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मां दुर्गा के किस रूप ने किया था चंड-मुंड का संहार? ऐसे पड़ा देवी का नाम चामुंडा

Published: Sat, 17 Oct 2026 01:30 PM (IST)

हिंदू धर्म में मां दुर्गा के शक्तिशाली स्वरूप मां चामुंडा की पूजा का विशेष महत्व है। उन्होंने चंड और मुंड ...और पढ़ें

कैसे प्रकट हुईं मां चामुंडा? (Picture Credit- AI Generated)

कैसे प्रकट हुईं मां चामुंडा? (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। मां दुर्गा को उनके अनेक स्वरूपों और दिव्य शक्तियों के लिए जाना जाता है। इन्हीं में से एक शक्तिशाली स्वरूप मां चामुंडा का है। मां चामुंडा का यह रूप उग्र, अत्यंत प्रभावशाली और कल्याणकारी माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चामुंडा की पूजा करने से हर प्रकार के संकट दूर होते हैं और भक्तों की शत्रुओं एवं नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है। इसके साथ ही घर में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।

मार्कंडेय पुराण के अनुसार, देवी को चामुंडा इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने चंड और मुंड नामक दो शक्तिशाली असुरों का वध किया था, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मां दुर्गा ने चंड और मुंड का वध क्यों किया था और यह पौराणिक कथा क्या है? आइए विस्तार से जानते हैं चंड और मुंड के वध की कथा।

चंड-मुंड वध की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में शुंभ और निशुंभ नामक दो राक्षसों ने तीनों लोकों में अत्याचार मचा रखा था। स्वर्ग पर अपना अधिकार स्थापित करने के लिए उन्होंने देवलोक पर आक्रमण कर दिया। इस स्थिति में सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में पहुंचे और उन्हें शुंभ-निशुंभ के अत्याचारों के बारे में बताया। तब भगवान विष्णु ने देवताओं को मां पार्वती की शरण में जाने की सलाह दी।

इसके बाद सभी देवता मां पार्वती की स्तुति और तपस्या करने लगे। देवताओं की भक्ति को देखकर मां पार्वती ने उनकी इस तपस्या का कारण पूछा। देवताओं ने शुंभ और निशुंभ के अत्याचारों से मुक्ति पाने के लिए अपनी व्यथा सुनाई। इसके बाद मां पार्वती के शरीर के तेज से मां कौशिकी प्रकट हुईं।

चंड और मुंड ने किया बल का प्रयोग

जब शुंभ और निशुंभ को मां कौशिकी के प्रकट होने का समाचार मिला, तो उन्होंने अपने दो प्रमुख असुर सेनापतियों चंड और मुंड को देवी को बंदी बनाकर लाने के लिए भेजा। चंड और मुंड ने देवी को युद्ध के लिए ललकारा। जब देवी कौशिकी ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया, तो चंड और मुंड ने उन पर बल प्रयोग करने का प्रयास किया।

देवी कौशिकी के तेज से प्रकट हुई कन्या

इस पर देवी कौशिकी क्रोधित हो गईं और उनके भयंकर क्रोध के तेज से एक विकराल कन्या प्रकट हुईं। देवी के इसी उग्र स्वरूप ने चंड और मुंड का वध कर दिया। चंड और मुंड का संहार करने के कारण ही देवी के इस स्वरूप को मां चामुंडा कहा गया। दुर्गा पूजा के दौरान संधि पूजा के समय मां चामुंडा के इसी स्वरूप की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।