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Janmashtami 2026: कान्हा और माखन-मिश्री का अनोखा नाता, पढ़ें इस प्रिय भोग का धार्मिक महत्व

Published: Wed, 02 Sep 2026 11:51 AM (IST)

कृष्ण जन्माष्टमी पर बाल गोपाल को माखन-मिश्री का भोग क्यों लगाया जाता है? जानिए इस परंपरा के पीछे का महत्व और भोग लगाने की सही विधि।

माखन-मिश्री खिलाने की परंपरा (AI-Generated image)

माखन-मिश्री खिलाने की परंपरा (AI-Generated image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी (krishna Janmashtami 2026) का त्योहार बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। भक्त अपने-अपने घरों में कान्हा के स्वागत की तैयारियों में लीन हैं। जन्म के बाद कृष्णा को तरह-तरह के व्यंजन भोग में लगाने की परंपरा भी काफी मशहूर है।

ऐसे में एक चीज जिसके बिना पूजा बिल्कुल अधूरी मानी जाती है वह है माखन और मिश्री। क्या आप जानते हैं कि श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग क्यों लगाना जरूरी है। आइए समझते हैं कि कान्हा को यह भोग इतना प्रिय क्यों है।

इस साल कब है जन्माष्टमी?

पंचांग के मुताबिक, इस साल भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि 4 सितंबर 2026 यानी शुक्रवार को रात 2:25 बजे से शुरू होगी और 5 सितंबर की रात 12:13 बजे खत्म हो जाएगी। भगवान का जन्म मध्यरात्रि (निशिता काल) में हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी का मुख्य व्रत 4 सितंबर को ही रखा जाएगा।

माखन-मिश्री का असल मतलब क्या है?

कृष्ण जी की बाल लीलाओं में जिस चीज का जिक्र बार-बार और सबसे ज्यादा होता है वह है माखन-मिश्री। बचपन में अपने दोस्तों के साथ मिलकर उन्होंने इतना माखन चुराया कि उन्हें 'माखन चोर' भी कहा गया।

लेकिन, इसके पीछे एक गहरा आध्यात्मिक अर्थ भी छिपा हुआ है। दूध को मथने के बाद जो माखन निकलता है, वह एकदम शुद्ध होता है। यह हमारे 'निर्मल मन' का प्रतीक माना गया है। वहीं, मिश्री 'मिठास' का प्रतीक है। भगवान को माखन-मिश्री अर्पित करने का मतलब है कि हम अपना साफ और पवित्र मन, जिसमें भक्ति और प्रेम की मिठास घुली हो, उन्हें सौंप रहे हैं।

भोग लगाने का सही तरीका

  • सबसे पहले बाल गोपाल को स्नान कराएं और उन्हें साफ व सुंदर वस्त्र पहनाकर श्रृंगार करें।
  • पूजा की जगह को फूलों से सजाएं और कान्हा के सामने एक कटोरी में माखन-मिश्री का भोग रखें।
  • भोग के साथ तुलसी दल (तुलसी का पत्ता) जरूर अर्पित करें, क्योंकि तुलसी के बिना कान्हा का भोग अधूरा माना जाता है।
  • आप माखन-मिश्री के साथ तरह-तरह के फल और सात्विक मिठाइयां भी रख सकते हैं।
  • अंत में सच्चे मन से श्रीकृष्ण की आरती करें और प्रसाद सभी भक्तों में बांट दें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।