चटके या टूटे हुए बर्तनों में खाना खाने से घर में क्यों होता है क्लेश और धनहानि? जानिए इसके पीछे की वजह
वास्तु और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चटके या टूटे बर्तनों में भोजन करने से राहु का दुष्प्रभाव होता है, जिससे ...और पढ़ें

क्यों नहीं करते टूटे बर्तन का प्रयोग? (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र में ऐसे कई महत्वपूर्ण नियम के बारे में बताया है, जिनका पालन न करने से धनहानि होती है और काम में सफलता प्राप्त नहीं होती है। वास्तु शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चटके या टूटे हुए बर्तनों में भूलकर भी भोजन नहीं करना चाहिए।
ऐसा माना जाता है कि इस तरह की गलती को करने से राहु का दुष्प्रभाव जीवन पर पड़ता है और घर में क्लेश की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। क्या आपको पता है कि चटके या टूटे हुए बर्तनों में भोजन करने से क्यों मना किया जाता है और इससे कौन से नुकसान होते हैं। अगर नहीं पता, तो आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इसके बारे में विस्तार से।
1. राहु का दुष्प्रभाव- ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि घर में मौजूद टूटी-फूटी चीजों का संबंध राहु से होता है। अगर कोई चटके या टूटे हुए बर्तनों में भोजन करता है, तो उस पर राहु ग्रह का दुष्प्रभाव पड़ता है, जिसकी वजह से व्यक्ति को जीवन में नकारात्मकता, भ्रम और तनाव की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही बिना वजह के परिवार के सदस्यों के बीच बहस हो सकती है। इसलिए चटके या टूटे हुए बर्तनों में खाना खाने से मना किया जाता है। अगर आपके घर में चटके या टूटे हुए बर्तन हैं, तो उन्हें आज ही घर से बाहर कर दें।
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2. दरिद्रता का आगमन- धार्मिक मान्यता के अनुसार, धन की देवी मां लक्ष्मी का आगमन उसी घर में होता है, जहां स्वच्छता और सुंदरता हो। हिंदू धर्म में टूटे और चटके हुए बर्तन खंडित माने जाते हैं। इसलिए टूटे और चटके हुए बर्तन में भोजन करने की मनाही है। ऐसा माना जाता है कि इस तरह की गलती को करने से घर में अलक्ष्मी का वास होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, खंडित चीजों में लक्ष्मी की बड़ी बहन अलक्ष्मी का वास माना जाता है।
3. सकारात्मक ऊर्जा में बाधा आना- किचन में बर्तनों का अधिक महत्व है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, जब बर्तन टूट या कहीं से चकट जाते हैं, तो उनमें ऊर्जा का प्रवाह टूट जाता है। ऐसे में इस तरह के बर्तन में भोजन करने से व्यक्ति पर बुरा प्रभाव पड़ता है। साथ ही घर का माहौल तनावपूर्ण हो जाता है। बनते हुए काम बिगड़ने लगते हैं।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
