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गंदगी से फिर दागदार हुआ ताजमहल का संगमरमरी हुस्न, गोल्डीकाइरोनोमस कीड़ों ने छोड़े भूरे निशान

Published: Sat, 17 Oct 2026 07:07 AM (IST)

ताजमहल के संगमरमरी हुस्न पर यमुना की गंदगी में पनपने वाले गोल्डीकाइरोनोमस कीड़ों के कारण भूरे दाग फिर से दिखने ...और पढ़ें

इंसेट में ताजमहल में यमुना किनारा की तरफ स्थित पच्चीकारी के पैनल पर जमा कीड़े द्वारा छोड़ी गई गंदगी के दाग। जागरण

इंसेट में ताजमहल में यमुना किनारा की तरफ स्थित पच्चीकारी के पैनल पर जमा कीड़े द्वारा छोड़ी गई गंदगी के दाग। जागरण

HighLights

  1. ताजमहल पर गोल्डीकाइरोनोमस कीड़ों के भूरे दाग।

  2. यमुना की गंदगी में पनप रहे हैं ये कीड़े।

  3. विश्व धरोहर स्थल की सुंदरता और छवि प्रभावित।

जागरण संवाददाता, आगरा। ताजमहल के संगमरमरी हुस्न पर एक बार फिर गंदगी के दाग नजर आने लगे हैं। यमुना की गंदगी में पनपने वाले कीड़े गोल्डीकाइरोनोमस द्वारा छोड़ी जाने वाली गंदगी (मल-मूत्र) की वजह से यह स्थिति हो रही है। यमुना की तरफ मुख्य मकबरे के मेहराब, दीवार, पच्चीकारी और जाली पर भूरे रंग के दाग देखे जा सकते हैं। इससे देश और दुनियाभर से आने वाले पर्यटकों के मध्य विश्व धरोहर स्थल की छवि खराब हो रही है।
आगरा किला और ताजमहल के बीच नदी में मोड़ होने से नालों के साथ बहकर आई गंदगी यहां जमा होती रहती है। अप्रैल और अक्टूबर में यमुना में पानी का बहाव कम या ना के बराबर होता है।

यमुना की गंदगी में पनपे कीड़े गोल्डीकाइरोनोमस की वजह से स्थिति

गंदगी पर जमने वाली काई में कीड़ा गोल्डीकाइरोनोमस पनपता है, जो काई को खाकर बढ़ता है। यह दिन के समय ताजमहल के सफेद रंग की वजह से उसकी ओर आकर्षित होता है। कुछ दिनों से ताजमहल की उत्तरी मेहराब में दीवार व पच्चीकारी पर कीड़े द्वारा छोड़ी गई गंदगी की वजह से भूरे रंग के दाग नजर आ रहे हैं। इनकी वजह से स्मारक की सुंदरता प्रभावित हो रही है। इससे स्मारक की रखरखाव की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

taj mahal green kida

2015 में सबसे पहले आया था नजर

ताजमहल की उत्तरी दीवार पर कीड़े द्वारा छोड़ी गई गंदगी के दाग वर्ष 2015 में सबसे पहले दिखे थे। वर्षा होने की वजह से दीवार जगह-जगह हरी हो गई थी। एएसआइ की रसायन शाखा ने तब सेंट जोंस कालेज के साथ मिलकर कीड़े पर शोध किया था। कीड़े की पहचान गोल्डीकाइरोनोमस के रूप में हुई थी। कीड़े के पनपने के लिए यमुना की दुर्दशा को रसायन शाखा ने जिम्मेदार माना था। यमुना की दशा में जब तक सुधार नहीं होगा, तब तक कीड़े की समस्या दूर नहीं होगी।

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मार्च-अप्रैल और सितंबर-अक्टूबर का समय गोल्डीकाइरोनोमस के पनपने के लिए सबसे उपयुक्त होता है। इस समय तापमान कम होने के साथ ही यमुना में पानी का बहाव कम होता है। कीड़े द्वारा छोड़ी गई गंदगी का ताजमहल के संगमरमर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है। गंदगी के दाग धोकर साफ करा दिए जाएंगे।

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डॉ. एमके भटनागर, निदेशक रसायन शाखा एएसआई