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Vidur Niti: जीवन में इन 6 बुरी आदतों के कारण रुक जाती है तरक्की, समय रहते कर लें सुधार वरना होगा पछतावा

Published: Thu, 24 Sep 2026 06:42 PM (IST)

विदुर नीति के अनुसार, अत्यधिक नींद, आलस्य, भय, क्रोध और काम टालने जैसी छह आदतें व्यक्ति की प्रगति में बाधा डालती हैं। चलिए इनके बारे में विस्‍तार से जानते हैं।

अच्‍छी आदतें आपको जीवन में बढ़ा सकती हैं आगे।  (Picture Credit- AI Generated)

अच्‍छी आदतें आपको जीवन में बढ़ा सकती हैं आगे। (Picture Credit- AI Generated)

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समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। विदुर नीति में कुछ ऐसी आदतों का उल्लेख किया गया है, जो व्यक्ति की प्रगति में बाधा बन सकती हैं। विदुर नीति के अनुसार बहुत ज्‍यादा सोने, आलस्‍य करने, भय, क्रोध और काम टालने ऐसे छह दोष हैं, जिनसे व्यक्ति को बचना चाहिए। यदि समय रहते इन आदतों में सुधार कर लिया जाए तो जीवन में अनुशासन बना रहता है और कार्य करने की क्षमता भी अच्‍छी रहती है।

ज्‍यादा सोने से बचें

शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त नींद जरूरी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा सोना व्यक्ति की दिनचर्या को प्रभावित करता है। अधिक सोने की आदत के कारण व्‍यक्ति अपने काम को समय पर शुरू नहीं कर पाता है, इससे उसके हाथों से अच्‍छे अवसर निकल जाते हैं। इसलिए व्यक्ति को अपनी दिनचर्या के अनुसार पर्याप्त नींद लेनी चाहिए और सुबह समय पर उठने की आदत को अपने अंदर विकसित करना चाहिए। ध्यान रखें मनुष्य योनि कर्म योनि होती है। यदि हम अपना कर्म नहीं करेंगे, तो अपने जीवन को बर्बाद ही करेंगे।

काम से जी चुराने से बचें

जो व्यक्ति काम से जी चुराता है, उसे तरक्की कभी नहीं मिलती है। खुद को हमेशा थका हुआ महसूस करना या फिर सुस्ती में दिन को बर्बाद करते हैं, तो इससे न केवल आपकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है बल्कि आपके हाथों से अवसर भी निकल जाते हैं। यदि तरक्की की राह पर आगे बढ़ना है, तो अपने काम से हमेशा ईमानदारी बरतनी चाहिए।

भय को खुद पर हावी न होने दें

हर व्यक्ति को जीवन में डर और असफलता की चिंता होती है। लेकिन यदि भय इतना बढ़ जाए कि व्यक्ति जरूरी कदम उठाने से ही पीछे हटने लगे, तो उसकी प्रगति रुक सकती है। नई चीज सीखते समय या कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय संभावित जोखिमों को समझना और उन्हें स्वीकार करना ही अक्लमंदी है। क्योंकि डर के कारण कई बार हम ऐसी चीजों में अपना समय व्यर्थ कर देते हैं, जो हमें न तो फल देती हैं न अवसर।

क्रोध पर नियंत्रण रखें

क्रोध में व्यक्ति कई बार ऐसे शब्द बोल देता है या ऐसे फैसले ले लेता है, जिसका बाद में पछतावा हो सकता है। गुस्से की स्थिति में सोचने और सही निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए क्रोध आने पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ समय शांत रहना बेहतर है। गहरी सांस लेना, परिस्थिति को समझना और फिर जवाब दें। ऐसा करने से आप स्थिति को समझते हुए ऐसा जवाब दे पाएंगे, जो स्थिति को बेहतर बनाता होगा।

आलस्य को आदत न बनने दें

नींद और आलस्य में जो व्यक्ति अपना समय गंवाता है, उसका सम्मान समय भी नहीं करता है। ऐसे लोग कभी तरक्‍की नहीं कर पाते हैं। न ही नई चीजें सीख पाते हैं और न नई जिम्‍मेदारियों को उठा पाते हैं। इतना ही नहीं, जब हम छोटे-छोटे काम को करने में आलस्य दिखाते हैं, तो बड़े काम अपने आप ही हमारे लिए चुनौतीपूर्ण बन जाते हैं।

काम टालने की आदत का त्‍याग करें

काम टालने की आदत को भी तुरंत सुधार लेना चाहिए। आज का काम अगर हम कल पर टालेंगे, तो आज और कल के काम मिलकर हमारे लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर देंगे। यदि व्‍यक्ति नियमित अपने काम को पूरा करते रहते हैं, तो उन पर काम का बोझ कभी नहीं आता है। ऐसे लोग जब कोई नया अवसर आता है, तो उन्हें तुरंत ही करने के लिए तैयार रहते हैं क्योंकि पुराने जरूरी काम वे पहले ही कर चुके होते हैं। इसलिए जरूरी कामों की प्राथमिकता तय करें और उन्हें समय पर पूरा करने का प्रयास करें। समय का सही उपयोग जीवन में अनुशासन लाने का एक महत्वपूर्ण तरीका है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।