Budget 2023: अब डिजिटल लाइब्रेरी से पढ़ाई करेंगे भारत के बच्चे, वित्तमंत्री ने दी नई सौगात
नए बजट में शिक्षा को लेकर कई बड़े बदलावों को जगह दी जानी है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में शिक्षा के क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देने के लिए नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी जैसे बड़े कदम उठाए है जो बच्चों की शिक्षा में मददगार होंगी।

नई दिल्ली, टेक डेस्क। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को घोषणा की कि बच्चों और किशोरों के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना की जाएगी ताकि विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों, भाषाओं, शैलियों और स्तरों पर गुणवत्तापूर्ण पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
पंचायत और वार्ड स्तरों पर होगी डिजिटल लाइब्रेरी
अपने बजट भाषण में उन्होंने कहा कि राज्यों को उनके लिए पंचायत और वार्ड स्तरों पर भौतिक पुस्तकालय स्थापित करने और राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय संसाधनों तक पहुंचने के लिए बुनियादी ढांचा देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पढ़ाई की संस्कृति का निर्माण करने और महामारी के समय सीखने के नुकसान की भरपाई के लिए, नेशनल बुक ट्रस्ट, चिल्ड्रन बुक ट्रस्ट और अन्य सोर्स को इन भौतिक पुस्तकालयों को क्षेत्रीय भाषाओं और अंग्रेजी में गैर-पाठ्यचर्या संबंधी शीर्षक देने और भरने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
गैर सरकारी संगठनों के साथ सहयोग
सीतारमण ने यह भी कहा कि साक्षरता में काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों के साथ सहयोग भी इस पहल का एक हिस्सा होगा। वित्तीय साक्षरता को बढ़ाने के लिए, वित्तीय क्षेत्र के नियामकों और संगठनों को इन पुस्तकालयों को आयु-उपयुक्त पठन सामग्री प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
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शिक्षा क्षेत्र के हितधारकों ने प्रस्ताव का किया स्वागत
एचएलएम ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की प्रवक्ता तन्वी मिगलानी के अनुसार, एक समेकित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों और किशोरों के लिए विभिन्न विषयों में सीखने के संसाधन उपलब्ध कराने के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना एक महान नीतिगत उपाय है। यह अध्ययन सामग्री की पहुंच को बढ़ाएगा और छात्रों के बीच एक मजबूत पठन संस्कृति का निर्माण करेगा।
वही MRG स्कूल के प्रिंसिपल अंशु मित्तल ने कहा कि विभिन्न शैलियों से किताबें और शिक्षण सामग्री की सुविधा के लिए डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना से छात्रों को महामारी के दौरान हुई सीखने की हानि से निपटने में मदद मिलेगी।
पैसिफिक वर्ल्ड स्कूल की प्रिंसिपल पूजा बोस ने भी उनके विचारों का समर्थन किया, जिन्होंने कहा कि छात्रों को गैर-सरकारी संगठनों के साथ साझेदारी में अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं को सीखने के लिए प्रोत्साहित करने से संस्कृति और क्षेत्रीय अवधारणाओं की उनकी समझ में सुधार होगा।
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