उत्तर भारत की प्रसिद्ध राम बरात कल: प्रभु श्रीराम के मस्तक पर दमकेगा 7 KG का चांदी का मुकुट, आगरा में दिखेगा रघुकुल का वैभव
आगरा में 6 अक्टूबर को निकलने वाली प्रभु श्रीराम की वरयात्रा के लिए भव्य तैयारियां की गई हैं। इसमें श्रीराम, ...और पढ़ें

फाइल फोटो।
HighLights
प्रभु श्रीराम 7 किलो के रजत मुकुट में दूल्हा स्वरूप में
लक्ष्मण का साढ़े छह किलो का मुकुट शेषनाग आकृति से सजेगा
पोशाक वृंदावन, जयपुर, उदयपुर की कारीगरी का अद्भुत संगम होगी
जागरण संवाददाता, आगरा। प्रभु श्रीराम जब दूल्हा बनकर नगर भ्रमण को निकलेंगे तो श्रद्धालुओं के नेत्र उनके मनोहारी स्वरूप को निहारते ही ठहर जाएंगी। मस्तक पर सात किलो का रजत मुकुट शोभित होगा, जिसमें सूर्य चिह्न प्रकाश की किरणे बिखेर रहा होगा। मुकुट में जयपुर से लाई गई कलिंगी, भगवान विष्णु के पांच आयुध और नृत्य करता मोर अपनी अलग ही आभा बिखेरेंगे। पीतांबरी शेरवानी पर महरून रंग का काम, जरी और गोटे से सजी पोशाक जब रघुवीर धारण करेंगे तो ऐसा लगेगा, जैसे सूर्यवंशी रघुकुल का तेज स्वयं नगर के मार्गों पर अपने ऐरावत हाथी वाले रथ में विराजमान होकर उतर आया हो।
पारंपरिक श्रीरामलीला महोत्सव के अंतर्गत छह अक्टूबर को प्रभु श्रीराम की वरयात्रा निकाली जाएगी। इसमें उनका सिर्फ दूल्हा रूप में शृंगार नहीं होगा, बल्कि आस्था के उस स्वरूप को सजाने की तैयारी है, जिसे देखने के लिए हर वर्ष हजारों नेत्र बेसब्री से प्रतीक्षा करते हैं।
मुकुट में लगा सूर्य चिह्न रोशनी के साथ दमकते हुए रघुकुल की मर्यादा का संदेश देगा। नाचते मोर की आकृति मुकुट को राजसी सौंदर्य देगी तो भगवान विष्णु के पांच आयुध और कमल प्रभु के दिव्य स्वरूप की अनुभूति कराएंगे।
जब रघुवीर दूल्हा बनेंगे, साथ चलेगा पूरा परिवार
प्रभु श्रीराम के साथ लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न भी विशेष शृंगार में नजर आएंगे। लक्ष्मण जी का रजत मुकुट करीब साढ़े छह किलो का होगा। उसमें रत्नों के साथ शेषनाग की आकृति उकेरी गई है। मुकुट में लगा शेषनाग चिह्न रोशनी में दमकता दिखाई देगा। शेषनाग स्वरूप लक्ष्मण जी के इस मुकुट में उनके दिव्य स्वरूप की झलक देखने को मिलेगी।
छह अक्टूबर की वरयात्रा में दिखेगा सूर्यवंशी रघुकुल का वैभव
भरत और शत्रुघ्न के लिए भी पूरी तरह रजत के मुकुट तैयार किए गए हैं। करीब साढ़े तीन से चार किलो वजनी इन मुकुटों में कलिंगी और अन्य अलंकरण लगाए जाएंगे। चारों भाइयों का यह शृंगार वरयात्रा को राजसी भव्यता देने के साथ राम परिवार के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था को और गहरा करेगा।
तीन शहरों की कारीगरी में सजेगा रघुवीर का रूप
प्रभु श्रीराम के साथ उनके तीनों अनुजों की पोशाकें विशेष रूप में तैयार कराई गई है। पीतांबरी रंग की आभा लिए इस पोशाक पर महरून रंग का काम किया गया है। जरी और गोटे से सजी पोशाक वृंदावन, जयपुर और उदयपुर से तैयार कराई गई है। ब्रज की भक्ति, जयपुर की बारीक कारीगरी और उदयपुर की राजसी छटा इस पोशाक में एक साथ दिखाई देगी।
दो महीने से चल रही दिव्य छवि को सजाने की तैयारी
प्रभु के विशेष शृंगार को अंतिम रूप देने के लिए रामलीला कमेटी की 15 सदस्यीय शृंगार समिति पिछले दो महीने से जुटी है। समिति के प्रमुख राम अभिषेक शर्मा अपनी टीम के साथ मुकुट, पोशाक और आभूषणों की बारीकियों पर काम कर रहे हैं। वर्ष 2004 से वह शृंगार समिति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और इस वर्ष कमेटी ने उन्हें समिति का प्रभारी बनाया है।
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जयपुर की कलिंगी, विष्णु के पांच आयुध और नाचता मोर बढ़ाएंगे मुकुट की शोभा
राम अभिषेक शर्मा बताते हैं कि हर साल प्रभु के स्वरूप में कुछ नया करने की कोशिश रहती है। इस बार भी कुछ प्रयोग किए गए हैं। उद्देश्य सिर्फ भव्यता बढ़ाना नहीं, ऐसा रूप तैयार करना हगै कि जब श्रद्धालु प्रभु श्रीराम के दर्शन करें तो उनके मन में भक्ति का भाव और गहरा हो जाए। उनके साथ सुमित बंसल, किट्टू शर्मा, ह्रदेश, रवि बंसल, बृजमोहन पाराशर, यश पाराशर, शिवम उपाध्याय, कृष बंसल, तुषार, अर्पित, कृष्णा, सार्थक, राम बदन और सक्षम रोजाना तैयारियों में जुटे हैं।
छह अक्टूबर को गलियों में उतरेगा रघुकुल का वैभव
छह अक्टूबर की शाम जब वरयात्रा निकलेगी और रघुवीर का मुकुट रोशनी में दमकेगा, तो वह सिर्फ चांदी की चमक नहीं होगी। उसमें महीनों की तैयारी, कारीगरों की मेहनत और श्रद्धालुओं की आस्था की चमक भी होगी। सूर्य चिह्न की रोशनी के बीच जब प्रभु श्रीराम दूल्हे के रूप में नगर से गुजरेंगे, तो मानो रघुकुल की मर्यादा, राम के आदर्श और अयोध्या का वैभव एक साथ आगरा की सड़कों पर उतर आएगा।
