भगवान शिव को क्यों नहीं चढ़ाई जाती तुलसी? शिव पुराण में बताया है पतिव्रता वृंदा के श्राप का रहस्य
भगवान शिव को तुलसी अर्पित न करने का कारण असुर जालंधर और उसकी पत्नी वृंदा की पौराणिक कथा में निहित ...और पढ़ें

महादेव पर न चढ़ाएं तुलसी (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पूजा-पाठ में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करने चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसी के पौधे में धन की देवी मां लक्ष्मी का वास माना जाता है। इसलिए इस पौधे का अधिक महत्त्व है। देवी-देवताओं की पूजा में तुलसी के पत्ते शामिल किए जाते हैं, लेकिन भगवान शिव की पूजा में तुलसी के पत्ते शामिल करने की मनाही है।
इससे संबंधित प्रसिद्ध पौराणिक कथा है, जो असुर जालंधर और उसकी पत्नी वृंदा से जुड़ी है। आइए आपको बताते हैं कि भगवान शिव पर तुलसी के पत्ते क्यों नहीं अर्पित करने चाहिए।
जालंधर वध की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, जालंधर नाम का एक असुर था। वे अधिक शक्तिशाली था। उसकी पत्नी वृंदा थी, जो जगत के पालनहार भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहती थी। वे एक पतिव्रता स्त्री थी। जालंधर अपनी पत्नी वृंदा के पतिव्रता धर्म और पुण्य के प्रभाव की वजह से अजेय हो गया था। जालंधर ने तीनों लोकों में आतंक मचा रखा था और देवताओं को उससे भय रहता था। जालंधर को कोई भी देवता हरा नहीं पा रहा था।
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शिव जी ने किया जालंधर से युद्ध
इसके आतंक से परेशान होकर देवता महादेव के पास पहुंचें, तो देवताओं ने प्रभु को जालंधर के बारे में बताया। इसके बाद महादेव ने जालंधर से युद्ध करने का फैसला लिया, लेकिन वृंदा के सतीत्व के रहते उसे मारना असंभव था।
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ऐसी स्थिति में सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने जालंधर का रूप धारण किया और वृंदा के पास चले गए। वृंदा ने विष्णु जी को अपना पति जालंधर समझ लिया, जिसकी वजह से उसका पतिव्रता धर्म टूट गया। पतिव्रता धर्म के टूटने पर ही भगवान शिव ने त्रिशूल की मदद से जालंधर का वध किया।
वृंदा ने महादेव को दिया श्राप
इसके बाद जब वृंदा को पता चला कि भगवान विष्णु ने मेरे साथ छल किया, तो वे अधिक दुखी हुई और क्रोध आया। ऐसे में वृंदा ने भगवान विष्णु को पत्थर बनने का श्राप दिया और अपने पति के साथ सती हो गई। उनके श्राप की वजह से जो पत्थर बना, उसका नाम शालिग्राम पड़ा। वहीं, वृंदा की राख से एक पौधा उत्पन्न हुआ, जिसे विष्णु जी ने तुलसी नाम दिया। तुलसी का पौधा वृंदा के रूप में उत्पन्न हुआ था। जानकारी के लिए बता दें कि महादेव ने वृंदा के पति का वध किया था। इसलिए भगवान शिव को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती है। वृंदा के पति जालंधर का वध का वर्णन पद्म पुराण के उत्तर खंड और शिव पुराण की रुद्र संहिता में मिलता है।
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