंबर 2021 में नीरी ने रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दी और अब पर्यावरण मंत्रालय, वन एवं जलवायु परिवर्तन ने इस रिपोर्ट को टीटीजेड प्राधिकरण को लागू करने के लिए भेजा है।

तीन श्रेणियों में बांटा गया स्कोर

पर्यावरण मंत्रालय ने रेड, आरेंज सहित अन्य श्रेणियों को महत्व नहीं दिया है बल्कि वायु प्रदूषण स्कोर के आधार पर उद्योगों को लगाने के लिए कहा गया है। वायु प्रदूषण स्कोर को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी शून्य से दस तक होगी। इसमें संबंधित विभागों से ही अनुमति लेनी होगी। दूसरी श्रेणी 11 से 20 तक की है। इसमें नीरी की खंडवृत्त गाइड लाइन का पालन करना होगा। यह गाइड लाइन सभी उद्योगों के लिए एक ही तरह की है। तीसरी श्रेणी 20 से अधिक की है।

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इस श्रेणी में आने वाले उद्योगों को नीरी की अनुमति लेनी होगी। इसके बाद ही यह उद्योग लग सकेंगे। आगरा डेवलपमेंट फाउंडेशन के सचिव केसी जैन ने बताया कि ग्लास, फाउंड्री और स्टोन क्रशर प्लांट का वायु प्रदूषण स्कोर 20-20 है लेकिन जलवायु मंत्रालय ने इन तीन की अलग से गाइड लाइन जारी करने के आदेश दिए हैं बाकी सभी उद्योगों को लगाने का रास्ता साफ हो गया है।

सभी इकाइयों को कराना होगा थर्ड पार्टी आडिट

उद्योगों पर कुछ पाबंदी भी रहेंगी। सभी इकाइयों को हर साल थर्ड पार्टी आडिट कराना होगा। इसकी रिपोर्ट यूपीपीसीबी कार्यालय में जमा करानी होगी। उन्होंने बताया कि बीस हजार वर्ग मीटर से अधिक की ग्रुप हाउसिंग का नक्शा अब एडीए से पास हो सकेगा। नक्शा पास न होने के चलते प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में गरीबों के आवास नहीं बन सके हैं। 

Edited By: Abhishek Saxena

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