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दीवाली पर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए वास्तु के अनुसार सजाएं अपना घर, आएगी सुख-समृद्धि

Published: Wed, 21 Oct 2026 06:29 PM (IST)

दीवाली पर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए घर की सजावट वास्तु अनुसार करना शुभ माना जाता है। जानिए ...और पढ़ें

दीवाली पर वास्तु के इन आसान टिप्स से सजाएं घर ।  (Picture Credit- AI Generated)

दीवाली पर वास्तु के इन आसान टिप्स से सजाएं घर । (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. मुख्य द्वार को साफ और सुंदर रखें।

  2. ईशान कोण को व्यवस्थित और स्वच्छ रखें।

  3. लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति सही दिशा में स्थापित करें।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में मनाए जाने वाले सबसे बड़े तीज-त्‍योहारों में से एक दीवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां लक्ष्मी अपने भक्तों के घर आती हैं और उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। यही वजह है कि दीवाली से पहले लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं और उन्हें फूलों, रंगोली व दीपकों से सजाते हैं। हालांकि, घर की सजावट करते समय वास्तु के कुछ नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी होता है।

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का मुख्य द्वार, पूजा स्थल और घर की दिशाएं सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ी होती हैं। ऐसे में अगर आप भी इस दीवाली अपने घर को सुंदर बनाने के साथ सुख-समृद्धि का स्वागत करना चाहते हैं, तो वास्तु के कुछ आसान टिप्स अपना सकते हैं। आइए जानते हैं कि दीवाली पर घर को किस तरह सजाना चाहिए।

मुख्य द्वार को रखें साफ और सुंदर

वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को घर का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। मान्यता है कि मुख्य द्वार से ही घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। इसलिए दीवाली के दिन अपने घर के मुख्य द्वार की अच्छी तरह सफाई करें। दरवाजे के आसपास जूते-चप्पल, कूड़ेदान और बेकार सामान जमा न होने दें। मुख्य द्वार को सुंदर बनाने के लिए आप गेंदे के फूलों की माला लगा सकते हैं। इसके अलावा आम या अशोक के पत्तों का तोरण भी लगाया जा सकता है। इससे घर का प्रवेश द्वार आकर्षक दिखाई देगा।

मुख्य द्वार पर बनाएं स्वास्तिक

हिंदू धर्म में स्वास्तिक को शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है। दीवाली पर घर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ स्वास्तिक या ओम का चिह्न बना सकते हैं। इसके लिए रोली, हल्दी या कुमकुम का इस्तेमाल करें।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्वास्तिक बनाने से घर में शुभता आती है। आप चाहें तो दरवाजे के पास शुभ-लाभ भी लिख सकते हैं।

ईशान कोण को रखें साफ

वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिशा को पूजा-पाठ और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए शुभ माना जाता है। इसलिए दीवाली से पहले घर के इस कोने की अच्छी तरह सफाई करें। यहां टूटा हुआ सामान, पुराने डिब्बे, बेकार फर्नीचर या कबाड़ जमा न होने दें। कोशिश करें कि यह जगह खुली और व्यवस्थित रहे। अगर आपके घर में पूजा का स्थान इसी दिशा में है, तो उसे फूलों और दीपकों से सजाएं।

लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति सही दिशा में रखें

दीवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की तैयारी करते समय उनकी मूर्तियों को साफ चौकी पर स्थापित करें। वास्तु शास्‍त्र की मान्यताओं के अनुसार, घर के पूजा स्थल को उत्तर या पूर्व दिशा में होना चाहिए। पूजा की चौकी पर लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाएं। इसके बाद मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां चौकी पर स्थापित करें। ध्यान रखें कि पूजा स्थल के आसपास गंदगी या अनावश्यक सामान न रखा हो।

घर में सही जगह पर जलाएं दीपक

दीवाली पर दीपक जलाना सबसे महत्वपूर्ण होता है। दीपक को प्रकाश, शुभता और अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल, बालकनी और आंगन में दीपक जलाएं। वास्तु शास्‍त्र की मान्यताओं के अनुसार, घर के प्रवेश द्वार पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है। आप पूजा स्थल पर घी का दीपक और घर के अन्य हिस्सों में तेल के दीपक जला सकते हैं।

रंगोली से सजाएं घर का प्रवेश द्वार

दीवाली पर रंगोली बनाने की परंपरा बहुत पुरानी है। रंगोली को शुभता और खुशियों का प्रतीक माना जाता है। आप घर के मुख्य द्वार पर कमल, स्वास्तिक, दीपक या फूलों के डिजाइन वाली रंगोली बना सकते हैं।

रंगोली बनाने के लिए प्राकृतिक रंगों, फूलों की पंखुड़ियों और चावल के आटे का इस्तेमाल करें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।