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27 सितंबर से शुरू हो रहा है आश्विन का महीना: क्या करें और क्या न करें, ताकि बनी रहे पितरों और देवी की कृपा

Published: Tue, 22 Sep 2026 06:02 PM (IST)

आश्विन मास हिंदू धर्म में अत्यधिक पवित्र माना जाता है, जो 27 सितंबर 2026 से शुरू होकर 26 अक्टूबर 2026 ...और पढ़ें

हिंदू धर्म में आश्विन मही का महत्व

हिंदू धर्म में आश्विन मही का महत्व

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में आश्विन महीने का खास महत्व है। इस साल आश्विन मास की शुरुआत 27 सितंबर 2026, रविवार हो रही है, जो 26 अक्तूबर 2026, सोमवार के दिन समाप्त होगी।

हिंदू पंचांग के हिसाब से आश्विन साल का सातवां महीना होता है। इस पवित्र महीने में पितरों का तर्पण और श्राद्ध के साथ पिंडदान किया जाता है। आश्विन के महीने कुछ खास बातों का ध्यान रखने की जरूरत होती है।

आश्विन का महीना बेहद पवित्र माना जाता है, जो सितंबर से अक्तूबर माह के बीच में पड़ता है। इस दौरान इंदिरा एकादशी, शारदीय नवरात्रि, सरस्वती पूजा, दुर्गा पूजा, करवा चौथ, दशहरा, शरद पूर्णिमा और कोजागरा जैसे व्रत मनाए जाते हैं। इसके अलावा आश्विन महीने की शुरुआत के साथ ही सूर्य की ऊर्जा धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है।

आश्विन मास इतना पवित्र क्यों है?

आश्विन मास की पवित्रता के बारे में मार्कंडेय पुराण की देवी महात्म्य (दुर्गा सप्तशती) में वर्णन मिलता है। आश्विन मास का पहला पखवाड़ा पितरों को समर्पित होता है।

हिंदू पंचांग के हिसाब से देखा जाए तो आश्विन मास भाद्रपद के बाद और कार्तिक मास के पहले आता है। इस मास में पूर्णिमा के दौरान चंद्रमा अक्सर अश्विनी नक्षत्र में स्थित होता है, जिसका अधिष्ठाता देवता वही अश्विन कुमार हैं।

आश्विन मास का महत्व

आश्विन मास के दौरान पूजा और व्रत शरीर, मन और आत्मा पर सकारात्मक प्रभाव दिखाते हैं। यह महीना अश्विनी कुमार के आशीर्वाद और नक्षत्रों की ऊर्जा को ग्रहण करने का सबसे उचित समय माना जाता है। इस मास में पूजा, व्रत और दान करने से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।

आश्विन मास के दैनिक नियम

आश्विन मास की शुरुआत होने के साथ ही हर किसी को अपने दिनचर्या में कुछ नियमों को शामिल करना चाहिए। इसमें स्नान, दान, जप, इष्ट देवता की पूजा, व्रत का पालन और संध्या दीपक आरती शामिल है।

मान्यताओं के मुताबिक, आश्विन मास भर संध्या के समय अखंड दीपक जलाने से पितरों की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

आश्विन के महीने में क्या करें और क्या नहीं?

आश्विन मास के पहले पखवाड़े में पितृ पक्ष चलता है, तो इस दौरान किसी भी तरह की नई खरीदारी, गृह प्रवेश, सगाई या उत्सवों से बचना चाहिए। इस दौरान श्रद्धा को औपचारिकता से न करें बल्कि सच्चे मन से श्रद्धा करें।

आश्विन मास में नवरात्रि की भी शुरुआत हो जाती है, तो इस दौरान भूलकर भी तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा बाल और नाखून को काटने से भी बचना चाहिए।

आश्विन मास में किसी भी महिला का अपमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि उनमें देवी का वास माना जाता है।

आश्विन मास के प्रमुख त्योहार और व्रत

श्राद्ध पूर्णिमा
इंदिरा एकादशी
अमावस्या
नवरात्रि
दुर्गा अष्टमी
दशहरा
पापांकुशा एकादशी
शरद पूर्णिमा

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।