Pitru Paksha 2026: 2 अक्टूबर को एक साथ पड़ रही है षष्ठी और सप्तमी तिथि, नोट करें तर्पण का मुहूर्त
इस वर्ष पितृ पक्ष में षष्ठी और सप्तमी तिथि 2 अक्टूबर को एक साथ पड़ रही हैं, जिससे पितरों का ...और पढ़ें

षष्ठी और सप्तमी श्राद्ध, जानें शुभ मुहूर्त । (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पितृ पक्ष का महीना हिंदू परिवारों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इन दिनों में सभी लोग अपने पितरों को याद करते हैं और उनका श्राद्ध कर्म कर उनकी आत्मा को शांति पहुंचाने का संकल्प लेते हैं। आमतौर पर यह महीना 16 दिनों के लिए हेाता है, मगर इस वर्ष यह महीना 15 दिनों का है।
दरअसल, इस वर्ष षष्ठी और सप्तमी दो तिथियां एक ही दिन मनाई जा रही हैं। ये दोनों तिथियां 2 अक्टूबर को पड़ रही हैं। जिनके पितरों की तिथियां षष्ठी और सप्तमीहैं, वे इस भ्रम में हैं कि उनका श्राद्ध कर्म कब और किस मुहूर्त में करना ठीक रहेगा। इसलिए हमने इस विषय पर उज्जैन के ज्योतिषाचार्यएवं पंडित मनीष शर्मा से बात की। वह कहते हैं, "यह तिथि क्षय के कारण हुआ है। ग्रहों की दशा और चाल के कारण ऐसा हो सकता है कि दो तिथियां एक दिन ही पड़ जाएं, मगर इसमें परेशान होने वाली बात नहीं है। दोनों ही तिथियों पर पितरों का श्राद्ध कर्म एक ही मुहूर्त पर किया जा सकता है।"
पंडित मनीष शर्मा हमें श्राद्ध कर्म करने और पितरों को तर्पण देने के लिए शुभ मुहूर्त भी बता रहे हैं, तो चलिए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
श्राद्ध कर्म के शुभ मुहूर्त
कुतुप मुहूर्त - सुबह 11 बजकर 31 मिनट से दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक
रोहिणी मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 32 मिनट से 1 बजकर 20 मिनट तक।
अपराह्न काल- दोपहर 1 बजकर 20 मिनट से 3 बजकर 45 मिनट तक
2 अक्टूबर को किसका श्राद्ध करें?
श्राद्ध हमेशा मृत व्यक्ति की मृत्यु तिथि यानी हिंदू पंचांग की तिथि के आधार पर किया जाता है। यदि किसी परिजन का निधन षष्ठी तिथि को हुआ था और किसी अन्य पितर का निधन सप्तमी तिथि को हुआ था, तो 2 अक्टूबर को दोनों तिथियों के श्राद्ध पूरे विधान के साथ किए जा सकते हैं। पंडित मनीष शर्मा कहते हैं, "अलग-अलग पंचांगों में अलग-अलग बात कही गई है कुछ लोगोंने 1 अक्टूबर को ही षष्ठी तिथि का श्राद्ध कर्म कर लिया है, तो कुछ 2 अक्टूबर को करेंगे। हालांकि, 2 अक्टूबर षष्ठी और सप्तमी तिथि का श्राद्ध कर्म करने के लिए सबसे अच्छे दिन हैं।"
कैसे करें पितरों का श्राद्ध?
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और श्राद्ध के लिए सात्त्विक भोजन तैयार करें। सबसे पहले भगवान विष्णु और अपने पितरों का स्मरण करें। इसके बाद कुश, काले तिल और जल से तर्पण करें। श्राद्ध के धार्मिक नियम के अनुसार पिंड बनाने के लिए चावल और तिल आदि का प्रयोग करें और पितरों की पूजा करके ब्राह्म्ण को भोजन कराएं।
यह भी पढ़ें- भूल गए हैं श्राद्ध की तिथि? पितृ पक्ष की इन 3 खास तिथियों पर तर्पण कर पाएं पूर्वजों का आशीर्वाद
यह भी पढ़ें- 1 से 10 अक्टूबर तक क्यों न खरीदें नई गाड़ी? जानिए पितृ पक्ष के बाद वाहन खरीदारी के सबसे शुभ मुहूर्त
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
