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'अंगना पधारो मोरी शारदा भवानी' इस भजन का क्या है अर्थ? जानिए मैहर वाली माता की महिमा

Published: Sun, 11 Oct 2026 07:00 AM (GMT+05:30)

शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू हो रहे हैं, जिसमें मैहर की मां शारदा देवी का विशेष महत्व है। यह ...और पढ़ें

मैहर वाली मां शारदा की महिमा (Picture Credit- AI Generated)

मैहर वाली मां शारदा की महिमा (Picture Credit- AI Generated) 

HighLights

  1. शारदीय नवरात्र में मैहर की मां शारदा का विशेष महत्व।

  2. 'अंगना पधारो मोरी शारदा भवानी' भजन का भावपूर्ण अर्थ।

  3. मैहर का पौराणिक महत्व, जहां गिरा था सती का हार।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो रही है। यह उत्सव मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शारदीय नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और व्रत करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और जीवन में आने वाले संकट दूर हो जाते हैं।

शारदीय नवरात्र के दौरान हर तरफ मां दुर्गा के भजन सुनने को मिलते हैं। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में स्थित त्रिकूट पर्वत पर विराजमान मां शारदा के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। यह मंदिर भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां शारदीय नवरात्र में कई सुंदर भजन सुनने को मिलते हैं, जिनमें 'अंगना पधारो मोरी शारदा भवानी...' भी प्रमुख रूप से शामिल है। आइए इस आर्टिकल में हम आपको इस भजन के अर्थ के बारे में विस्तार से बताते हैं।

मैहर का पौराणिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, 'मैहर' का अर्थ है 'माई का हार'। जब भगवान शिव माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब इसी स्थान पर सती का हार गिरा था, जिसकी वजह से यह अत्यंत पवित्र शक्तिपीठ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यहां मां भवानी बुद्धि और शक्ति की देवी शारदा के रूप में भक्तों का कल्याण करती हैं।

'अंगना पधारो मोरी शारदा भवानी' का अर्थ

यह भजन मां शारदा को समर्पित एक बेहद लोकप्रिय और भावपूर्ण गीत है। इसके बोलों में एक भक्त की गहरी आस्था, प्रेम और माता के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना देखने को मिलती है।

इस पंक्ति का सीधा अर्थ है कि 'हे मेरी मां शारदा भवानी! आप मेरे आंगन पधारिए।' आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यहां 'आंगन' का अर्थ भक्त का 'मन' और 'हृदय' है। इस भजन के द्वारा भक्त मां से विनती कर रहा है कि वे त्रिकूट पर्वत से उतरकर उसके जीवन और हृदय में निवास करें।

नवरात्र में उमड़ती है भक्तों की भारी भीड़

वैसे तो सालभर यहां देवी के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में भक्त आते हैं, लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान मैहर की छटा देखने लायक होती है। इस दौरान लाखों की संख्या में भक्त मां भवानी का आशीर्वाद लेने त्रिकूट पर्वत पहुंचते हैं।

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