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Shardiya Navratri 2026 Day 2: मां ब्रह्मचारिणी की इस मुहूर्त में करें पूजा, नोट करें विधि, कथा, भोग और आरती 

Published: Mon, 12 Oct 2026 06:30 AM (IST)

शारदीय नवरात्र 2026 के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, कथा और आरती के बारे में जानें। ...और पढ़ें

कैसे करें मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न? (Picture Credit: AI Generated)

कैसे करें मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न? (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज यानी 12 अक्टूबर को शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri 2026 Day 2) का दूसरा दिन है। यह दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना करने से भक्त के मन को शांति प्राप्त होती है और जीवन में शुभ परिणाम मिलते हैं। साथ ही जीवन की अनेक समस्याओं से छुटकारा मिलता है। ऐसे में आइए, इस आर्टिकल में हम आपको मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और कथा आदि के बारे में बताते हैं।

शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन का शुभ मुहूर्त (Shardiya Navratri 2026 Day 2 Shubh Muhurat)

द्वितीया तिथि की शुरुआत- 11 अक्टूबर 2026 को रात 9 बजकर 32 मिनट से
द्वितीया तिथि का समापन- 12 अक्टूबर 2026 को रात 10 बजकर 14 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि (Shardiya Navratri 2026 Day 2 Puja Vidhi)

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
मंदिर को गंगाजल से पवित्र करें।
मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा का अभिषेक करें।
इसके बाद देवी को फूल, जैसे चमेली, गेंदा या गुड़हल और श्रृंगार की चीजें अर्पित करें।
दीपक जलाकर आरती करें।
मंत्रों का जाप और कथा का पाठ करें।
मां ब्रह्मचारिणी को सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
देवी से जीवन में सुख-शांति की कामना करें।
अंत में लोगों में प्रसाद बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें।

मां ब्रह्मचारिणी के प्रिय भोग (Maa Brahmacharini Bhog)

मां ब्रह्मचारिणी को चीनी का भोग सबसे अधिक प्रिय माना जाता है। इसके अलावा दूध, दही, घी, शहद और शक्कर मिलाकर तैयार किया गया पंचामृत अर्पित करें। साथ ही दूध की खीर या पेड़े का भोग भी लगा सकते हैं।

मां ब्रह्मचारिणी कथा (Maa Brahmacharini Katha)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी ने हिमालयराज के घर जन्म लिया था। उन्होंने नारद मुनि के उपदेश पर भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी कठिन तपस्या की वजह से उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। तपस्या के दौरान देवी ने लंबे समय तक केवल जमीन पर गिरे हुए बिल्व पत्र खाकर जीवन व्यतीत किया। उन्होंने हर प्रकार के कष्ट सहकर महादेव की आराधना की। कुछ समय बाद उन्होंने बिल्व पत्र खाना भी त्याग दिया। इसके बाद मां ब्रह्मचारिणी ने निर्जल व निराहार रहकर घोर तपस्या की। इस तपस्या के कारण उनका शरीर अत्यंत क्षीण हो गया। देवी की इस कठिन तपस्या को देखकर देवताओं, ऋषियों, सिद्धगणों और मुनियों ने उन्हें प्रणाम किया और कहा कि आपको इस कठिन तपस्या का फल अवश्य मिलेगा और भगवान शिव आपको पति के रूप में प्राप्त होंगे।

मां ब्रह्मचारिणी स्तुति मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मां ब्रह्मचारिणी बीज मंत्र

ब्रह्मचारिणी: ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:।

मां ब्रह्मचारिणी पूजा मंत्र

1. ब्रह्मचारयितुम शीलम यस्या सा ब्रह्मचारिणी।

सच्चीदानन्द सुशीला च विश्वरूपा नमोस्तुते।।

2. ओम देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥

मां ब्रह्मचारिणी की आरती (Maa Brahmacharini Ki Aarti)

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।

जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।

ब्रह्मा जी के मन भाती हो।

ज्ञान सभी को सिखलाती हो।

ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।

जिसको जपे सकल संसारा।

जय गायत्री वेद की माता।

जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।

कमी कोई रहने न पाए।

कोई भी दुख सहने न पाए।

उसकी विरति रहे ठिकाने।

जो तेरी महिमा को जाने।

रुद्राक्ष की माला ले कर।

जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।

आलस छोड़ करे गुणगाना।

मां तुम उसको सुख पहुंचाना।

ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।

पूर्ण करो सब मेरे काम।

भक्त तेरे चरणों का पुजारी।

रखना लाज मेरी महतारी।

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