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माथे की बिंदी से पैरों की बिछिया तक: रूप चौदस पर 16 श्रृंगार का हर एक गहना देता है आशीर्वाद

Published: Sat, 07 Nov 2026 03:28 PM (IST)

भारतीय संस्कृति में शादीशुदा महिलाओं के लिए 16 श्रृंगार का विशेष महत्व है, जो सुंदरता और वैवाहिक जीवन की लंबी ...और पढ़ें

भारतीय संस्कृति में 16 श्रृंगार का महत्व (Picture Credits- AI Images)

भारतीय संस्कृति में 16 श्रृंगार का महत्व (Picture Credits- AI Images)

HighLights

  1. 16 श्रृंगार भारतीय संस्कृति में वैवाहिक जीवन का प्रतीक।

  2. करवा चौथ, तीज, रूप चौदस पर विशेष महत्व।

  3. लाल जोड़ा, सिंदूर, मंगलसूत्र प्रमुख श्रृंगार अंग।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति में शादीशुद महिलाओं के लिए 16 श्रृंगार का खास महत्व बताया गया है। किसी भी विवाहित महिला के लिए यह न केवल सुंदरता का प्रतीक है, बल्कि वैवाहिक जीवन की लंबी उम्र और शादीशुदा लाइफ की शुभकामनाओं के लिए प्रतीक माना जाता है। खासकर करवा चौथ, नवरात्रि और तीज जैसे त्योहारों के दौरान महिलाएं पारंपरिक श्रृंगार कर देवी की पूजा करती हैं और पूरे नियमों के साथ सजती-संवरती हैं।

इसी तरह दीपोत्सव के 5 दिनों में आने वाली रूप चौदस पर भी महिलाओं के श्रृंगार करने का महत्व है। इस दिन महिलाएं श्रृंगार करती हैं। इस साल रूप चतुर्दशी का त्योहार 7 नवंबर 2026, यानी आज ही मनाया जा रहा है। इस मौके पर सोलह श्रृंगार का अत्यंत महत्व है।

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16 श्रृंगार का महत्व

लाल जोड़ा- महिलाओं के 16 श्रृंगार में लाल जोड़ा सबसे खास माना जाता है। लाल रंग प्यार, सौभाग्य, समर्पण और अखंड सुहाग का प्रतीक माना जाता है।

बिंदी- महिलाओं के लिए माथे की बिंदी सुंदरता का सबसे खास हिस्सा मानी जाती है। महिलाओं के लिए यह श्रृंगार का अनिवार्य है।

मेहंदी- हाथों पर लगी मेहंदी न केवल खूबसूरत दिखाई देती है बल्कि इसे सौभाग्य की निशानी के तौर पर भी देखा जाता है।

सिंदूर- सुहागिन महिलाओं के लिए सिंदूर उनकी विवाहिता का सबसे खास प्रतीक माना जाता है। यह महिलाओं के लिए आत्मगौरव होता है।

गजरा- फूलों से सजे बाल गजरे के साथ काफी आकर्षक लगते हैं। खासकर इन्हें सबसे ज्यादा पारंपरिक पहनावे के साथ पहना जाता है।

काजल- आंखों में काजल लगाने से नजर से बचाव होने के साथ आंखों की सुंदरता काफी बढ़ जाती है।

मांग टीका- सिर के बीचों-बीच पहने जाने वाला यह ज्वेलरी लुक महिलाओं को राजसी बनाता है।

चूड़ियां- हाथों में खनकती चूड़ियां स्त्रीत्व और सुहाग की निशानी की तौर पर देखी जाती है।

बाजूबंद- बाजू पर बांधा जाने वाला यह आभूषण पारंपरिक पहनावे को पूरा करता है।

नथ- नाक में पहने जाने वाली नथ महिलाओं के सोलह श्रृंगार में सबसे खास मानी जाती है।

झुमके- 16 श्रृंगार में झुमके महिलाओं के लिए बेहद खास माने जाते हैं। झुमके महिलाओं के चेहरे की रौनक बढ़ती है।

पायल- महिलाओं के लिए पैरों में पहने जाने वाली पायल 16 श्रृंगार में सुहाग की निशानी मानी जाती है।

अंगूठी- शादी या सगाई की अंगूठी हमेशा पहनी जाती है। विवाहित महिलाएं इसे भी अपने श्रृंगार में शामिल करती हैं।

बिछिया- पैरों की अंगुलियों में पहने जाने वाली बिछिया विवाहित जीवन की पहचान का हिस्सा माना जाता है।

मंगलसूत्र- यह सबसे खास और पवित्र श्रृंगार में से एक है, जिसे सुहाग की निशानी के तौर पर पहना जाता है।

कमरबंद- कमर पर बांधा गया यह आभूषण खास मौकों पर पहना जाता है।

त्योहार पर क्यों बढ़ जाता है 16 श्रृंगार का महत्व

नवरात्र, करवा चौथ, हरतालिका तीज, सौभाग्यवती व्रत जैसे पर्वों पर महिलाएं जब पारंपरिक कपड़ों के साथ 16 श्रृंगार करती हैं, जिसे भारतीय नारी की गरिमा और उसके संस्कारों का भी प्रतीक है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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