त्रिदेव भी करते हैं जिनकी स्तुति! मां दुर्गा को क्यों कहा जाता है 'आदिशक्ति'? सृष्टि निर्माण का गूढ़ रहस्य
सनातन धर्म में मां दुर्गा को आदिशक्ति कहा जाता है, जो सृष्टि की मूल ऊर्जा और समस्त ब्रह्मांड की जननी ...और पढ़ें

मां दुर्गा को क्यों कहते हैं आदिशक्ति जानें (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
मां दुर्गा सृष्टि की मूल ऊर्जा 'आदिशक्ति' हैं।
त्रिदेव भी करते हैं आदिशक्ति मां दुर्गा की स्तुति।
महिषासुर वध हेतु हुआ था आदिशक्ति स्वरूप का अवतरण।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में मां दुर्गा को शक्ति, साहस और सृष्टि की मूल ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। माता दुर्गा केवल बुराई का नाश करने वाली देवी ही नहीं, बल्कि समस्त ब्रह्मांड की मूल शक्ति भी हैं। यही वजह है कि उन्हें 'आदिशक्ति' कहा जाता है। माता के इस स्वरूप की पूजा ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव सभी करते हैं।
आदि शक्ति की उत्पत्ति की राक्षसों का अत्याचार पृथ्वी से कम करने के लिए हुई थी और माता दुर्गा के इस स्वरूप को अनंत शक्तियों से भरपूर माना जाता है। अक्सर मन में यह सवाल आता है कि माता दुर्गा को आदिशक्ति क्यों कहा जाता है और सृष्टि के निर्माण से उनका क्या संबंध है? आइए आपको बताते हैं इसके रहस्य के बारे में।
कैसे हुई माता के आदिशक्ति स्वरूप की उत्पत्ति
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार महिषासुर नामक राक्षस वरदान पाकर अजेय हो और उसने देवताओं को परेशान करना आरंभ कर दिया। देवताओं ने कई बार उससे युद्ध किया, लेकिन हमेशा उससे पराजित हुए। उसके अत्याचार से देवताओं के बीच त्राहि-त्राहि मच गई।
महिषासुर के अत्याचारों से परेशान होकर देवतागण ब्रम्हा जी के पास गए उस समय ब्रह्मा जी ने देवताओं को बताया कि महिषासुर की मृत्यु किसी कुंवारी कन्या के हाथ से ही हप सकती है। उस समय समस्त देवताओं ने माता दुर्गा से आह्वाहन करके ऐसी शक्ति का निर्माण करने का आग्रह किया जो महिषासुर का अंत कर सके।
उसी समय माता के आदिशक्ति का अवतरण हुआ और जब आदि शक्ति की उत्पत्ति हुई तो उनका स्वरूप अनंत शक्तियों से भरा था, इसी वजह से उनका नाम आदि शक्ति पड़ा।
क्यों कहा जाता है मां दुर्गा को आदिशक्ति?
'आदिशक्ति' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है 'आदि' यानी शुरुआत और 'शक्ति' यानी ऊर्जा। इस प्रकार आदिशक्ति का अर्थ है वह मूल शक्ति, जिससे समस्त सृष्टि की उत्पत्ति और संचालन जुड़ा हो। मां दुर्गा को इसी अनादि और अनंत शक्ति का स्वरूप माना जाता है, इस वजह से उन्हें इस नाम से पुकारा जाता है।
देवी माहात्म्य और देवी भागवत पुराण जैसे ग्रंथों में माता की सर्वोच्च शक्ति के रूप में यह वर्णित किया गया है। ऐसी मान्यता है कि ब्रह्मांड की रचना, पालन और संहार के पीछे जिस दिव्य ऊर्जा की भूमिका है, वह आदिशक्ति ही हैं।
त्रिदेव क्यों करते हैं आदिशक्ति की स्तुति?
माता के इस स्वरूप की त्रिदेव भी स्तुति करते हैं क्योंकि जिस समय महिषासुर जैसे शक्तिशाली असुर के अत्याचार से समस्त देवता परेशान थे, तब माता ने इसी रूप में देवताओं की रक्षा की थी।
मां दुर्गा को सर्वोच्च शक्ति के रूप में पूजा जाता है और उन्हें सृष्टि के निर्माण से भी जोड़ा जाता है। माता के आदिशक्ति स्वरूप की आराधना केवल संकटों से मुक्ति की कामना के लिए नहीं, बल्कि साहस, विवेक और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए भी की जाती है।
मां दुर्गा को आदिशक्ति कहने के पीछे केवल एक नाम नहीं, बल्कि सृष्टि की उत्पत्ति, संचालन और संरक्षण से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं भी हैं।
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