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क्या कोई भी नया व्रत शुरू करने के लिए कार्तिक मास ही सबसे शुभ है? पंडित जी बता रहे हैं जरूरी बातें

Published: Thu, 29 Oct 2026 12:30 PM (IST)

हिंदू धर्म में नया व्रत शुरू करने के लिए कार्तिक मास को सबसे शुभ माना जाता है। क्या सच में ...और पढ़ें

हिंदू धर्म में नया व्रत शुरू करने के लिए सही समय क्‍या होता है ? (Picture Credit- AI Generated)

हिंदू धर्म में नया व्रत शुरू करने के लिए सही समय क्‍या होता है ? (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में कई व्रत-त्‍योहार मनाए जाते हैं। भक्‍त भगवान की कृपा पाने, मनोकामना पूरी होने और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखते हैं। मगर सभी के मन में एक बड़ा प्रश्न होता है कि कोई नया व्रत उठाना हो, तो उसके लिए सही समय और महीना क्‍या होना चाहिए? कई धार्मिक शास्त्रों में कार्तिक के महीने को सबसे शुभ माना गया है, वहीं कुछ मान्‍यताओं में व्रत को शुरू करने के लिए महीने के साथ-साथ दिन और तिथियां भी महत्‍वपूर्ण बताई गई हैं।

इस विषय पर हमारी बात वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर में सेवानिवृत्त पंडित श्रीनाथ गोस्वामी से हुई। वह कहते हैं, "सोमवार का व्रत जिन्हें शुरू करना होता है, वे सावन के सोमवार से शुरू कर लेते हैं। तो वहीं शुक्रवार, प्रदोष, एकादशी, नवरात्र और कार्तिक के महीने को भी नए व्रतों को उठाने के लिए शुभ माना जाता है। यदि कोई भक्‍त चतुर्थी का व्रत रखना चाहते हैं या जन्‍माष्‍टमी, महाशिवरात्रि और शरदपूर्णिमा का व्रत उठाना चाहता है, तो उसे किसी तिथि का इंतजार करने की जरूरत नहीं है, वो किसी भी वर्ष में त्‍योहार के साथ-साथ उठाया जा सकता है। "

इसके अलावा पंडित जी ने यह भी बताया है कि वर्ष भर में कार्तिक के अलावा और कौन से मास, तिथि और वार होते हैं, जब व्रत उठाया जा सकता है। तो चलिए जनते हैं पहली बार व्रत रखने से पहले किन बातों का ध्यान रखना है।

सावन का महीना माना जाता है शुभ

भगवान शिव की आराधना के लिए सावन का महीना विशेष माना जाता है। इस दौरान सोमवार का व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि सावन के सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को उनका आशीर्वाद मिलता है। यदि आप पहली बार सोमवार का व्रत शुरू करना चाहते हैं, तो सावन के सोमवार से इसकी शुरुआत कर सकते हैं।

चैत्र, वैशाख और कार्तिक मास का महत्व

हिंदू पंचांग में चैत्र, वैशाख और कार्तिक मास को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इन महीनों में पूजा-पाठ, दान और व्रत करने की विशेष परंपरा है। कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नए व्रत की शुरुआत शुक्ल पक्ष में करना शुभ माना जाता है। पंडित श्रीनाथ जी कहते हैं, " व्रत की शुरुआत के लिए सही तिथि का चुनाव इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप किस देवी-देवता का व्रत रखना चाहते हैं।"

नवरात्र और एकादशी से भी कर सकते हैं शुरुआत

यदि आप मां दुर्गा का व्रत रखना चाहते हैं, तो चैत्र या शारदीय नवरात्र से शुरुआत कर सकते हैं। वहीं, भगवान विष्णु की पूजा के लिए एकादशी का व्रत रखा जाता है। इसी तरह, प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है। यदि आप एकदाशी या प्रदोष का व्रत उठाना चाहते हैं, तो आपको कार्तिक मास के शुक्‍ल पक्ष का इंतजार करना चाहिए। इसी तरह वैभव लक्ष्‍मी माता और संतोषी माता का व्रत रखने के लिए भी आपको कार्तिक मास के शुक्‍ल पक्ष का इंतजार करना चाहिए।

क्या मलमास में नया व्रत शुरू करना चाहिए?

अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा, जप और दान का विशेष महत्व माना जाता है। अधिक मास में हर तरह का नया व्रत शुरू करना वर्जित है, इसी तरह चतुर्मास में भी कोई नया व्रत नहीं उठाना चाहिए क्‍योंकि देव सो रहे होते हैं।

गुरु और शुक्र के अस्त होने पर रखें ध्यान

पंडित श्रीनाथ गोस्वामी बताते हैं, "गुरु और शुक्र के अस्त होने पर भी मांगलिक कार्यों को रोक देना चाहिए। इस समय पर विवाह जैसे मांगलिक कार्यों को टालना ही बेहतर होता है। साथ ही कोई नया व्रत भी इस वक्त नहीं उठाना चाहिए।"

अतः कोई भी नया व्रत शुरू करने से पहले जरूरी है उसका संकल्प लेना और उसकी पूजा विधि को समझना। इसके बाद तिथि, मास और वार पर ध्यान देना चाहिए।

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