वामन जयंती 2026: जब भगवान विष्णु ने 3 कदमों में नाप ली थी पूरी सृष्टि, पढ़ें राजा बलि के अहंकार टूटने की कथा
हर साल भाद्रपद शुक्ल द्वादशी को वामन जयंती मनाई जाती है, जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि ...और पढ़ें
-1790079237393_m.webp)
भगवान विष्णु ने क्यों लिया वामन अवतार? (AI-Generated Image)
HighLights
वामन जयंती भाद्रपद शुक्ल द्वादशी तिथि पर मनाई जाती है।
भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि का अहंकार तोड़ा।
वामन देव ने तीन पग में पूरी सृष्टि को नाप लिया।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर वामन जयंती मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया था। यह उनका पांचवां अवतार माना जाता है। वामन जयंती को वामन द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है।
इस दिन भगवान वामन की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन साधना और विशेष चीजों का दान करने से धन लाभ के योग बनते हैं और जीवन में किसी चीज की कमी नहीं होती। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान विष्णु ने वामन अवतार क्यों लिया? अगर नहीं, तो आइए इस लेख में इसके पीछे की वजह जानते हैं।
वामन जयंती 2026 कब है?
भाद्रपद शुक्ल द्वादशी तिथि की शुरुआत: 22 सितंबर को रात 09 बजकर 43 मिनट पर
भाद्रपद शुक्ल द्वादशी तिथि का समापन: 23 सितंबर को रात 10 बजकर 50 मिनट पर
वैदिक पंचांग के अनुसार, वामन जयंती 23 सितंबर को मनाई जा रही है।
वामन अवतार की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग में राजा बलि का प्रकोप बहुत बढ़ गया था और उसने देवलोक पर अपना अधिकार कर लिया था। उसके अहंकार को दूर करने के लिए भगवान विष्णु ने वामन के रूप में अपना पांचवां अवतार लिया। भगवान वामन के पिता महर्षि कश्यप और माता अदिति थीं। वामन अवतार का मुख्य उद्देश्य देवराज इंद्र को उनका देवलोक वापस दिलाना था।
देवताओं की यह स्थिति देखकर देवमाता अदिति ने भगवान विष्णु की तपस्या करने का निर्णय लिया। विष्णु जी उनकी तपस्या से प्रसन्न हुए और उन्हें वरदान दिया कि वे उनके पुत्र के रूप में जन्म लेंगे और देवताओं को उनका अधिकार वापस दिलाएंगे।
जब राजा बलि अश्वमेध यज्ञ कर रहे थे, तब भगवान वामन उनके पास पहुंचे और अपने रहने के लिए भिक्षा में तीन पग भूमि मांगी। दैत्यगुरु शुक्राचार्य ने राजा बलि को इसके पीछे का रहस्य बताया और भूमि दान करने से रोका। लेकिन दानवीर राजा बलि ने अपने गुरु की बात नहीं मानी और भगवान वामन को तीन पग भूमि देने का वचन दे दिया।
वचन मिलते ही वामन देव ने अपना विराट रूप धारण कर लिया। उन्होंने अपने पहले पग में संपूर्ण पृथ्वी और दूसरे पग में पूरा देवलोक नाप लिया। जब तीसरे पग के लिए कोई स्थान नहीं बचा, तो राजा बलि ने अपना सिर भगवान के चरणों में रख दिया। बलि की इस अपार भक्ति और वचनबद्धता को देखकर भगवान वामन अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने बलि को पाताल लोक का स्वामी बना दिया और इस प्रकार देवताओं को बलि के भय से मुक्त कर देवलोक पुनः सौंप दिया। भगवान वामन के स्वरूप में उनके हाथों में छाता, दंड और कमंडल दिखाई देता है।
यह भी पढ़ें- गरुड़ पुराण का रहस्य: पितृ पक्ष में रोज सुबह मुख्य द्वार पर करें यह 1 उपाय, पूर्वजों की नाराजगी होगी दूर
यह भी पढ़ें- क्या आप जानते हैं मृत्यु के बाद पैरों के अंगूठे क्यों बांधे जाते हैं? गरुड़ पुराण में छिपा है इसका गहरा रहस्य
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
