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दुर्गा पूजा का अनोखा रूप: सीढ़ियों पर गुड़ियों को सजाकर क्यों मनाया जाता है दक्षिण भारत में नवरात्र?

Published: Thu, 15 Oct 2026 09:07 AM (IST)

दक्षिण भारत में नवरात्र के दौरान घरों और मंदिरों को 'गोलू गुड़िया' से सजाने की अनोखी परंपरा है। यह परंपरा ...और पढ़ें

दक्षिण भारत में नवरात्र मनाने की अनोखी परंपरा

दक्षिण भारत में नवरात्र मनाने की अनोखी परंपरा

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri 2026) शुरू हो चुके हैं, जिसका समापन इस वर्ष 20 अक्टूबर, मंगलवार को विजयादशमी के मौके पर होगा। इस दौरान संपूर्ण भारत नवरात्र के उत्सव में डूबा है। उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक हर कोई क्षेत्रीय परंपराओं और रीति-रिवाजों को ध्यान में रखकर माता रानी को पूजता है।

सबसे अनोखी परंपरा दक्षिण भारत में देखने को मिली है, जहां नवरात्र के दौरान लोग अपने घरों और मंदिरों को खूबसूरत 'गोलू गुड़िया' से सजाते हैं। दक्षिण भारत की यह परंपरा काफी अनोखी है, जिसे अलग-अलग क्षेत्रों में 'बोमम्मई गोलू', 'बोम्माला कोलुवु' या बोम्बे हब्बा जैसे नाम से जानते हैं।

इस परंपरा में गुड़ियों को सीढ़ीनुमा संरचनाओं पर कलात्मक रूप से सजाया जाता है, जो जीवन, पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिका का प्रतीक माने जाते हैं। तमिलनाडु में इसे 'बोम्मई गोलू' के नाम से जाना जाता है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 'बोम्माला कोलुवु' कहा जाता है और कर्नाटक में इसे 'बॉम्बे हब्बा' कहा जाता है।

shardiya navratri 2026 south india golu dolls tradition history significance bommai golu

(Picture Credits- AI Images)

गोलू की उत्पत्ति

दक्षिण भारत में लोगों का मानना है कि, गोलू बनाने की परंपरा बुराई पर विजय हासिल करने लिए निभाई जाती है, जो देवी दुर्गा द्वारा राक्षस महिषासुर के वध पर जीत का प्रतीक है। इन गुड़ियों को श्रद्धा और कथा प्रस्तुति के साथ सजाया जाता है।

विजयनगर काल में नवरात्र (दशहरा) के दौरान गोलू की परंपरा निभाई जाती थी। विजयनगर शासनकाल में हम्पी की गलियों में गोलू एक शाही उत्सव था। इसे एक सांस्कृतिक प्रथा का रूप दिया गया, जो आज भी कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे क्षेत्रों में जीवित है। इस परंपरा को मैसूर के वोडेयार परिवारों द्वारा आगे बढ़ाया गया था।

गुड़िया अलग देवी-देवताओं जैसे गणेश, लक्ष्मी, सरस्वती, दुर्गा, मीनाक्षी, कामाक्षी, भगवान श्रीकृष्ण, भगवान शिव आदि का प्रतिनिधित्व करती थीं। इनमें कामधेनु गाय, तोता, बंदर, नाग देवता, हाथी, शेर आदि जैसे जानवरों को भी दर्शाया गया था।

इस गुड़िया सेट में राजा-रानी की नृत्य करती गुड़िया से लेकर मैसूर के राजा रानी सेट, नारियल की दुकान, घरेलू काम करती गांव की महिलाएं, खेती, मैसूर दशहरा, सब्जी और फल की गाड़ी और तंजौर गुड़िया शामिल है।

इसमें महाभारत और रामायण से जुड़े अलग-अलग दृश्यों को भी दर्शाया जाता है। जिसमें सीता कल्याण, गौरी कल्याण, ठाटका वध, राम सेतु बंदना, राम और कृष्ण का जन्म, वरनम आयिरम, कुंभकर्ण सेट, संजीवनी पर्वत, रावध वध, श्रीराम पट्टाभिषेक, भगवान श्रीराम का धनुष तोड़ना भी दर्शाया जाता है।

सभी गुड़िया काफी खूबसूरत तरीके से सजाई जाती है, जिन्हें सीढ़ी नुमा आकार में व्यवस्थित रूप से रखा जाता है। इन्हें काफी प्यार, देखभाल और सम्मान के साथ रखा जाता है। दक्षिण भारत के हर हिंदू घर में इनका खास स्थान है।

हर गुड़िया को परिवार के सदस्य की तरह ही माना जाता है और उसका खास ख्याल भी रखा जाता है। हर रात सोने से पहले, लौरी गाकर देवताओं को सुलाया जाता है। 10वें दिन से ठीक से पहले इन गुड़ियों को प्यार से खड़े स्थान से नीचे लिटाया जाता है। 11वें दिन इन्हें सुरक्षित रूप से गोम्बे तोट्टी यानी 'गुड़िया मंडप' में रखा जाता है और अगले साल के दशहरा के लिए फिर से इसका इस्तेमाल किया जाता है।

shardiya navratri 2026 south india golu dolls tradition history significance bommai golu (1)

(Picture Credits- AI Images)

गोलू गुड़िया को कैसे सजाया जाता है?

गुड़िया को सीढ़ीनुमा तरीके से सजाया जाता है। सालों से चली आ रही परंपरा के अनुसार गुड़ियों को सीढ़ीनुमा तरीके से सजाया जाता है। यहां हर एक सीढ़ी जीवन के अलग-अलग पहलू को दर्शाती है।

आमतौर पर गुड़ियों को सीढ़ीनुमा तरीके से प्रदर्शित किया जाता है, जिनकी संख्या विषम (3, 5, 7, 9 या 11) होती हैं। हर एक सीढ़ी को कपड़े से ढका जाता है और एलईडी लाइटों से सजाया जाता है।

मरापाची गुड़िया सबसे शुभ

इन गुड़ियों में सबसे शुभ 'मरापाची' को माना जाता है और ये एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को सौंपी जाती है। मरापाची बोम्मई के नाम से जानी जाने वाली ये गुड़ियां लाल लकड़ी जैसे अलग-अलग प्रकार की लकड़ियों से बनी होती है। ये गुड़ियां आमतौर पर दंपत्तियों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

दक्षिण भारत में नवरात्र के दौरान लोग अपने परिवार, दोस्तों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों को गोलू के प्रदर्शन देखने के लिए बुलाते हैं। वे श्लोक पढ़ने के साथ उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं। इसके अलावा सात्विक भोजन का लुफ्त उठाते हैं।

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