प्रदोष काल में ही क्यों होती है महादेव की पूजा? शिव जी के तांडव से जुड़ी है खास मान्यता
हर माह की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा ...और पढ़ें
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प्रदोष काल का रहस्य (Picture Credits- AI Images)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat 2026) किया जाता है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विधान है। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 23 अक्टूबर को प्रदोष व्रत किया जा रहा है।
इस दिन महादेव की साधना प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शुभ मुहूर्त में शिव जी की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के भयों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रदोष व्रत के दिन शिव जी की पूजा प्रदोष काल में करना शुभ क्यों माना जाता है? अगर नहीं, तो आइए इस आर्टिकल में हम आपको इसके पीछे की वजह विस्तार से बताते हैं।
प्रदोष व्रत 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Pradosh Vrat 2026 Date and Shubh Muhurat)
आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत: 23 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 35 मिनट से
आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का समापन: 24 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 36 मिनट पर
वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 23 अक्टूबर को प्रदोष व्रत रखा जा रहा है।
शिव पूजा का समय: शाम 05 बजकर 58 मिनट से रात 08 बजकर 29 मिनट तक
प्रदोष काल का धार्मिक महत्व
हर महीने में 2 बार विधिपूर्वक प्रदोष व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को सच्चे मन से करने पर साधक को शुभ परिणाम मिलते हैं और महादेव की कृपा से जीवन में शांति बनी रहती है। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव को ध्यान में रखकर व्रत और उनकी पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य (तांडव) करते हैं। इसलिए इस काल में पूजा करने से महादेव जल्दी प्रसन्न होते हैं और व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
कब होता है प्रदोष काल?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रदोष काल दिन और रात के मिलन का समय होता है, यानी जब दिन ढल रहा होता है और रात की शुरुआत हो रही होती है। सरल शब्दों में कहें तो सूर्यास्त के आसपास के समय को ही प्रदोष काल कहा जाता है।
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