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कौन थीं तपस्विनी स्वयंप्रभा, जिन्होंने वानर सेना को मायावी गुफा से बाहर निकाला; पढ़ें रामायण की अनसुनी गाथा 

Published: Mon, 02 Nov 2026 06:43 PM (IST)

रामायण में एक रहस्यमयी तपस्विनी स्वयंप्रभा का उल्लेख है, जिन्होंने माता सीता की खोज के दौरान मायावी गुफा में फंसी ...और पढ़ें

रामायण की मायावी गुफा और तपस्विनी स्वयंप्रभा का अद्भुत पराक्रम (Picture Credit: AI Generated)

रामायण की मायावी गुफा और तपस्विनी स्वयंप्रभा का अद्भुत पराक्रम (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. वानर सेना सीता की खोज में मायावी गुफा में फंसी।

  2. तपस्विनी स्वयंप्रभा ने अपनी दिव्य शक्ति से उन्हें बचाया।

  3. यह प्रसंग वाल्मीकि रामायण में वर्णित एक अनसुनी कथा है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण की कुछ ऐसी कथाएं हैं जिनके बारे में आज भी लोगों को नहीं पता है। कुछ ऐसे पात्र जिनसे दुनिया अनजान है और उनकी गाथा अनसुनी है। वाल्मीकि रामायण में एक रहस्यमयी और अनदेखी कर दी जाने वाली स्त्री का उल्लेख मिलता है जिनका नाम स्वयंप्रभा थी। यही नहीं उन्होंने उस समय वानर सेना की रक्षा भी की जब वो माता सीता की खोज में जा रही थी।

जिस समय वानर सेना के सभी वानर थके-हारे, प्यासे और निराश भटकते हुए एक ऐसी गुफा में पहुंचे जहां बहती हुई जलधाराएं थीं, फलों से लदे पेड़ थे और खिले हुए फूल थे। वहां एक विशाल महल था, जिनके दरवाजों और खिड़कियों में कीमती रत्न जड़े हुए थे यही नहीं वहां सोने-चांदी के ढेर लगे थे।

उस समय इस मायावी गुफा से निकल पाना असंभव हो गया। इसी प्रसंग की पूरी कहानी में स्वयंप्रभा ने वानर सेना की जान बचाई और उन्हें गुफा से बाहर निकाला। आइए आपको बताते हैं तपस्विनी स्वयंप्रभा की अनसुनी कहानी।

माता सीता की खोज में भटक रही थी वानर सेना

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, जब रावण माता सीता का हरण करके उन्हें लंका ले गया, तब भगवान श्रीराम ने वानर राज सुग्रीव की सहायता से उनकी खोज शुरू की। दक्षिण दिशा में माता सीता की तलाश का जिम्मा अंगद, हनुमान जी, जामवंत और अन्य वानर योद्धाओं को दिया गया।

सभी वानर काफी दिनों तक जंगलों, पहाड़ों और दुर्गम रास्तों पर माता सीता को खोजते रहे, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। इसी दौरान उन्हें एक ऐसी रहस्यमयी गुफा दिखाई दी, जिसके भीतर से पक्षी बाहर निकल रहे थे। यह देखकर वानर सेना को लगा कि उस गुफा के अंदर जाने से पानी अवश्य मिलेगा।

मायावी गुफा में फंस गई वानर सेना

माता सीता की खोज में थकी हुई वानर सेना उस मायावी गुफा के भीतर प्रवेश कर गई। अंदर जाते ही उन्हें एक अद्भुत और रहस्यमयी दुनिया दिखाई दी। वहां सुंदर महल, बगीचे, सरोवर और तरह-तरह की दिव्य वस्तुएं मौजूद थीं। गुफा में प्रवेश करना आसान था, लेकिन वहां से बाहर निकलने का रास्ता किसी को दिखाई नहीं दे रहा था।

वानर सेना को समझ आ गया कि वे एक मायावी स्थान में फंस चुके हैं। काफी समय बीतने के बाद सभी चिंतित होने लगे। उन्हें डर था कि यदि वे यहां से बाहर नहीं निकल पाए, तो माता सीता को खोज पाना मुश्किल होगा। उस समय तपस्विनी स्वयंप्रभा ने वानर सेना को परेशानी से बाहर निकाला।

तपस्विनी स्वयंप्रभा कौन थीं और कैसे वानर सेना को निकाला?

मायावी गुफा में वानर सेना की मुलाकात स्वयंप्रभा नाम की एक तपस्विनी से हुई। वह उस मायावी स्थान में निवास करती थीं और हमेशा तपस्या में लीन रहती थीं।

रामायण की कथा के अनुसार, यह अद्भुत गुफा मय दानव ने बनाई थी। जब स्वयंप्रभा ने हनुमान जी और वानर सेना को परेशान देखा, तो उन्होंने उनसे उनके यहां आने का कारण पूछा। हनुमान जी ने उन्हें भगवान श्रीराम, माता सीता के हरण और उनकी खोज के बारे में बताया।

इस प्रसंग के बारे में रामायण के 51 सर्ग में बताया गया है-

दुहिता मेरुसावर्णेर् अहं तस्याः स्वयंप्रभा।
इदं रक्षामि भवनं हेमाया वानरोत्तम ॥

श्लोक का अर्थ- हे वानरोत्तम! मैं मेरुसावर्णि की पुत्री स्वयंप्रभा हूं और अप्सरा हेमा के इस दिव्य भवन की रक्षा करती हूं।

तपस्विनी स्वयंप्रभा ने वानर सेना को कैसे बाहर निकाला?

तपस्विनी स्वयंप्रभा ने वानर सेना को मायावी गुफा से बाहर निकालने के लिए उनकी आंख बंद करने को कहा। इसके बारे में भी रामायण के सर्ग 52 में एक श्लोक मिलता है।

निमीलयत चक्षूंषि सर्वे वानरपुङ्गवाः।
न हि निष्क्रमितुं शक्यम् अनिमीलितलोचनैः ॥

श्लोक का अर्थ- हे वानरश्रेष्ठो! तुम सब अपनी-अपनी आंखें बंद कर लो, क्योंकि आंखें बंद किए बिना इस स्थान से निकलना संभव नहीं है।

जैसे ही वानर सेना ने अपनी आंखें बंद कीं तपस्विनी स्वयंप्रभा ने अपनी दिव्य शक्ति के प्रभाव से वानर सेना को गुफा के बाहर पहुंचा दिया। इस तरह हनुमान जी, अंगद और पूरी वानर सेना एक बड़े संकट से बच निकली।

वास्तव में देखा जाए तो वानर सेना के बिना माता सीता को खोज पाना मुश्किल ही था। वानरों की पूरी सेना को मायावी गुफा से बचाने वाली तपस्विनी स्वयंप्रभा वास्तव में रामायण के उन चरित्रों में से हैं जिन्हें भुलाया नहीं जा सकता है।

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