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माता सीता ने फल्गु नदी के तट पर ही क्यों किया था राजा दशरथ का पिंडदान? रामायण में छिपा है इसका रहस्य

Published: Mon, 21 Sep 2026 11:33 AM (IST)

सनातन धर्म में पितृ पक्ष के दौरान गया के फल्गु नदी तट पर पिंडदान का विशेष महत्व है। माता सीता ...और पढ़ें

पितरों को समर्पित है पितृ पक्ष (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में पितृ पक्ष (Pitru Paksha 2026) की अवधि को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान पितरों का तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान किया जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, इन कार्यों को करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही पितृ दोष की समस्या भी दूर होती है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पितरों का तर्पण गया में स्थित फल्गु नदी के तट पर करना बेहद शुभ माना जाता है। पितृ पक्ष के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां अपने पूर्वजों का पिंडदान करने आते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, फल्गु नदी के तट पर माता सीता ने राजा दशरथ का पिंडदान किया था। आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि आखिर माता सीता ने राजा दशरथ का पिंडदान फल्गु नदी के तट पर ही क्यों किया था। आइए, इस आर्टिकल में इसके पीछे का रहस्य जानते हैं।

माता सीता ने फल्गु नदी पर क्यों किया था पिंडदान?

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, वनवास के दौरान जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी गया पहुंचे, तो उस समय पितृ पक्ष चल रहा था। वहां उनकी मुलाकात एक ब्राह्मण से हुई, जिन्होंने उन्हें श्राद्ध की सामग्री जुटाने का आदेश दिया। इसके बाद भगवान श्रीराम और लक्ष्मण जी सामग्री लेने चले गए, लेकिन उन्हें वापस आने में काफी देर हो गई।

माता सीता ने बालू से बनाए पिंड

उस समय पिंडदान का समय निकला जा रहा था। इसलिए ब्राह्मण देव ने माता सीता से ही पिंडदान करने का आग्रह किया। उसी दौरान माता सीता को महाराज दशरथ ने दिव्य रूप में दर्शन दिए और उन्हें पिंडदान करने का आदेश दिया। इसके बाद माता सीता ने फल्गु नदी के तट पर बालू से पिंड बनाए और विधिपूर्वक पिंडदान किया।

माता सीता के द्वारा किए गए इस पिंडदान से राजा दशरथ की आत्मा तृप्त हुई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान गया स्थित फल्गु नदी के तट पर तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इससे व्यक्ति को पितृ दोष से छुटकारा मिलता है और पितरों की विशेष कृपा बरसती है।

कब से शुरू होगा पितृ पक्ष 2026?

वैदिक पंचांग के अनुसार, पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से होगी और इसका समापन 10 अक्टूबर को होगा।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।