रावण का अंतिम संस्कार कहां और कैसे हुआ था? पढ़ें मृत्यु के बाद की पूरी कहानी
रावण की मृत्यु के बाद उसके अंतिम संस्कार की पूरी कहानी रामायण में वर्णित है। भगवान श्रीराम के समझाने पर ...और पढ़ें

रावण की मृत्यु के बाद लंका में विभीषण ने निभाई जिम्मेदारी । (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण में रावण की मृत्यु के बाद की घटनाओं का भी विस्तार से वर्णन मिलता है। लंका के राजा रावण का वध भगवान श्रीराम ने युद्ध में किया था। इसके बाद उसके छोटे भाई विभीषण ने रावण के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई। वाल्मीकि रामायण के युद्धकांड में इस प्रसंग का उल्लेख मिलता है।
विभीषण ने अंतिम संस्कार से क्यों किया इनकार?
युद्धकांड के सर्ग 109 और 111 में एक प्रसंग बताया गया है, जिसमें कहा गया है कि रावण की मृत्यु के बाद विभीषण अपने भाई के शव को देखकर बेहद दुखी हुए। हालांकि, रावण के गलत कर्मों से वह पहले ही दुखी और नाराज थे। इसी कारण उन्होंने शुरुआत में रावण का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। तब भगवान श्रीराम ने विभीषण को समझाया कि मृत्यु के बाद शत्रुता समाप्त हो जाती है। श्रीराम ने कहा कि रावण भले ही अधर्म के मार्ग पर चला हो, लेकिन अब वह मृत है और उसका विधिपूर्वक अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए। उन्होंने विभीषण को अपने बड़े भाई के अंतिम संस्कार का कर्तव्य निभाने के लिए कहा।
लंका में हुई अंतिम संस्कार की तैयारी
श्रीराम की बात मानकर विभीषण ने रावण के अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू की। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, इसके लिए अलग-अलग प्रकार की लकड़ियां, चंदन, अगरु और सुगंधित पदार्थों की व्यवस्था की गई। धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पुरोहितों और आवश्यक सामग्री का भी प्रबंध किया गया।
रावण के शरीर को वस्त्रों से ढककर एक सुंदर पालकी में रखा गया। पालकी को फूलों और ध्वजों से सजाया गया था। लंका के लोग और राक्षस समुदाय के लोग भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। क्योंकि रावण एक राजा था इसलिए पूरे राजकीय सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया गया।
विभीषण ने दी मुखाग्नि
अंत में विभीषण ने ही अपने बड़े भाई रावण की चिता को अग्नि दी। इसके बाद उन्होंने स्नान किया और धार्मिक विधि के अनुसार जल में तिल और कुश अर्पित किए। उन्होंने रावण को प्रणाम किया।
कहां हुआ था रावण का अंतिम संस्कार?
वाल्मीकि रामायण में रावण के अंतिम संस्कार के लिए किसी आधुनिक शहर या आज के किसी निश्चित भौगोलिक स्थान का नाम नहीं मिलता। ग्रंथ के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि रावण का अंतिम संस्कार लंका में ही एक पवित्र स्थान पर धार्मिक विधि-विधान के साथ किया गया था।
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