नवरात्र में घट स्थापना के समय कलश पर क्यों बांधा जाता है कलावा? 99 % लोग नहीं जानते होंगे इसका रहस्य
नवरात्र में घट स्थापना के दौरान कलश पर कलावा बांधने का विशेष महत्व है, जो इसकी पवित्रता और सुरक्षा सुनिश्चित ...और पढ़ें

कलश पर क्यों बांधा जाता है कलावा जानें इसका रहस्य (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
कलश की पवित्रता और सुरक्षा के लिए कलावा बांधना आवश्यक।
नौ ग्रहों की सकारात्मक ऊर्जा फैलाता है यह पवित्र धागा।
भक्त और ईश्वर के बीच आध्यात्मिक बंधन का प्रतीक कलावा।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में कई तरह की रस्में निभाई जाती हैं और हर रस्म के पीछे कोई न कोई वजह भी होती है। अक्सर आपने देखा होगा किसी भी पूजा के समय तब कलश स्थापित किया जाता है तब उसमें एक कलावा जरूर बांधा जाता है। तांबे के कलश पर कलावा बांधने का ज्योतिष में बहुत ज्यादा महत्व होता है।
मुख्य रूप से किसी भी नवरात्र का मुख्य हिस्सा 'कलश स्थापना' को माना जाता है, जो एक पवित्र अनुष्ठान है और माता दुर्गा की दैवीय ऊर्जा का आह्वान करता है। नवरात्र के पहले दिन भक्त घरों में कलश की स्थापना करते हैं और उस कलश के पास अखंड ज्योति जागृत करते हैं।
यह माता दुर्गा का आह्वाहन करना होता है और माता के आगमन का संकेत देता है। इस दौरान जो कलश स्थापित होता है उसमें नौ दिनों तक दैवीय ऊर्जा विद्यमान रहती है। पवित्र कलश केवल एक वस्तु नहीं है बल्कि इसे देवी-देवता का आसन और स्वयं ब्रह्मांड का प्रतीक भी माना जाता है। आइए आपको बताते हैं कलश स्थापना के समय कलश में कलावा क्यों बांधना जरूरी होता है।
कलश पर कलावा क्यों बांधा जाता है?
नवरात्र के दौरान कलश की पवित्रता बनाए रखने और इसे किसी भी प्रकार की अशुध्दि से बचाने के लिए कलावा बांधा जाता है। यह धागा कलश की भी सुरक्षा करता है और जब यह किसी पवित्र धातु या मिट्टी के कलश पर बांधा जाता है, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कलश में नौ ग्रह वास करते हैं।
कलश में कलावा बांधने से नौ ग्रहों की सकारात्मक ऊर्जा चारों तरफ फैल जाती है और आस-पास के वातावरण में फैली नकारात्मकता दूर हो जाती है और इसकी वजह से कलश स्थापित करने वाले के जीवन में भी इसके शुभ परिणाम दिखाई देने लगते हैं।
कलश पर कलावा बांधने का महत्व
नवरात्र में जब घटस्थापना की जाती है उस समय उस कलश पर एक पवित्र धागा जिसे मौली या कलावा भी कहा जाता है उसे चारों ओर लपेटा जाता है।
कलश के चारों ओर बंधा ये कलावा भक्त और ईश्वर के बीच आध्यात्मिक बंधन को दिखाता है और दैवीय सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। इससे माता दुर्गा का आशीर्वाद बना रहता है और समृद्धि के योग बनते हैं। यह पवित्र धागा सभी तत्वों को एक साथ जोड़ता है और पवित्र अनुष्ठान को पूरा करने का एक संकल्प होता है।
कलावा को माना जाता है रक्षासूत्र
जिस तरह किसी व्यक्ति के हाथ में कलावा बांधने से यह उसकी सुरक्षा को सुनिश्चित करता है, उसी तरह से जब कलश में कलावा लपेटा जाता है तो यह कलश की सुरक्षा किसी भी वाह्य चीजों से करता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि नवरात्र के दौरान माता सुरगा की कृपा दृष्टि कलश के चारों और बनी रहती है और कलावा सुरक्षा प्रदान करता है।
अगर आप भी घर में नवरात्र के दौरान कलश स्थापना करते हैं, तो आपके लिए यह जान लेना जरूरी है कि कलश में कलावा बांधे बिना इसे स्थापित करना इसकी पूर्णता नहीं होती है।
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