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Pitru Paksha 2026: 27 सितंबर से हस्त नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश, पितरों के तर्पण के साथ बन रहे अच्छी बारिश के योग

Published: Fri, 25 Sep 2026 12:47 AM (IST)

पितृपक्ष 27 सितंबर से शुरू हो रहा है, जिसमें श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और ...और पढ़ें

थिया नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश बेहतर वर्षा का संकेत देता है, जो खरीफ की फसलों और जलस्रोतों के लिए बेहद लाभदायक साबित होगी।

थिया नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश बेहतर वर्षा का संकेत देता है, जो खरीफ की फसलों और जलस्रोतों के लिए बेहद लाभदायक साबित होगी।

HighLights

  1. पितृपक्ष 27 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलेगा, पूर्वजों का सम्मान।

  2. सूर्य का हस्त नक्षत्र में प्रवेश, अच्छी वर्षा के योग बन रहे।

  3. तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म से पितरों को शांति मिलेगी।

जासं, जमशेदपुर। सनातन धर्म में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का महापर्व पितृपक्ष (महालया) इस वर्ष 27 सितंबर से शुरू हो रहा है। 
 
ऋषिकेश पंचांग के अनुसार, यह पावन पखवाड़ा 10 अक्टूबर यानी सर्वपितृ अमावस्या तक चलेगा। इस दौरान श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म संपन्न करेंगे।
 

सूर्य का हस्त नक्षत्र में प्रवेश, अच्छी वर्षा का योग 

छोटा गोविंदपुर स्थित श्रीराम मंदिर के पुरोहित देवानंद पांडेय ने बताया कि 27 सितंबर को तड़के 4:50 बजे सूर्यदेव हस्त (हथिया) नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। 
 
ज्योतिष शास्त्र और लोक मान्यताओं के अनुसार, हथिया नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश बेहतर वर्षा का संकेत देता है, जो खरीफ की फसलों और जलस्रोतों के लिए बेहद लाभदायक साबित होगी।
 

तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोज का विधान 

पुरोहित देवानंद पांडेय के अनुसार, इस पखवाड़े में लोग अपने पूर्वजों की पुण्यतिथि पर विधिवत श्राद्ध और तर्पण करते हैं। जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो, उनका श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या (10 अक्टूबर) को किया जाता है। 
 
इस दौरान ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दी जाती है। इसके साथ ही गाय, कौवे और कुत्ते को अन्न-जल (ग्रास) देकर पितरों की तृप्ति की प्रार्थना की जाती है।
 

पितृऋण और पितृदोष से मिलती है मुक्ति 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मानव जीवन में पितृऋण सर्वोपरि माना गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार, पितृपक्ष में पितर अपने परिजनों के समीप आते हैं। 
 
इस दौरान श्रद्धापूर्वक अर्पित किया गया तिलमिश्रित जल और अन्न सीधे पितरों तक पहुँचता है। पितरों के आशीर्वाद से परिवार में सुख-समृद्धि और आरोग्य का वास होता है तथा कुंडली के पितृदोष का शमन होता है।