श्रीराधा अष्टमी 2026: किशोरी जी के चरणों में छिपे हैं ये 19 दिव्य चिह्न, श्रीकृष्ण भी करते हैं इनकी सेवा!
श्रीराधा रानी के दिव्य चरण कमलों की महिमा अपरंपार है, जिनकी सेवा से भगवान श्रीकृष्ण भी प्रसन्न होते हैं। इन ...और पढ़ें

राधा रानी के चरणों के 19 शुभ चिह्न (Pictures Credits- AI Images)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। इस साल 19 सितंबर 2026, शनिवार के दिन राधा रानी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। माना जाता है कि, कृष्ण को प्रसन्न करना है, तो राधा रानी के चरण रज की सेवा करो। मधुर भक्ति की प्रतीक श्रीराधा रानी के चरण कमल की सेवा ही वैष्णवों के जीवन का आधार मानी जाती है।
राधा जी के चरण कमलों की महिमा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिन श्रीकृष्ण के ऐश्वर्य और माधुर्य पर समस्त जगत मोहित है, वे भुवनमोहन श्रीकृष्ण खुद अपने हाथों से उनके चरण की सेवा करते हैं।
श्री हरिराम व्यास जी द्वारा रचित प्रसिद्ध पद 'व्यास वाणी' में कहा गया है कि,
चांपत चरन मोहनलाल।
पलंग पौढ़ी कुंवरि राधा नागरी नव बाल।।
अर्थात्- समस्त सुखों से भरपूर, कमल से कोमल श्रीराधा के चरणों की रज (पैर की मिट्टी) की इच्छा ब्रह्मा, शिव, सनकादिक, नारद, व्यास आदि भी करते हैं। श्रीराधा रानी के चरण कमलों में सुख प्रदान करने वाले 19 चिह्नों को धारण किया है। इन चिह्नों का ध्यान करने से मन और हृदय दोनों पवित्र होते हैं तथा सांसारिक क्लेश, पीड़ा, दुख और डर से मुक्ति मिलती है।
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श्रीराधा रानी के 19 प्रमुख चरण चिह्न
श्रीराधा रानी के दोनों पैरों में कुल 19 अलग-अलग चिह्न हैं, जिन्हें अध्यात्म और शुद्धता से जोड़कर देखा जाता है। इसमें-
शंख, जौ, चक्र, ऊर्ध्व रेखा, कमल, अंकुश, ध्वज, छाता, फूल, कंगन, लता, अर्धचंद्र, मीन, भाला, गदा, रथ, कुंडल, यज्ञकुंड, गिरी है। प्रत्येक चिह्न की अपनी अलग और खास विशेषता है।
जौ
जिस तरह जौ के दाने सभी जीवों के जीवन का आधार हैं, ठीक उसी तरह यह हर कोई जानता है कि, राधा रानी के चरण कमल सभी आत्माओं को पोषण करते हैं।
चक्र
वह अपने भक्तों के 6 शत्रुओं काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर का नाश करती हैं।
कमल
कमल का फूल दिन में खिलता है और रात में सिकुड़ जाता है, उनके चरण कमलों के ध्यान मग्न उस अलौकिक आनंद का अनुभव प्रदान करते हैं, जो अंधकार को भी समाप्त कर दे।
ध्वज
ध्वज चिह्न भक्तों की जीत और हर प्रकार के डर से खुद को सुरक्षित महसूस कराने का प्रतीक माना जाता है।
अंकुश
यह चिह्न भक्तों के मन को वश में करता है और उन्हें सही रास्ता दिखाता है।
कंगन
श्रीजी के चरण कमल श्रीकृष्ण के हाथों में रहते हैं, जिन्हें वे अत्यंत भावुक होकर सहलाते हैं।
फूल
जिस तरह हर फल पौधे के खिलने के बाद अस्तित्व में आते हैं, उसी तरह आध्यात्मिक फल भी सबसे पहले उनके चरणों में खिलने के बाद ही प्रकट होते हैं।
लता
श्रीजी के चरण कमलों का आश्रय लेने से भौतिक इच्छाओं की लता शांत होने लगती है।
अर्धचंद्र
अर्धचंद्र इस बात को दर्शाता है कि, परम वैष्णव भगवान शिव जिनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित है, उन्होंने असल में अपने मस्तक को श्रीजी के चरण कमलों से सजाया है, क्योंकि श्रीजी और श्रीकृष्ण ही उनके परम आराध्य हैं।
ऊर्ध्व रेखा
श्रीराधा रानी के चरण कमल हम जैसे पतित कलियुगी जीवों तक पहुंचकर हमें वापस नित्य गोलक वृंदावन खींच सकते हैं।
शंख
जो भक्त सिर्फ राधा रानी और श्रीकृष्ण के चरण कमलों की शरण लेते हैं, वे हमेशा विजयी होते हैं।
गिरी
गिरीराज जी हमेशा श्रीजी की शरण में रहते हैं और परम आनंदमय प्रेम और भक्ति के साथ उनके चरणों की सेवा करते हैं।
यज्ञकुंड
श्रीजी के प्यारे-प्यारे भक्तों के सभी पापों और कर्म उनके कमल चरणों के प्रभाव से भस्म हो जाते हैं।
कुंडल
राधारानी के नूपुरों की झंकार कृष्ण के कानों को आकर्षित करती हैं।
रथ
जब कोई भक्त राधारानी के चरण-कमलों के रथ पर अपना मन स्थिर करता है, तो वह भक्ति जीवन में आसानी से हमारा मित्र बन जाता है और मायादेवी द्वारा फेंकी गई सभी परीक्षाओं पर जीत हासिल कर लेता है।
गदा
स्वामिनी जी के चरण कमल साधक के हृदय में निवास करने वाली वासना का अंत करते हैं।
भाला
सभी प्रकार की शक्ति का उद्गम श्रीजी के चरण कमल में वास करती है।
मीन
जैसे जल के बिना मछली का जीवन असंभव है, वैसे ही श्रीजी के चरण कमलों के बिना भक्त और भगवान श्रीकृष्ण का कोई अस्तित्व नहीं है।
छाता
श्रीजी के सुंदर और सबसे शक्तिशाली चरण कमल भक्तों की सांसारिक कष्टों से रक्षा करते हैं।
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