रावण के माता-पिता कौन थे? लंकापति के जन्म का यह रहस्य नहीं जानते होंगे आप
रावण को रामायण का महान योद्धा और लंकापति माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उसके माता-पिता कौन थे और उसका जन्म किस वंश में हुआ था?

रावण के जन्म का रहस्य: कौन थे उनके माता-पिता (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
रावण ऋषि विश्रवा और राक्षसी कैकसी के पुत्र थे।
जन्म से दस सिर नहीं, वरदान से मिला यह स्वरूप।
रावण ने चारों वेदों और कई विद्याओं में शिक्षा ली।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हमारे धर्म ग्रंथों में न जाने कितनी ऐसी गाथाएं लिखी हैं, जिनके बारे में आज भी लोग नहीं जानते हैं। आपने प्रभु श्री राम के जन्म से लेकर उनके वनवास और रावण के साथ युद्ध की कही कथाएं सुनी होंगी।
ये सभी कहानियां प्रभु श्री राम के शौर्य की गाथा बयां करती हैं। वहीं लंकापति रावण भी एक वीर योद्धा था, अत्यंत बलशाली होने के बाद भी वो ईश्वर के हाथों मोक्ष पाने के लिए ही युद्ध में हार गया।
आज भी अगर रामायण काल के योद्धाओं का जिक्र होता है, तो लंकापति रावण का नाम सबसे ऊपर आता है। रावण को भारतीय पौराणिक कथाओं के महान ऋषियों और सप्तऋषियों में से एक, पुलस्त्य का पोता बताया जाता है।
जहां रावण एक ब्राह्मण पुत्र था, वहीं उनकी माता एक राक्षसी थीं। आखिर क्या थी, इस योद्धा के जन्म की कहानी और उनके माता-पिता से जुड़े कुछ रहस्य जो शायद बहुत कम लोगों को पता होंगे।
रावण के माता-पिता कौन थे?
लंकापति रावण का जन्म ऋषि विश्रवा और राक्षसी माता कैकसी के घर हुआ था। इसी वजह से उसे आधा असुर और आधा ब्राह्मण बताया जाता है। रावण को प्राचीन हिंदू महाकाव्य रामायण में एक विपरीत चरित्र के रूप में दिखाया जाता है और उसे एक राक्षस और लंका के महान राजा के रूप में दिखाया गया है।
जन्म से ही बलवान दस सिर वाले असुरों के राजा वास्तव में जन्म से ही 10 सिरों वाले नहीं थे, बल्कि एक वरदान की वजह से उनका स्वरूप ऐसा हो गया था।
रावण के बारे में वाल्मीकि रामायण के सात्ज पद्मपुराण और श्रीमद्भागवत पुराण में भी विस्तार से बताया गया है। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु दूसरे जन्म में रावण और कुंभकर्ण के रूप में जन्म लिया।
इसका कारण यह था उनकी माता कैकसी ने अपने पति विश्रवा से यह वरदान मांगा कि उन्हें ऐसा पुत्र मिले जो देवताओं से ज्यादा शक्तिशाली हो और उन्हें कोई हरा न सके। कुछ समय बाद उसने एक अद्भुत बालक को जन्म दिया जो अत्यंत बलशाली था।
कौन थे रावण के पिता विश्रवा और माता कैकसी?
ऋषि विश्रवा ब्रह्माजी के पुत्र पुलस्त्य ऋषि के पुत्र थे। विश्रवा की पहली पत्नी भारद्वाज की पुत्री देवांगना थीं और उन दोनों के पुत्र कुबेर थे। वहीं विश्रवा की दूसरी पत्नी जो दैत्यराज सुमाली की पुत्री थीं और उनका नाम कैकसी था। उनकी संतान के रूप में रावण, कुंभकर्ण, विभीषण और सूर्पणखा ने जन्म लिया था।
कैसा था रावण का बचपन?
रावण के बचपन की बात करें तो उन्होंने सभी तरह की शिक्षाएं प्राप्त कीं और बचपन से ही रावण चारों वेदों का ज्ञाता बन गया। इसके अलावा उसने आयुर्वेद, ज्योतिष और तंत्र विद्या में भी शिक्षा हासिल की और सर्वश्रेष्ठ बन गया।
बड़े होने के बाद वो जंगलों में तपस्या के लिए चला गया और उनकी घोर तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने उसने अजर और अमर होने का वरदान मांगा, उस समय ब्रह्मा जी ऐसा वरदान न दे सके और उसे अन्य शक्तियां प्रदान कीं। आगे चलकर वो शिव जी की तपस्या में लीन हो गया और उसे 10 शीश का वरदान मिला।
वास्तव में रावण के पास पिता की वजह से अद्भुत ज्ञान था और माता के कारण उनमें बहुत ज्यादा शक्तियां थीं, जिसकी वजह से वो ज्ञान और शक्ति का अनोखा संगम था।
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