विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

क्या है वराह जयंती का असली संदेश? जानिए क्यों युवा शक्ति ही ला सकती है पर्यावरण में बड़ा बदलाव

By Jagran NewsEdited By: Shraddha Pandey
Published: Mon, 07 Sep 2026 10:39 AM (IST)

वराह जयंती की कथा हमें अपनी धरती, प्रकृति और संसाधनों के संरक्षण की प्रेरणा देती है। वराह जयंती (13 सितंबर) पर विशेष...

वराह जयंती 2026

वराह जयंती 2026

डा. चिन्मय पण्ड्या, उपाध्यक्ष, देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार। भारतीय संस्कृति में पर्व पूजा और अनुष्ठान के लिए ही नहीं हैं, वरन् यह पर्व अपने साथ जीवन को बेहतर बनाने का कोई न कोई संदेश लेकर आता है। वराह जयंती भी ऐसा ही प्रेरणापर्व है। भगवान विष्णु के वराह अवतार की कथा हमें प्रकृति का सम्मान करने, संकट में साहस बनाए रखने और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। आज जब पृथ्वी पर्यावरण संकट, प्रदूषण और प्राकृतिक असंतुलन से जूझ रही है, तब वराह जयंती का संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

पौराणिक कथा के अनुसार हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को जल में छिपा दिया था। तब भगवान विष्णु वराह रूप में प्रकट हुए और पृथ्वी को अपनी दाढ़ों पर उठाकर फिर से उसके स्थान पर स्थापित किया। श्रीमद्भागवत में इस प्रसंग का सुंदर वर्णन मिलता है -

उद्यम्य सलिले तस्मिन् निमज्जंतीमिमां क्षितिम्।
दंष्ट्रयोल्लिख्य चोद्धृत्य लीलया ह्यवधारयत्।।

अर्थात्- भगवान ने जल में डूबती हुई पृथ्वी को अपनी दाढ़ों पर उठाकर सहज भाव से धारण किया। इस कथा को आज के संदर्भ में देखें तो इसका एक बड़ा संदेश पृथ्वी की रक्षा से जुड़ा दिखाई देता है। धरती केवल हमारे रहने की जगह नहीं, बल्कि हमारे जीवन का आधार है। जल, जंगल, जमीन, हवा और प्रकृति के दूसरे संसाधनों को बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। यदि प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी मानव जीवन भी सुरक्षित रहेगा।

वराह जयंती का संदेश

वराह जयंती का यह संदेश युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के विचारों से भी जुड़ता है। उन्होंने व्यक्ति निर्माण को समाज और राष्ट्र निर्माण का पहला कदम माना। उनका जीवन और चिंतन हमें सिखाता है कि अच्छे विचार तभी सार्थक होते हैं, जब वे हमारे व्यवहार में दिखाई दें। संयमित जीवन, सेवा, सदाचार, प्रकृति के प्रति संवेदना और लोकमंगल की भावना इसी दिशा के कदम हैं।

आज इस सोच को आगे बढ़ाने में युवा पीढ़ी की भूमिका सबसे अहम है। युवा देश की ऊर्जा हैं। उनके पास नई सोच है, तकनीक की समझ है और कुछ नया करने का उत्साह है। यदि यही ऊर्जा प्रकृति संरक्षण से जुड़ जाए, तो बड़ा बदलाव आ सकता है। युवा पौधारोपण को अभियान बना सकते हैं। जल बचाने के लिए लोगों को जागरूक कर सकते हैं। प्लास्टिक का कम इस्तेमाल कर सकते हैं। अपने आसपास स्वच्छता रख सकते हैं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित कर सकते हैं।

पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने युवाओं की शक्ति को रचनात्मक कार्यों में लगाने की प्रेरणा दी। आज युवा यदि अपने जीवन में सेवा, संयम और प्रकृति प्रेम को स्थान दें, तो यह केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं होगा, बल्कि युग निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम होगा।

वराह जयंती हमें यही याद दिलाती है कि पृथ्वी की रक्षा किसी एक की जिम्मेदारी नहीं है। हर व्यक्ति का छोटा प्रयास मिलकर बड़ा परिवर्तन ला सकता है। एक पौधा लगाना, पानी बचाना, प्रकृति को स्वच्छ रखना और जरूरत से अधिक उपभोग से बचना भी धरती के प्रति हमारी श्रद्धा है।

आज जरूरत है कि वराह भगवान के साहस को जीवन में उतारा जाए और पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के युग निर्माण के विचारों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाया जाए। युवा शक्ति जब प्रकृति संरक्षण और समाज सेवा से जुड़ेगी, तभी एक स्वस्थ, सुंदर और श्रेष्ठ समाज का निर्माण संभव होगा। यही वराह जयंती का सार्थक संदेश होगा।

यह भी पढ़ें: श्री गुरु ग्रंथ साहिब में क्यों दिया गया 36 वाणीकारों को गुरुओं के समान सर्वोच्च स्थान?

यह भी पढ़ें: गणेश जी को क्यों प्रिय है मोदक? जानिए इसका वो आध्यात्मिक अर्थ जो बहुत कम लोग जानते हैं

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।