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सोने की तरह दमक उठी आगरा किला में जहांआरा व रोशनआरा की छतरियां, ASI ने 12 लाख में कराया मडपैक-केमिकल ट्रीटमेंट

Published: Mon, 05 Oct 2026 07:10 AM (IST)

आगरा किला स्थित जहांआरा और रोशनआरा की छतरियां एएसआई की रसायन शाखा द्वारा मडपैक और केमिकल ट्रीटमेंट के बाद सोने ...और पढ़ें

आगरा किला स्थित जहांआरा और रोशनआरा की छतरियां

आगरा किला स्थित जहांआरा और रोशनआरा की छतरियां 

HighLights

  1. जहांआरा और रोशनआरा की छतरियां सोने की तरह दमक उठीं।

  2. एएसआई की रसायन शाखा ने मडपैक-केमिकल ट्रीटमेंट किया।

  3. संगमरमर और तांबे की प्लेटों की सफाई पर 12 लाख व्यय।

जागरण संवाददाता, आगरा: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की रसायन शाखा द्वारा मडपैक और केमिकल ट्रीटमेंट किए जाने से आगरा किला स्थित जहांआरा और रोशनआरा की छतरियां सोने की तरह दमक उठी हैं। स्मारकों में लगे संगमरमर की रंगत को मडपैक ट्रीटमेंट (मुल्तानी मिट्टी का लेप) कर और उनकी छत पर लगी तांबे की प्लेट को केमिकल ट्रीटमेंट कर साफ किया गया है। 

पर्यटकों द्वारा स्पर्श किए जाने से संगमरमर पीला नजर आने लगा था, जबकि तांबे की प्लेट धूल कणों के जमाव और मौसम की वजह से काली पड़ गई थी।

आगरा किला स्थित छतरियों पर रसायन शाखा ने किया काम

आगरा किला में अंगूरी बाग परिसर में बने खास महल से जहांआरा और रोशनआरा की छतरियां सटी हुई हैं। महल के उत्तर में जहांआरा और दक्षिण में रोशनआरा की छतरी हैं। इनका निर्माण शाहजहां द्वारा कराया गया था। दोनों छतरियों में बाहर की तरफ सफेद संगमरमर लगा है, जबकि अंदर की तरफ चूने का सफेद प्लास्टर हो रहा है। छतरियों की छत पर तांबे की प्लेट लगी हुई है। धूल कणों के जमाव और पर्यटकों के स्पर्श से छतरियों में लगा संगमरमर पीला नजर आने लगा था। यही स्थिति छतरियों में अंदर की तरफ हो रहे चूने के सफेद प्लास्टर की हो गई थी।

करीब दो माह तक चले काम पर 12 लाख रुपये हुए हैं व्यय

छत पर लगी तांबे की प्लेट भी धूल कणों के प्रभाव की वजह से काली हो गई है। एएसआइ की रसायन शाखा ने इसे देखते हुए दोनों छतरियों और उनके संगमरमरी अहाते में मडपैक ट्रीटमेंट का काम जुलाई के अंतिम सप्ताह में शुरू किया था। संगमरमर और चूने के प्लास्टर को साफ करने के साथ तांबे की प्लेट को साफ किया गया। करीब दो माह तक चले काम पर करीब 12 लाख रुपये व्यय हुए हैं। इससे यह मुगल काल की तरह दमकने लगे हैं।

मडपैक ट्रीटमेंट से किया था साफ

रसायन शाखा ने पूर्व में मोती मस्जिद, दीवान-ए-आम स्थित शहंशाह के बैठने के स्थान को मडपैक ट्रीटमेंट कर साफ किया था। मडपैक ट्रीटमेंट में मुल्तानी मिट्टी का लेप कर उसे सूखने दिया जाता है। मुल्तानी मिट्टी संगमरमर की सतह पर जमा धूल कणों को सोख लेती है। बाद में उसे पानी से धोकर साफ कर दिया जाता है।

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शाहजहां की बेटियां थीं जहांआरा और रोशनआरा

जहांआरा और रोशनआरा मुगल शहंशाह शाहजहां और मुमताज की बेटियां थीं। इनमें जहांआरा सबसे बड़ी थी। जहांआरा दाराशिकोह के साथ थी। रोशनआरा ने उत्तराधिकार के युद्ध में औरंगजेब का साथ दिया था। आगरा किला स्थित जहांआरा की छतरी पर लगी तांबे की प्लेट काली पड़ गई थी।