नई दिल्ली, टेक डेस्क। दैनिक जागरण की नई सीरीज #NayaBharat में आपका स्वागत है। कोरोनावायरस महामारी के बीच उत्पन्न हुई आर्थिक संकट के दौर में हमने Jagran HiTech #NayaBharat सीरीज की शुरुआत की है। इस सीरीज को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत मिशन के विजन को ध्यान में रखकर बनाया गया है। रोजाना की तरह आज के एपिसोड में हमारे साथ BPC Technologies के देबार्षी दत्ता (एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट एडं ग्लोबल हेड मार्केट प्लेस) जुड़े हैं। कोविड-19 जैसी महामारी के दौर में इंडस्ट्री समेत रूरल इकोनॉमी जैसे कई मुद्दों पर देबार्षी दत्ता से Jagran Hightech के एडिटर सिद्धार्था शर्मा ने बातचीत की। बता दें कि BPC Technologies एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए काम करती है।

सिद्धार्था शर्मा- कोविड-19 की वजह से एग्रीकल्चर सेक्टर पर क्या असर पड़ा है?

देबार्षी दत्ता- कोविड-19 की वजह से कारोबार पर काफी असर पड़ा है। एग्रीकल्चर बेस्ड अर्थव्यवस्था पर भी इसका साफ असर देखा जा रहा है। कोविड-19 की वजह से सप्लाई चेन बुरी तरह से प्रभावित हुई है। इसकी वजह से एग्रीकल्चर सेक्टर को बड़ा नुकसान झेलना पड़ रहा है। इस साल मार्च माह मंर जब लॉकडाउन लागू हुआ, तो शुरुआती तौर पर सप्लाई चेन पूरी तरह से बंद होगी। लेकिन थोड़े वक्त में शहरी इलाकों में सप्लाई चेन में सुधार देखा गया। लेकिन भारत के बाकी हिस्सों में जहां भारत की बड़ी आबादी निवास करती है, वहां पर सप्लाई चेन ब्लॉक रही। प्री-फेस सप्लाई में 500 किमी से ज्यादा सप्लाई हो नहीं रही थी। इंटर स्टेट की दिक्कतें, ऑफिस का न मिलना, शिपमेंट की परेशानी हो रही थी। लेकिन सरकार ने सही वक्त पर सही कदम उठाया। इसके बाद से सप्लाई चेन में थोड़ा सुधार हुआ है।

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सिद्धार्था शर्मा- एग्रीकल्चर की सप्लाई चेन में किस तरह सुधार होगा? किसान और कंज्यूमर की जरूरतों को कैसे पूरा किया जाएगा? इसके साथ ही बिजनेस मॉडल में क्या बदलाव देखने मिलेगा। इस बारे में बताइए?

देबार्षी दत्ता- मॉडल में काफी बदलाव होगा। किसान अभी काफी डिजिटली हो रहे हैं। मंडियों में फसल की बिक्री कम हो गई। इसके अलावा सरकार ने मंडियों के अलावा भी फसल ट्रेडिंग की इजाजत दे दी है। डिजिटल इकोसिस्टम तेजी से बढ़ा है। कारोबारियों के अलावा आम लोगों ने अब डिजिटल पेमेंट लेना शुरू कर दिया है। UPI, KCC और लेडिंग तेजी से डिजिटाइज्ड हो रहे हैं। हमें दिख रहा है कि करीब 20 तरह के डिजिटल पेमेंट हो रहे हैं।

सिद्धार्था शर्मा- डिजिटल साक्षरता के विस्तार के लिए क्या हो रहा है?

देबार्षी दत्ता- डिजिटल साक्षरता को लेकर काफी चुनौतियां है। शुरुआत में हमें भी थोड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। हमें ऐसा फील होता है कि लोग अभी भी कागज पर लिखते हैं, फिर उसकी फोटो खींचकर वॉट्सऐप करते हैं, वो वॉट्सऐप पर सीधे नहीं लिखते हैं। ऐसे में यह सारी दिक्कते हैं। लेकिन इसके बावजूद हमारी तरफ से कई तरह की पहल शुरू की गई हैं, जिसमें हम गांव स्तर पर बातचीत करते हैं। सरकार पिछले 8 से 9 साल से एग्रीकल्चर क्लीनिक चला रही थी। इसके साथ FPO और VLE की मदद से किसानों को फाइनेंशियली तौर पर शिक्षित कर रहे हैं। अभी खरीफ का सीजन शुरू होगा। किसानों को सीड्स की जरूरत होगी। ऐसे में डिजिटल तरीके से काम किया जा रहा है। गांव में भी अब लोग Zoom कॉलिंग कर रहे हैं।

सिद्धार्था शर्मा- एग्रोटेक इंडस्ट्री पर कोविड-19 का कितना असर है? और लॉकडाउन में इंडस्ट्री क्या कर रही है?

देबार्षी दत्ता- अभी जितने स्कोप थे, वो और बढ़ गए हैं। सरकार की तरफ से मंडियों के प्राइवेटाइजेशन को आगे बढ़ाया जा रहा है। मंडी के लिए सरकार कानून में कई तरह के संशोधन कर रही है। साथ ही मंडियों के अलावा भी फसल खरीद को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में कई सारे बदलाव हो रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में लोग अब इंश्योरेंस की अहमियत को समझने लगे हैं। ऐसे में बिजनेस मॉडल में बदलाव हो रहा है। नए फिनटेक आ रहे हैं और इन्हें भी असवर दिख रहा है कि प्राइवेटाइजेशन हो रहा है। ऐसे में नए-नए मॉडल आ सकते हैं।

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सिद्धार्था शर्मा- लॉकडाउन में ग्रामीणों के जमीनी स्तर पर क्या बदलाव देख रहे हैं? क्या वो भविष्य को लेकर आशावान नजर आ रहे हैं?

देबार्षी दत्ता- अभी तक किसान व्यापारी से सीधे मिलकर अपनी फसल का सौदा करता था और एक साथ अपनी पूरी फसल को बेचता था। इसमें से 20 फीसदी अगल क्वॉलिटी की फसल होती थी, जबकि बाकी 20 फीसदी अलग होती थी। मतलब किसी हद तक व्यापारी क्वॉलिटी से समझौता कर लेता था। लेकिन लॉकडाउन में अब व्यापारी और किसान फिजिकल तौर पर एक दूसरे से नहीं मिलते हैं। ऐसे में क्वॉलिटी को लेकर थोड़ा सी भी कमी रह जाती है, तो कंसाइनमेंट रिजेक्ट हो जाता है और उस पर भारी जुर्माना लगा दिया जाता है। ऐसे में कोई भी रिस्क नहीं लेते थे। ऐसे में आज के वक्त में लोग क्वलिटी को लेकर काफी ध्यान दे रहे हैं। ऐसे में किसान सही क्वॉलिटी के बीज का इस्तेमाल कर रहे हैं।

सिद्धार्था शर्मा- सरकार ने छोटे और मध्यम वर्ग के कारोबार के लिए राहत पैकेज का ऐलान किया है। साथ ही कई अन्य तरह के राहत पैकेज पेश किए हैं। ऐसे में इस बारे में आपका क्या कहना है?

देबार्षी दत्ता- Farmer Producer organisation छोटे कारोबार और मध्यम कारोबार के लिए काफी अहम होते हैं। ऐसे में आज के वक्त में जितने भी एफपीओ होते हैं, उनके पास फाइनेंशियल सपोर्ट नहीं होता है। इस वजह से इनके पास मोलभाव की ताकत नहीं रहती है। अब हम इस बारे में कई प्रास्ताव हासिल कर रहे हैं, और उन्हें बैंकों को दे रहे हैं। एग्रीकल्चर सेक्टर MSME और SME के तहत आता है। ऐसे में FPO को MSME और SME के दायरे में लाया जाएं, जिससे सरकारी राहत पैकेज का फायदा FPO को मिल सके। यह एग्रीकल्चर और किसानों को सीधे फायदा पहुंचाएगा। सर्टिफाइड शीड्स को MSME और SME कम दाम पर बेचते है। जबकि ब्रांडेड मैन्युफैक्चर्स इसी शीड्स को ज्यादा कीमत पर बेचते हैं। ऐसे में सरकार को सभी शीड्स मैन्युफैक्चर्स को MSME और SME के दायरे में लाना चाहिए। ऐसे में किसानों तक क्वॉलिटी शीड्स को अफोर्डेबल कीमत पर किसानों तक पहुंचाना चाहिए।

सिद्धार्था शर्मा- हमारे किसान भाइयों के लिए नए भारत के लिए कोई संदेश देना चाहेंगे?

देबार्षी दत्ता- खेती किसानी को छोड़कर सबकुछ रुक सकता है। अगर यह रुक गया, तो सबकुछ रुक जाएगा। सरकार इस वक्त खेती-किसानी को कई तरह से मदद कर रही है। हालांकि अभी किसानों को और भी कई तरह की मदद की जरूरत है। साथ ही डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना चाहिए। इंडस्ट्री को किसानों के करीब लाने और एफपीओ को मजबूत बनाने पर जोर देना है। नॉलेज, एडवाइजरी की भी किसानों की जरूरत होगी।

Jagran HiTech #NayaBharat सीरीज के तहत इंडस्ट्री के लीडर्स और एक्सपर्ट्स ने क्या कहा है, ये जानने के लिए यहां क्लिक करें। 

Posted By: Harshit Harsh

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