नलकुबेर के श्राप से डरता था रावण! बिना स्पर्श कैसे किया सीता हरण? कंब रामायण का रहस्य कर देगा हैरान
रावण ने नलकुबेर के श्राप के कारण सीता का हरण बिना स्पर्श किए कैसे किया, यह एक रहस्य है। कंब ...और पढ़ें

नलकुबेर के श्राप से डरता था रावण सीता हरण का कंब रामायण रहस्य (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
रावण ने नलकुबेर के श्राप के कारण सीता को नहीं छुआ।
कंब रामायण बताती है रावण ने भूमि सहित सीता का हरण किया।
रावण ने सीता के आश्रम की लगभग 8 किमी गहरी जमीन उठाई।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण में माता सीता के हरण का प्रसंग सबसे महत्वपूर्ण है। यूं कहा जाए कि इसी प्रसंग में पूरी रामायण का सार और प्रभु श्री राम के साथ रावण के युद्ध की गाथा का वर्णन मिलता है।
रावण ने छल से माता सीता का अपहरण किया और उन्हें लंका ले गया, लेकिन इस घटना से जुड़ा एक सवाल आज भी लोगों की जिज्ञासा बढ़ाता है कि आखिर रावण ने माता जानकी को स्पर्श किए बिना उनका हरण कैसे किया?
दरअसल, पौराणिक कथाओं में इस बात का वर्णन मिलता है कि नलकुबेर का एक श्राप था जिसके कारण उसे किसी भी पराई स्त्री का स्पर्श करते ही भस्म होने का श्राप था।
फिर मन में सवाल आता है कि कैसे रावण ने सीता हरण उन्हें बिना स्पर्श के कैसे किया। इसके बारे में पूर्ण जानकारी कंब रामायण में मिलती है और इसमें जो रहस्य छुपा है वो वास्तव में आपको भी सोचने के लिए मजबूर कर सकता है। आइए जानें इसके बारे में।
कंब रामायण में लिखा है सीता हरण का यह रहस्य
हिंदू धर्म में कई ऐसी रामायणों का वर्णन मिलता है जिसकी कथाएं भी अलग-अलग हैं। ऐसे ही तमिल के प्रसिद्ध कवि कंबन द्वारा रचित कंब रामायण में सीता हरण का प्रसंग वाल्मीकि रामायण से कुछ अलग तरीके से बताया गया है। इस कथा के अनुसार, रावण माता सीता को सीधे स्पर्श नहीं करता है बल्कि वह जिस स्थान पर रहती थीं, उसी स्थान को उठाकर ले जाता है।
कथा के अनुसार, जब रावण माता सीता का हरण करने पहुंचा, तब उसने उनके आश्रम के आसपास की जमीन को ही उखाड़ दिया। उसने कुटिया और उस जमीन के हिस्से को, जिस पर माता सीता थीं, उठाकर अपने पुष्पक विमान में रख लिया। इस तरह वह माता सीता को बिना स्पर्श किए ही लंका ले गया।
रावण ने जमीन का कितना हिस्सा हाथ में उठाया था
कंब रामायण के अनुसार, रावण ने माता सीता का हरण करते हुए उस स्थान की लगभग 8 किमी गहरी और एक योजन दूर तक की जमीन को खोदकर उठाया, जिस जगह सीता जी विराजमान थीं। वास्तव में यह रावण के साहस और बुद्धि का ही नमूना था।
नलकुबेर का श्राप क्या था?
जब रावण माता सीता का हरण करने गया उस समय उसे नलकुबेर का वह श्राप याद आ गया जिसमें यदि वह बल पूर्वक किसी भी स्त्री को स्पर्श करेगा तो उसके सिर के टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे। इसी वजह से उस श्राप से अपना जीवन बचाने के कारन उसने सीता हरण इस तरह से किया कि उनके आस-पास की जमीन ही उठा ली।
वाल्मीकि रामायण और कंब रामायण में क्या है अंतर?
वाल्मीकि रामायण के अरण्यकांड में रावण द्वारा माता सीता के हरण का अलग तरीके से उल्लेख किया गया है, वहीं तमिल की कंब रामायण में कवि कंबन ने इस प्रसंग को अलग रूप दिया है। इसमें रावण माता सीता को स्पर्श के बजाय उनके उनके आश्रम सहित जमीन को उखाड़कर लंका ले जाने के बारे में बताया गया है।
वास्तव में इस कथा का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि रावण के पास अपार शक्ति और सामर्थ्य होने के बावजूद वह अपने ही कर्मों और श्राप के भय से बंधा हुआ था।
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