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ब्रह्मचर्य का मतलब सिर्फ शादी न करना नहीं! जानिए इसका असली अर्थ और जीवन से जुड़ा गहरा संदेश

Published: Mon, 28 Sep 2026 12:58 PM (IST)

ब्रह्मचारी होने का अर्थ मात्र भोग-विलास से दूर होना नहीं, बल्कि अपने भीतर परमानंद को अनुभव करना है।

सद्गुरु का संदेश: ब्रह्मचर्य का वास्तविक अर्थ और आंतरिक आनंद का मार्ग

सद्गुरु का संदेश: ब्रह्मचर्य का वास्तविक अर्थ और आंतरिक आनंद का मार्ग

सद्गुरु, (संस्थापक व प्रमुख, ईशा फाउंडेशन व आध्यात्मिक गुरु)। मन की प्रसन्नता व स्वस्थ जीवनशैली के लिए योग करना ठीक है। लेकिन जब किसी व्यक्ति की भौतिक जीवन के परे कोई चीज अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है और उसे आप सामान्य लोगों जैसा जीवन व्यतीत करने को विवश करें तो वह उसके लिए यातना और नर्क बन जाता है। जो व्यक्ति अकेले इस मार्ग पर चलना चाहता है, अगर आप उसे किसी ऐसे व्यक्ति के साथ चलने के लिए विवश करते हैं जो इस मार्ग पर चलने का इच्छुक या योग्य नहीं है, तो यह दोनों लोगों के लिए यातना बन जाता है।

वहीं दूसरी ओर, अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को ब्रह्मचर्य की दीक्षा देते हैं, जो विवाह करना चाहता है, तो वह एक अलग तरह की यातना है। ब्रह्मचर्य उस व्यक्ति के जीवन में आता है, जो यह एहसास करने लगता है कि प्रसन्नता, आनंद या शांति के लिए बाहर की ओर देखने का कोई तुक नहीं है। वह यह समझने लगता है कि इसे अपने भीतर ही खोजना होगा। एक बार जब वह यह समझ जाता है, फिर एकमात्र मार्ग आतंरिक मार्ग होता है; अगर वह इस मार्ग पर नहीं चलता, तो वह अपने लिए और अपने आसपास के लोगों के लिए दुख पैदा करता है।

हम सभी ने आम खाए हैं, लेकिन हममें से कितनों ने आम के पेड़ लगाए हैं, उन्हें बड़ा किया है और फिर उनके आम खाए हैं? ज्यादातर लोगों ने आम इसलिए खाए हैं, क्योंकि किसी और ने आम के पेड़ लगाए थे। हर समाज में, हजार लोगों में से कम से कम दस लोगों को आम के पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने की जिम्मेदारी लेनी पड़ती है। ठीक वैसे ही, कुछ लोगों को ब्रह्मचर्य का मार्ग अपनाना पड़ता है।

ब्रह्मचारी का मतलब है – “ब्रह्म” का अर्थ है “ईश्वरीय”, और “चर्या” का अर्थ है “मार्ग”। अगर आप ईश्वरीय मार्ग पर हैं, तो आप ब्रह्मचारी हैं। लोगों को लग सकता है कि ब्रह्मचारी बहुत बड़ा त्याग कर रहा है और जीवन के सुखों से वंचित रह रहा है, लेकिन असल में ऐसा बिल्कुल नहीं है। अगर कोई सिर्फ पहनावे से ब्रह्मचारी है, तो जीवन यातना होता है। वे इस दुनिया और दूसरी दुनिया, दोनों से ही चूक जाते हैं, लेकिन जो व्यक्ति सच में ईश्वरीय मार्ग पर चल रहा है, उसके लिए दुनिया के छोटे-मोटे सुख अर्थहीन हो जाते हैं। एक बार जब आप अपने अस्तित्व के भीतरी सुखों का आनंद ले लेते हैं, तो बाहरी सुख अर्थहीन लगने लगते हैं।

तो क्या इसका मतलब यह है कि हर किसी को ब्रह्मचारी बन जाना चाहिए? नहीं। हर किसी को ब्रह्मचारी बनना चाहिए, लेकिन जरूरी नहीं कि जीवनशैली के मामले में, बल्कि अंदर से। ब्रह्मचर्य का मतलब सिर्फ भोगक्रियाओं से दूर रहना नहीं है। ब्रह्मचारी बनने का मतलब है कि आप अपनी प्रकृति से ही परमानंद में हैं। आप शादीशुदा होकर भी ब्रह्मचारी हो सकते हैं। ऐसा संभव है, क्योंकि आप अपनी ही प्रकृति से आनंदमय हैं; आप अपने पति या पत्नी से खुशी निचोड़ने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। ऐसा ही होना चाहिए। पूरी दुनिया को ब्रह्मचारी होना चाहिए। हर किसी को अपनी ही प्रकृति से आनंदमय होना चाहिए। अगर दो लोग साथ आते हैं, तो यह खुशी को बांटने जैसा अधिक होना चाहिए, न कि एक-दूसरे से खुशी निचोड़ना।