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राधा अष्टमी 2026: भूलकर भी इस दिशा में स्थापित न करें किशोरी जी की मूर्ति, भारी पड़ सकती है एक छोटी सी गलती

Published: Fri, 18 Sep 2026 04:50 PM (IST)

राधा अष्टमी पर राधा रानी की मूर्ति स्थापित करते समय वास्तु नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण है। उत्तर-पूर्व दिशा शुभ ...और पढ़ें

किस दिशा में स्थापित करें राधा रानी की मूर्ति? (Picture Credits- AI Images)

किस दिशा में स्थापित करें राधा रानी की मूर्ति? (Picture Credits- AI Images)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर राधा रानी का अवतरण हुआ था। इसलिए इस तिथि पर हर वर्ष राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार यह पर्व 19 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन राधा रानी की पूजा करने का विशेष महत्व है।

मान्यता है कि राधा अष्टमी के दिन लाडली जी की पूजा करने से जीवन में आने वाले सभी दुख-दर्द दूर होते हैं और शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। इस दिन राधा रानी की मूर्ति को शुभ दिशा में विराजमान करना चाहिए। तभी पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। मंदिर में किशोरी जी की मूर्ति को विराजमान करने के लिए वास्तु शास्त्र के अनुसार सहीदिशा का चयन करना चाहिए। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि राधा अष्टमी के दिन किस दिशा में स्थापित करें राधा रानी की मूर्ति।

कौन-सी दिशा है शुभ?

वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर में राधा रानी की मूर्ति के लिए उत्तर-पूर्व दिशा को शुभ और पवित्र माना जाता है। इस दिशा को देवताओं का निवास स्थान माना जाता है। इस दिशा से ही घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दिशा में राधा रानी की मूर्ति को स्थापित कर पूजा-अर्चना करने से शुभ फल प्राप्त होता है और किशोरी जी की कृपा प्राप्त होती है।

एक बात का विशेष ध्यान रखें कि राधा रानी की मूर्ति को भूलकर भी दक्षिण दिशा में विराजमान नहीं करना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिशा में पितरों का वास माना जाता है। इसलिए कहा जाता है कि राधा अष्टमी के दिन किशोरी जी की मूर्ति को स्थापित करने से पहले वास्तु शास्त्र के नियमों के बारे में जान लें।

कैसी होनी चाहिए राधा रानी की मूर्ति?

मंदिर में राधा रानी की अकेली मूर्ति को नहीं रखना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, श्री कृष्ण के साथ युगल रूप में मूर्ति रखना शुभ माना जाता है। मूर्ति लेते समय एक बात का विशेष ध्यान रखें कि मूर्ति खंडित नहीं होनी चाहिए। खंडित मूर्ति की पूजा करना शुभ नहीं होता है। अगर राधा रानी की मूर्ति चटकी हुई है, तो उसे पवित्र नदी में विसर्जित कर नई मूर्ति घर लाएं। मूर्ति में राधा रानी का चेहरा मुस्कुराता हुआ और करुणामयी होना चाहिए। क्रोध रूप वाली मूर्ति को मंदिर में न रखें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।