विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सबसे पहले क्यों पूजे जाते हैं गणपति? पढ़ें बप्पा के प्रथम पूज्य बनने की पौराणिक कथा और शिवजी के वरदान की गाथा

Published: Mon, 14 Sep 2026 11:13 AM (IST)Updated: Mon, 14 Sep 2026 11:19 AM (IST)

किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा क्यों की जाती है? गणेश चतुर्थी के खास मौके पर ...और पढ़ें

सबसे पहले गणपति की पूजा क्यों? (AI-Generated Image)

सबसे पहले गणपति की पूजा क्यों? (AI-Generated Image)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2026) का त्योहार बहुत ही उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विघ्नहर्ता भगवान गणेश का जन्म हुआ था। आपने अक्सर देखा होगा कि घर में कोई भी शुभ काम, जैसे शादी, गृह प्रवेश या नया व्यापार शुरू करना हो, तो सबसे पहले गणपति बप्पा की ही पूजा होती है।

क्या आपने कभी सोचा है कि उन्हें 'प्रथम पूज्य' का दर्जा क्यों और कैसे मिला? इसके पीछे एक बेहद प्यारी और अद्भुत कथा है। आइए गणेश चतुर्थी के इस खास मौके पर जानते हैं महादेव के वरदान की गाथा।

माता-पिता के चरणों में बसा है संसार

शिव पुराण के साथ-साथ अन्य पौराणिक कथाओं में जिक्र मिलता है कि एक बार भगवान शिव और माता पार्वती ने अपने दोनों पुत्रों, गणेश जी और कार्तिकेय जी की परीक्षा लेनी चाही। दोनों के सामने एक शर्त रखी गई कि जो भी सबसे पहले पूरे ब्रह्मांड का चक्कर लगाकर लौटेगा, उसे ही सर्वश्रेष्ठ माना जाएगा।

शर्त सुनते ही भगवान कार्तिकेय अपने वाहन 'मोर' पर सवार होकर परिक्रमा करने निकल पड़े। दूसरी तरफ, गणेश जी का वाहन तो एक छोटा सा मूषक (चूहा) था। ऐसे में उन्होंने अपनी तेज बुद्धि का इस्तेमाल किया। उन्होंने ब्रह्मांड के चक्कर लगाने की बजाय अपने माता-पिता यानी शिव-पार्वती के चारों ओर ही तीन परिक्रमा पूरी कर ली।

जब भगवान शिव ने उनसे इसका कारण पूछा, तो गणेश जी ने बड़ी ही मासूमियत से कहा, "मेरे लिए तो मेरे माता-पिता के चरणों में ही मेरी पूरी दुनिया बसी है।" गणेश जी के इस उत्तर से शिव जी और माता पार्वती बहुत खुश हुए। उनकी इसी सूझबूझ के कारण उन्हें यह वरदान मिला कि आज के बाद किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले हमेशा गणेश जी की ही पूजा की जाएगी।

शिव पुराण के श्लोक के अनुसार-

त्वत्पूजां प्रथमं कृत्वा ततो पूजां करोति यः।
तस्य सर्वाणि कार्याणि सिद्ध्यन्ति नात्र संशयः॥

अर्थ: भगवान शिव ने श्री गणेश से कहा कि "जो मनुष्य किसी भी शुभ कार्य में सबसे पहले आपकी पूजा करेगा और उसके बाद अन्य देवी-देवताओं की पूजा करेगा, उसके सभी कार्य बिना किसी बाधा के सिद्ध होंगे, इसमें कोई संशय (संदेह) नहीं है।

बप्पा की पूजा में क्या है खास?

गणपति को खुश करने के लिए उनकी पूजा में कुछ चीजों का खास महत्व है:

मोदक का भोग: गणेश जी को मोदक बेहद पसंद हैं।

दूर्वा घास: भगवान गणेश को दूर्वा (हरी घास) अर्पित किए बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।

यह भी पढ़ें- गणेश चतुर्थी 2026: हर बाधा होगी दूर, बप्पा के इन 5 चमत्कारी मंत्रों में छिपा है हर समस्या का हल

यह भी पढ़ें- गणेश चतुर्थी के दिन गणपति बप्पा को नाराज कर सकती हैं ये 4 चीजें, स्थापना से पहले जरूर जान लें ये खास नियम

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।