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13 सितंबर वराह जयंती पर श्रीमद्भागवत पुराण के तीसरे स्‍कंध का पाठ करने से मिलते हैं ये फल

Published: Wed, 09 Sep 2026 08:59 PM (IST)

वराह जयंती पर श्रीमद्भागवत पुराण के तीसरे स्कंध का पाठ करने से कई लाभ मिलते हैं। यह संकटों से मुक्ति, घर में सुख-शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।

वराह जयंती कब है। (Picture Credit- AI Generated)

वराह जयंती कब है। (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. संकटों और बाधाओं से मिलती है मुक्ति, मन को शांति।

  2. घर में सुख-शांति आती है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं।

  3. आध्यात्मिक उन्नति में मदद मिलती है, पापों का नाश होता है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के दशावतारों का विशेष महत्व बताया गया है। इन्हीं में भगवान विष्णु का वराह अवतार भी प्रमुख है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान ने वराह रूप धारण करके पृथ्वी को समुद्र की गहराई से बाहर निकाला और उसका उद्धार किया था। 13 सितंबर को वराह जयंती है। इस दिन भगवान विष्णु के इस दिव्य स्वरूप की पूजा करने और उनकी कथा सुनने-पढ़ने का विशेष महत्व है।

इस दिन श्रीमद्भागवत पुराण के तीसरे स्कंध, विशेष रूप से भगवान वराह के अवतार और कपिल मुनि से जुड़े प्रसंगों का पाठ करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आध्यात्मिक शांति आती है। चलिए हम आपको इससे मिलने वाले लाभ के बारे में बताते हैं।

संकटों और बाधाओं से मिलती है मुक्ति

श्रीमद्भागवत पुराण के तीसरे स्कंध में भगवान वराह के अवतार की दिव्य कथा का वर्णन मिलता है। इसमें बताया गया है कि भगवान ने वराह रूप धारण कर पृथ्वी का उद्धार किया। मान्यता है कि वराह जयंती पर इस प्रसंग का श्रद्धा से पाठ करने से जीवन में आने वाली परेशानियों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

घर में आती है सुख-शांति

वराह जयंती पर भगवान विष्णु की पूजा और भागवत कथा का पाठ करने से मन को शांति मिलने की मान्यता है। भगवान वराह की कथा सुनने से नकारात्मक विचार दूर होते हैं और व्यक्ति का मन भक्ति की ओर बढ़ता है।

आध्यात्मिक उन्नति में मिलती है मदद

श्रीमद्भागवत पुराण केवल धार्मिक कथाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि इसमें जीवन और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़े अनेक प्रसंग मिलते हैं। तीसरे स्कंध में कपिल मुनि के उपदेश भी आते हैं, जिनमें आत्मज्ञान, भक्ति और जीवन के वास्तविक उद्देश्य के बारे में बताया गया है।

पापों से मुक्ति और परम शांति

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु का नाम स्मरण करने और उनकी कथा सुनने से पापों का नाश होता है। वराह जयंती पर श्रद्धा और विश्वास के साथ भागवत के तीसरे स्कंध का पाठ करने से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

मोक्ष की ओर बढ़ने का मार्ग

श्रीमद्भागवत में भक्ति को जीवन के परम लक्ष्य तक पहुंचने का महत्वपूर्ण मार्ग बताया गया है। वराह जयंती पर भगवान वराह की कथा का पाठ करते समय व्यक्ति को केवल सांसारिक सुख की कामना ही नहीं, बल्कि भगवान की भक्ति और परम शांति की प्रार्थना भी करनी चाहिए।

ध्यान रहे कि इन फलों का वर्णन धार्मिक मान्यताओं के आधार पर किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य भगवान के प्रति श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चिंतन को बढ़ाना है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है

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