क्या आप भी 'व्रत' और 'उपवास' को समझते हैं एक? 90% लोग नहीं जानते दोनों का यह बड़ा अंतर
हिंदू धर्म में अक्सर 'व्रत' और 'उपवास' को एक समझा जाता है, जबकि इनके नियम और उद्देश्य भिन्न हैं। व्रत ...और पढ़ें

व्रत और उपवास में क्या है अंतर (AI-Generated Image)
HighLights
व्रत विशेष मनोकामना पूर्ति हेतु संकल्प पर आधारित होता है।
उपवास का मुख्य उद्देश्य आत्मा की उन्नति, ईश्वर के समीप रहना।
व्रत-उपवास से पहले संकल्प लें, ब्रह्मचर्य का पालन करें।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा और त्योहारों के दौरान व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सच्चे मन से व्रत करने से व्यक्ति को जीवन में शुभ परिणाम मिलते हैं और देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है, जिससे सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
व्रत के दौरान कठिन नियमों का पालन करना जरूरी होता है। मान्यता है कि नियमों को नजरअंदाज करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। अक्सर लोग व्रत और उपवास को एक ही समझ लेते हैं, जबकि इनके नियम, महत्व और उद्देश्य एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं। आइए से जानते हैं कि इन दोनों में क्या अंतर है।
व्रत
व्रत किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए किया जाता है। यह पूरी तरह से व्यक्ति द्वारा लिए गए संकल्प पर आधारित होता है। व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य से जुड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य है। इसमें भोजन का पूरी तरह त्याग नहीं किया जाता, बल्कि एक विशेष आचरण और संयम का पालन करने का कठोर संकल्प लिया जाता है।
उपवास
'उपवास' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है 'उप' का अर्थ समीप और वास का अर्थ बैठना या रहना। इसका मतलब है कि ईश्वर के समीप रहना। उपवास का मुख्य उद्देश्य आत्मा की उन्नति और आध्यात्मिक शुद्धि है। उपवास के दौरान सांसारिक नियमों से दूर रहकर अन्न और जल का त्याग किया जाता है। इसके नियम अत्यंत कठिन होते हैं और इसके माध्यम से व्यक्ति परमात्मा से जुड़ने का प्रयास करता है।
व्रत और उपवास के नियम
- व्रत और उपवास की शुरुआत करने से पहले स्नान करने के बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प जरूर लेना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि संकल्प न लेने से अनुष्ठान पूरा नहीं माना जाता।
- इसके अलावा व्रत और उपवास के दौरान ब्रह्मचर्य से जुड़े नियमों का पालन करना चाहिए।
- किसी के बारे में गलत न सोचें और किसी से वाद-विवाद न करें।
- व्रत और उपवास के दौरान काले रंग के कपड़े न धारण करें।
- इसके अलावा किसी को अपशब्द न बोलें।
- महिलाओं और बड़े-बुर्जगों का अपमान न करें। ऐसा न करने से व्रत का शुभ परिणाम प्राप्त नहीं होंगे।
यह भी पढ़ें- पितृ पक्ष 2026: तांबे के लोटे से ही क्यों देते हैं पितरों को जल? सूर्य और मंगल से है इसका गहरा कनेक्शन
यह भी पढ़ें- जितिया व्रत में भोग को तोरई के पत्तों पर क्यों रखते हैं? वजह जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान!
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
