मां पार्वती का मिलेगा अखंड आशीर्वाद, सावन के आखिरी सोमवार पर ऐसे करें कन्याओं का सत्कार
सावन के आखिरी सोमवार पर कन्या पूजन का विशेष महत्व है। जानिए कन्याओं को क्या दान देना चाहिए, पूजा की सरल विधि और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

आखिरी सोमवार पर कन्याओं को क्या दान करें?

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन का पवित्र महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का सबसे उत्तम समय माना जाता है। इस महीने में आने वाले सोमवार शिव-भक्तों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं होते हैं। आखिरी सोमवार को पूजा-पाठ और व्रत के साथ-साथ कन्या पूजन का भी विधान है। माना जाता है कि इस दिन छोटी कन्याओं को देवी का रूप माना जाता है और उन्हें भोजन कराने का भी विधान है।
सावन में क्यों खास है कन्या पूजन?
हिंदू धर्म में कन्याओं को हमेशा से देवी का रूप माना गया है। चूंकि, सावन में शिव जी के साथ मां पार्वती की भी पूजा होती है, इसलिए इस समय कन्या पूजन करने से देवी पार्वती बहुत प्रसन्न होती हैं। मान्यता है कि जब आप सच्चे मन से छोटी-छोटी कन्याओं को पूजते हैं और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं, तो परिवार पर भगवान की कृपा हमेशा बनी रहती है।
कन्या पूजन की बेहद आसान विधि
- सावन के आखिरी सोमवार को सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान के साथ पूजा करें।
- पूजा के बाद कन्याओं को आदर और सम्मान के साथ अपने घर पर बुलाएं।
- इसके बाद उनके पैर धोकर, कुमकुम का टीका लगाएं और उन्हें सम्मान के साथ बैठाएं।
- उन्हें शुद्ध और सात्विक भोजन कराएं (जैसे खीर, पूरी, हलवा)।
- इसके बाद उन्हें प्यार से खुशी मन से अपनी क्षमता के अनुसार उपहार दें।
- फिर उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें और उन्हें खुशी-खुशी विदा करें।
कन्याओं को क्या दें उपहार?
अगर आप कन्या पूजन का मन बना रहे हैं तो तोहफा या दान हमेशा अपने सामर्थ्य के हिसाब से ही दें। आप उन्हें उनकी उम्र और जरूरत के हिसाब से चीजें दे सकते हैं। जैसे- नए कपड़े, ताजे फल, मिठाई, पढ़ाई का सामान (किताबें, कलर, स्टेशनरी), रंग-बिरंगी चूड़ियां या रूमाल, बालों में सजावट का सामान। भोजन के बाद थोड़ी सी दक्षिणा देना भी बहुत शुभ माना जाता है।
दान में महंगे गिफ्ट्स की कीमत नहीं, बल्कि आपके मन की सच्ची श्रद्धा देखी जाती है। किसी की देखा-देखी में अपनी क्षमता से बाहर जाकर खर्चा करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। और हां, सबसे अहम बात यह है कि कन्याओं का सम्मान सिर्फ एक दिन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। असल पूजा यही है कि हम हर दिन बेटियों की इज्जत करें, उन्हें सुरक्षित माहौल दें और आगे बढ़ने में उनकी मदद करें।
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