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दिल्ली पुलिस के नए नेतृत्व के आगे CJP का पैंतरा फेल, नकेल कसने वाली नई रणनीति से विफल हुआ प्रदर्शन

Published: Sun, 11 Oct 2026 10:08 PM (IST)

दिल्ली पुलिस ने नए नेतृत्व में अपनी रणनीति बदलकर जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया। पिछली बार ...और पढ़ें

सीजेपी प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा में तैनात दिल्ली पुलिस, जागरण।

सीजेपी प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा में तैनात दिल्ली पुलिस, जागरण।

HighLights

  1. दिल्ली पुलिस ने बदली रणनीति, अराजकता को रोका।

  2. अभूतपूर्व सुरक्षा उपाय, 35 डिटेंशन सेंटर बनाए गए।

  3. प्रमुख नेताओं को हिरासत में लिया, सेवाएं सीमित कीं।

स्वदेश कुमार, नई दिल्ली। एक दिन के प्रदर्शन की अनुमति की आड़ में गत जून-जुलाई में राजधानी करीब एक महीने तक अराजकता की स्थिति का गवाह बनी रही।

दिल्ली पुलिस ने सीजेपी को एक दिन के प्रदर्शन की अनुमति दी थी। इसके बाद अतिआत्मविश्वास में दिल्ली पुलिस के नेतृत्व में यहां भीड़ को जुटने दिया।

पुलिस की तैयारी का नहीं था अनुमान

शांति की अपील प्रदर्शनकारियों से करनी चाहिए थी लेकिन तब दिल्ली पुलिस को ही शांति का पाठ पढ़ा दिया गया था। जब अराजकता बढ़ी तो तत्कालीन पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा को अचानक हटाकर आइबी के विशेष निदेशक अनुराग कुमार को दिल्ली पुलिस की कमान दे दी गई।

इसके बाद नई दिल्ली रेंज के तत्कालीन संयुक्त आयुक्त दीपक पुरोहित के स्थान पर नुपुर प्रसाद को कमान दी गई। इस बीच पिछले प्रदर्शन के जरिये शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर आत्मविश्वास से लबरेज सीजेपी नेतृत्व ने 10 अक्टूबर को फिर से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का एलान कर दिया।

लेकिन तब तक पुलिस के तेवर बदल चुके थे। इस बार पुलिस ऐसे अभूतपूर्व कदम उठा लेगी, इसका अनुमान किसी को नहीं था।

संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना प्रथम कर्तव्य

दिल्ली पुलिस के पूर्व एसीपी और दिल्ली पुलिस महासंघ के अध्यक्ष वेद भूषण का कहना है कि पुलिस का प्रथम कर्तव्य नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है। इसमें पुलिस सफल रही। पिछली बार जो गलतियां दिल्ली पुलिस ने कीं, उसकी वजह से बहुत नुकसान हुआ।

इसकी भरपाई इस बार की गई। हवाई जहाज से सीजेपी नेतृत्व को और गुरुग्राम से ध्रुव राठी को हिरासत में लेना, ये बताता है कि दिल्ली पुलिस ने इस बार बेहतर रणनीति बनाई थी और उस पर अमल भी किया। इनके अलावा आप और अन्य दलों के नेताओं को भी तुरंत हिरासत में लिया गया।

पहली बार बनाए गए 35 डिटेंशन सेंटर

पहली बार पुलिस ने हिरासत में लेने के बाद इन्हें रखने के लिए 35 डिटेंशन सेंटर भी बनाए। वेद भूषण का मानना है कि पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार का आइबी का अनुभव भी दिल्ली पुलिस के काम आया है। हालांकि दिल्ली पुलिस के ही पूर्व एसटीएफ राजेंद्र सिंह इससे असहमत दिखते हैं।

उनका कहना है कि दिल्ली पुलिस को हर नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना था। लेकिन यहां किसी नीति या सरकार का विरोध करने वालों के अधिकारों का हनन हुआ है। कुछ शर्तों के साथ उन्हें जंतर-मंतर या अन्य स्थान पर धरना-प्रदर्शन की अनुमति देनी चाहिए थी। मेट्रो और रेल सेवाओं को सीमित करने से दो से ढाई लोग प्रभावित हुए। इनके भी अधिकारों का हनन हुआ।

दिल्ली पुलिस की तरफ से उठाए गए कदम का प्रभाव

इंटरनेट, मेट्रो और रेल सेवाएं सीमित

पुलिस ने नौ अक्टूबर की रात से इंटरनेट, मेट्रो, रेल सेवाओं को सीमित कर दिया। इसकी वजह से बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी नई दिल्ली जिले में प्रवेश नहीं कर पाए।

भारी सुरक्षा बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती

जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में पुलिस के साथ-साथ आरएएफ, सीआरपीएफ, सीआइएसएफ, बीएसएफ सहित अर्धसैनिक बलों के 35 हजार तैनात कर दिए गए। इसकी वजह से कानून-व्यवस्था की स्थिति मजबूत रही।

बैरिकेडिंग और जांच चौकियां

प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए जंतर-मंतर तक पहुंचने वाले कई मार्ग बंद कर दिए गए। कई मार्गों पर डायवर्जन किए गए। अतिरिक्त बैरिकेडिंग की गई। गाजीपुर, टिकरी, चिल्ला, अप्सरा बार्डर और धौलाकुआं जैसे दिल्ली के प्रवेश द्वारों पर वाहनों की सघन जांच की गई। इसकी वजह से प्रदर्शनकारियों के प्रवेश पर अंकुश लगा।

तकनीकी निगरानी

कानून-व्यवस्था पर कड़ी नजर रखने के लिए नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और आसपास के क्षेत्रों में ड्रोन से निगरानी की गई तथा पुलिसकर्मियों को बाडी कैमरों से लैस किया गया। ताकि पुलिस पर अनर्गल आरोप लगें तो सुबूत पेश किए जा सकें। इसके साथ इंटरनेट मीडिया पर एआइ और भ्रामक वीडियो के संदर्भ में पुलिस समय-समय पर स्थिति स्पष्ट करती रही।

प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं की हिरासत

प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने से पहले ही या मार्च निकालने की कोशिश के दौरान सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका, जर्मनी से आए यूट्यूबर ध्रुव राठी करीब चार हजार लोगों को पुलिस ने अलग-अलग जगहों से हिरासत में लिया। हवाई जहाज से ही सीजेपी नेतृत्व को हिरासत में लेने की रणनीति सफल रही।

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