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रावण से जुड़े 6 बड़े मिथक और उनका सच: क्या जन्म से राक्षस था लंकापति?

Published: Sat, 27 Jun 2026 04:00 PM (IST)

रावण से जुड़े छह प्रचलित मिथकों की सच्चाई उजागर करता है, जिसमें उसके जन्म, शक्ति, भक्ति और शासनकाल से संबंधित भ्रांतियों को दूर किया गया है।

रावण से जुड़े 6 मिथक (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण की बात हो तो भगवान श्रीराम के अलावा लंका पति रावण का भी नाम याद आ जाता है। रावण लंका राजा था, जो अत्यंत ज्ञानी पंडित था। रावण में सत्व, रज और तम तीनों ही गुण मौजूद थे।

रावण से जुड़ी कुछ ऐसे मिथक जो काफी प्रचलित हैं, आज इस लेख के माध्यम से हम इसके पीछे का सच जानेंगे।

रावण से जुड़े मिथक

पहला मिथक- रावण जन्म से ही राक्षस था।

सच्चाई-रावण का जन्म एक विद्वान के घर में हुआ था। पिता ऋषि विश्रवा से उन्हें ब्राह्मण वंश से जुड़ा ज्ञान मिला, जबकि माता के कारण वे राक्षस कुल से जुड़े थे। इस तरह उन्हें दोनों ही वंशों के गुण विरासत में मिले थे। हालांकि, उनके जन्म से कहीं अधिक उनके फैसलों ने उनकी किस्मत और अंत को तय किया।

दूसरा मिथक

रावण रामायण का सबसे शक्तिशाली योद्धा था।

सच्चाई- रावण महाज्ञानी होने के साथ काफी शक्तिशाली था, लेकिन अजेय नहीं था। अपने जीवनकाल में उसे कई प्राणियों ने हराया और आखिरकार राम जी ने रावण को उसके कर्मों की सजा देते हुए परास्त कर दिया।

तीसरा मिथक

रावण भगवान शिव का सबसे बड़ा भक्त था।

सच्चाई- रावण बेशक शिव भक्त था, लेकिन कई धर्मग्रंथों में मार्केंडेय, नंदी और नयनमार जैसे भक्तों को भी शिव जी के परम भक्तों में गिना जाता है। उनकी भक्ति काफी अच्छी थी, लेकिन जरूरी नहीं कि बेमिसाल भी हो। यह नाम परंपरा और अर्थ पर निर्भर करता है, केवल भक्ति ने उन्हें अधर्म के नतीजों से मुक्ति नहीं दिलाई।

चौथा मिथक

रावण के दस सिर थे?

सच्चाई- कई विद्वान रावण के दस सिर को सिंबॉलिक के रूप में देखते हैं। अक्सर कहा जाता है कि, वे ज्ञान, भावनाओं या गुणों के दस रूपों को दर्शाते हैं। अलग-अलग परंपराओं में उन्हें अलग-अलग तरह से परिभाषित किया गया है। सिंबॉलिज्म अक्सर असल में पढ़ने से ज्यादा गहरा होता है।

पांचवां मिथक

रावण एक बुरा शासक था।

सच्चाई- पौराणिक ग्रंथों में रावण के राज में लंका को खुशहाल, समृद्धि और अमीर बताया गया था। उसके दुश्मन भी उसके राज्य की शान को मानते थे। वह एक होनहार एडमिनिस्ट्रेटर और राजा था। उसकी नैतिक कमियों ने अंत में उसकी कामयाबियों को दबा दिया।

छठा मिथक

रावन ने पूरी दुनिया हासिल कर ली थी।

सच्चाई- रावण ने कई राजाओं को हराया और स्वर्ग के प्राणियों पर रावण ने कभी भी कब्जा नहीं किया। कई शक्तिशाली राजा और ऋषि उसके काबू से बाहर थे। उसकी इच्छाएं बहुत बड़ी थीं, लेकिन अनलिमिटेड नहीं थीं। कई कहानियों में उसकी जीत की हद को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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