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श्री गुरु ग्रंथ साहिब में क्यों दिया गया 36 वाणीकारों को गुरुओं के समान सर्वोच्च स्थान?

Published: Mon, 07 Sep 2026 10:01 AM (IST)

श्री गुरु ग्रंथ साहिब में न सिर्फ भारतीय अध्यात्म व दर्शन है, बल्कि भारतीय संगीत की भी दार्शनिक व्याख्या मिलती ...और पढ़ें

36 संत-कवि, जिन्हें मिला गुरुओं के समान दर्जा

36 संत-कवि, जिन्हें मिला गुरुओं के समान दर्जा

प्रो. हरमहेंद्र सिंह बेदी (कुलाधिपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश)। श्री गुरु ग्रंथ साहिब मध्यकालीन भारतीय संस्कृति का महान ग्रंथ है। वर्ष 1604 में पांचवे गुरु श्रीअर्जुन देव जी ने अमृतसर की पावन धरा पर इसका संपादन किया। सिख मनीषी भाई गुरदास की भूमिका भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब के संपादन में उल्लेखनीय है। भाई गुरदास भारतीय भाषाओं के मर्मज्ञ विद्वान थे। श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पहला प्रकाश श्री हरिमंदिर साहिब में हुआ।

श्री गुरु ग्रंथ साहिब में 36 वाणीकारों की वाणी संकलित है। आठ शताब्दियों का भारतीय चिंतन, दर्शन और अध्यात्म श्री गुरु ग्रंथ साहिब में समाहित है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब भारतीय भाषाओं का प्रथम संवाद भी प्रस्तुत करने वाली विलक्षण पोथी है। भारतीय अध्यात्म की मौलिक इकाइयां श्री गुरु ग्रंथ साहिब में सहज ही प्राप्त हो जाती है। भारतीय अध्यात्म की व्याख्या, विश्लेषण और मंथन श्री गुरु ग्रंथ साहिब की वाणियों में सहज ही प्राप्त हो जाती है।

श्री गुरु ग्रंथ साहिब में भारतीय अध्यात्म के महापुरुषों की वाणियों को निर्गुण काव्य की केंद्रीय संवेदना के साथ भी नए अध्यात्मवाद के साथ देखा जा सकता है। गुरमत दर्शन के मौलिक चिंतन के माध्यम से गुरु ग्रंथ साहिब में ये वाणीकार निराकार की भक्ति, प्रेम एवं उनकी अनुभूतियों को सरल और व्यावहारिक रूप में जनहित के साथ त्याग, सेवा, भाईचारा, समता और सामाजिक चिंतन के कल्याण मार्ग को सशक्त अभिव्यक्ति प्रदान करती है।

श्री गुरु ग्रंथ साहिब मध्यकालीन पुनर्जागरण का भी वह महान ग्रंथ है, जिसने भक्ति लहर का संतों, भक्तों सूफियों ने सूक्ष्म चेतना को विभिन्न संदर्भों में एक सूत्र में पिरोकर लोक जीवन का अखंड भाग भी बनाया है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब में संत कबीर, संत रविदास, सधना जी, सैन जी, संत नामदेव जी, जयदेव जी एवं महान सूफी चिंतक बाबा शेख फरीद की वाणियां संकलित है। श्री जयदेव बंगाल के रहने वाले थे। संस्कृत के प्रकांड ज्ञाता थे। उनके पद गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित है। शेख फरीद 12 वीं शताब्दी के महान सूफी कवि है। वे पंजाबी के पहले कवि है। स्वामी रामानंद का पद भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित है।

स्वामी रामानंद भक्त लहर के प्रणेता थे। उत्तर भारत में भक्त लहर से जुड़े सभी महत्त्वपूर्ण चिंतक स्वामी रामानंद के कृपा पात्र थे। भक्ति लहर की आध्यात्मिक चिंतन धारा में यह स्वीकार किया गया था कि रंग, नस्ल, जाति एवं ऊंच-नीच की भावना को भारतीय समाज से निष्कासित करना है। संत कबीर बुनकर थे। संत रविदास जी चमड़े के कारोबार से जुड़े हुए थे। श्री सैन नाई का व्यापार करते थे। भक्त नामदेव रंगाई के कार्य से जुड़े हुए थे। भक्त धन्ना जाट थे। सधना जी कसाई थे।

श्री गुरु ग्रंथ साहिब में बिना भेदभाव से इन महापुरुषों की वाणियों को वही सर्वोच्च स्थान दिया गया है, जो आदरभाव गुरुओं की वाणी को मिला है। गुरु ग्रंथ साहिब के आध्यात्मिक संवाद के आगे नतमस्तक होने का अर्थ है भारतीय अध्यात्म, चिंतन, दर्शन और नैतिक मूल्यों के प्रति आस्था रखना और भारतीय संस्कृति के गुणात्मक पक्ष को ग्रहण करना। श्री गुरु ग्रंथ साहिब का आध्यात्मिक चिंतन मानव कल्याण का चिंतन है। यह चिंतन ‘सरबत दे भले’ के साथ जुड़ा हुआ है। भारतीय अध्यात्म का भी यही मूल मंत्र है।

यह भी महत्त्वपूर्ण बात है कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब में भारतीय संगीत की दार्शनिक व्याख्या भी मिलती है। शास्त्रीय संगीत की पद्धतियां एवं उत्तर भारत में प्रचलित कई लोक धुनों का सामंजस्य भी आध्यात्मिक वाणी की सर्वोच्च बनाता है। गुरु ग्रंथ साहिब के प्रथम प्रकाश का महत्त्व केवल किसी विशेष भूभाग के लिए नहीं, बल्कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब ने जो दिशा मानवता की प्रदान की, उसका वैश्विक संदर्भ युगों-युगों तक हमारा पथ परदर्शित करता रहेगा।