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तरक्की से लेकर संतान सुख तक: अपनी मनोकामना के अनुसार कौन-सा श्राद्ध करना है शुभ

Published: Fri, 25 Sep 2026 11:26 AM (IST)

पितृ पक्ष में किए जाने वाले श्राद्ध 12 प्रकार के होते हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना विशेष महत्व और ...और पढ़ें

कितने प्रकार के होते हैं श्राद्ध? (AI-Generated Image)

कितने प्रकार के होते हैं श्राद्ध? (AI-Generated Image)

HighLights

  1. भविष्य पुराण में 12 प्रकार के श्राद्धों का विस्तृत वर्णन है।

  2. प्रत्येक श्राद्ध का अपना विशिष्ट उद्देश्य और अलग लाभ होता है।

  3. श्राद्ध से पितर प्रसन्न, तरक्की और संतान सुख की प्राप्ति।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, पितृ पक्ष (Pitru Paksha) की शुरुआत 26 सितंबर से हो रही है। इस अवधि के दौरान पितरों का श्राद्ध (Shraddha) किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष में पूर्वजों का श्राद्ध करने से पितर प्रसन्न होते हैं और उनकी आत्मा को शांति प्राप्त होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि श्राद्ध कितने प्रकार के होते हैं? अगर नहीं, तो आइए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।

12 प्रकार के होते हैं श्राद्ध

भविष्य पुराण में 12 तरह के श्राद्ध का वर्णन किया गया है।

1. नित्य श्राद्ध- इस श्राद्ध में जल, अन्न या तिल से पितरों को तृप्त किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस श्राद्ध को करने से व्यक्ति की खूब तरक्की होती है।

2. नैमित्तिक श्राद्ध- इसे एकोद्दिष्ट श्राद्ध भी कहा जाता है। यह श्राद्ध किसी विशेष अवसर या तिथि पर किया जाता है। यह श्राद्ध किसी एक व्यक्ति के लिए किया जाता है।

3. काम्य श्राद्ध- मान्यता के अनुसार, इस श्राद्ध को मनोकामना पूरी करने के लिए किया जाता है। इस श्राद्ध को करने से व्यक्ति को जीवन में उपलब्धियां हासिल होती हैं।

4. पार्वण श्राद्ध- यह श्राद्ध अमावस्या या पितृ पक्ष के दौरान किया जाता है। इस श्राद्ध के दौरान पितृ, पितामह और प्रपितामह का तर्पण करने का विधान है।

5. वृद्धि श्राद्ध- इसे किसी विवाह या उत्सव के अवसरों पर पितरों का आशीर्वाद लेने के लिए किया जाता है। इसमें किसी भी शुभ काम को शुरू करने से पहले पितरों का आशीर्वाद लिया जाता है।

6. सपिण्डीकरण श्राद्ध- इसे व्यक्ति की मृत्यु के 12वें दिन या फिर बरसी पर किया जाता है। यह श्राद्ध अपनों में सम्मान बनाए रखने के लिए किया जाता है।

7. गोष्ठी श्राद्ध- यह श्राद्ध परिवार या समाज के विद्वानों के साथ समूह में मिलकर किया जाता है।

8. शुद्धि श्राद्ध- किसी अशुद्धि या सूतक-पातक के समाप्त होने पर शारीरिक और आध्यात्मिक पवित्रता के लिए शुद्धि श्राद्ध किया जाता है।

9. कर्मांग श्राद्ध- इस श्राद्ध को धार्मिक अनुष्ठान या संस्कार को शुरू करने से पहले किया जाता है। इस श्राद्ध को करने से आपकी संतान बुढ़ापे के समय आपका सहारा बनती है।

10. दैविक श्राद्ध- मान्यता के अनुसार, इस श्राद्ध को देवताओं को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है।

11. यात्रा श्राद्ध- किसी लंबी यात्रा या तीर्थयात्रा पर जाने से पहले यात्रा श्राद्ध किया जाता है। इससे यात्रा में सफलता प्राप्त होती है।

12. पुष्टि श्राद्ध- स्वयं और परिवार के शारीरिक स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि के लिए पुष्टि श्राद्ध किया जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।