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रमा एकादशी 2026: मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की बरसेगी असीम कृपा, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पारण का सटीक समय

Published: Thu, 05 Nov 2026 06:30 AM (IST)

कार्तिक माह की रमा एकादशी (Rama Ekadashi 2026) भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है, जिसका व्रत 4 नवंबर ...और पढ़ें

रमा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त, महत्व, व्रत और आरती

रमा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त, महत्व, व्रत और आरती

HighLights

  1. रमा एकादशी भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है।

  2. व्रत रखने से पापों से मुक्ति और धन-समृद्धि मिलती है।

  3. पूजा में कौड़ियां अर्पित कर तिजोरी में रखना शुभ होता है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज का दिन भगवान विष्णु के भक्तों के लिए बेहद खास रहने वाला है, क्योंकि आज कार्तिक माह की 'रमा एकादशी' है। यह व्रत 4 नवंबर को शुरू हो चुका है, जो आज यानी 5 नवंबर को समाप्त हो जाएगा।

इस व्रत का पारण करने वाले भक्त 6 नवंबर को द्वादशी तिथि पर व्रत का पारण करेंगे। पारण का सही मुहूर्त जगहों और पंचांग परंपराओं के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। आइए जानते हैं रमा एकादशी से जुड़ी संपूर्ण जानकारी के बारे में।

रमा एकादशी 2026 (Rama Ekadashi 2026 Date And Times)

रमा एकादशी तिथि की शुरुआत - 04 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजकर 03 मिनट पर

रमा एकादशी व्रत का समापन - 5 नवंबर 2026 को सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर

रमा एकादशी व्रत पारण - शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

पारण का समय - सुबह 6 बजकर 37 मिनट से लेकर 8 बजकर 48 मिनट तक

सभी एकादशी व्रत की ही तरह रमा एकादशी व्रत भी भगवान विष्णु की पूजा को समर्पित है। भक्त इस दिन पारंपरिक रूप से श्रीहरि की भक्ति करने के साथ, आध्यात्मिक अनुशासन और शांति प्राप्त करने पर ध्यान देते हैं। इस दौरान भक्त व्रत रखने के साथ प्रार्थना करते हैं और भगवान का आशीर्वाद लेते हैं।

यह व्रत रमा एकादशी व्रत कथा से भी जुड़ा है, जिसमें शोभना और चंद्रभागा की कहानी का वर्णन किया गया है। यह कहानी सच्ची भक्ति और विश्वास के महत्व पर जोर देती है।

रमा एकादशी व्रत का महत्व (The Significance of the Rama Ekadashi Vrat)

रमा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है, जो कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि या चंद्र पखवाड़े के 11वें दिन मनाई जाती है। भक्त इस पवित्र मौके पर भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ दान-पुण्य करते हैं।

इसके अलावा रमा नाम मां लक्ष्मी से भी जुड़ा है। हिंदू मान्यताओं में सच्चे मन और भक्ति से व्रत रखने वाले पर भगवान विष्णु की सच्ची कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यता है कि रमा एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को अपने पापकर्मों से मुक्ति मिलती है।

रमा एकादशी पूजा विधि (Rama Ekadashi 2026 puja Vidhi)

रमा एकादशी व्रत के (Rama Ekadashi 2026) मौके पर व्यक्ति को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नहाना चाहिए। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर एक चौकी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या छवि को स्थापित करना चाहिए। इसके बाद उन्हें श्रद्धा भाव के साथ फूल, चंदन, तुलसी और धूप अर्पित करनी चाहिए। भोग में उन्हें मिठाई के साथ तुलसी दल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

वहीं पूजा के दौरान लाल कपड़े में 5 कौड़ियां बांधकर माता लक्ष्मी को चढ़ाना चाहिए। इसके बाद इन कौड़ियों को तिजोरी में रख दें। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में कभी भी पैसों की कमी नहीं होती है।

श्री विष्णु जी की आरती

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे

भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

ॐ जय जगदीश हरे...

जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।

स्वामी दुःख विनसे मन का।

सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

ॐ जय जगदीश हरे...

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।

स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।

तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥

ॐ जय जगदीश हरे...

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।

स्वामी तुम अन्तर्यामी।

पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥

ॐ जय जगदीश हरे...

तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।

स्वामी तुम पालन-कर्ता।

मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥

ॐ जय जगदीश हरे...

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।

स्वामी सबके प्राणपति।

किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥

ॐ जय जगदीश हरे...

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

स्वामी तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा तेरे॥

ॐ जय जगदीश हरे...

विषय-विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा।

स्वामी पाप हरो देवा।

श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ, संतन की सेवा॥

ॐ जय जगदीश हरे...

श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।

स्वामी जो कोई नर गावे।

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥

ऊं जय जगदीश हरे...

मां लक्ष्मी की आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता।

तुमको निशिदिन सेवत,हरि विष्णु विधाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी,तुम ही जग-माता।

सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत,नारद ऋषि गाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

दुर्गा रुप निरंजनी,सुख सम्पत्ति दाता।

जो कोई तुमको ध्यावत,ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता।

कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

जिस घर में तुम रहतीं,सब सद्गुण आता।

सब सम्भव हो जाता,मन नहीं घबराता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

तुम बिन यज्ञ न होते,वस्त्र न कोई पाता।

खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर,क्षीरोदधि-जाता।

रत्न चतुर्दश तुम बिन,कोई नहीं पाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

महालक्ष्मी जी की आरती,जो कोई जन गाता।

उर आनन्द समाता,पाप उतर जाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

बृहस्पति देव की आरती

जय बृहस्पति देवा, ऊँ जय बृहस्पति देवा ।

छिन छिन भोग लगा‌ऊँ, कदली फल मेवा ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी ।

जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥

चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता ।

सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥

तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े ।

प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्घार खड़े ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥

दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी ।

पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥

सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारो ।

विषय विकार मिटा‌ओ, संतन सुखकारी ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥

जो को‌ई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे ।

जेठानन्द आनन्दकर, सो निश्चय पावे ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥

सब बोलो विष्णु भगवान की जय ।

बोलो बृहस्पति देव भगवान की जय ॥

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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