Mahalaxmi Vrat 2026: 3 अक्टूबर को होगा 16 दिनों के व्रत का उद्यापन, विधि सहित कलश विसर्जन का मुहूर्त नोट करें
महालक्ष्मी व्रत का 16 दिन का समापन 3 अक्टूबर 2026 को होगा। मान्यता है कि जितने विधि-विधान से व्रत शुरू ...और पढ़ें

महालक्ष्मी व्रत 2026 का उद्यापन । (Picture Credit- AI Generated)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महालक्ष्मी व्रत मां लक्ष्मी को समर्पित महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है। 19 सितंबर 2026 से ये व्रत 16 दिन के लिए शुरू हुए थे, जिसका उद्यापन 3 अक्टूबर 2026 को किया जाना है। मान्यता है कि इस व्रत को जितने विधि-विधान से पूजा की जाती है और कलश स्थापना की जाती है, उतने ही विधि-विधान से इस व्रत का उद्यापन भी जरूरी होता है। व्रत खोलने के साथ-साथ कलश का विसर्जन भी बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है। तो आइए जानते हैं उद्यापन की विधि, कलश विसर्जन का मुहूर्त और 16 गांठ वाले डोरे का व्रत खोलने के बाद क्या करना चाहिए।
महालक्ष्मी व्रत के उद्यापन की विधि
- उद्यापन वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के मंदिर या ईशान कोण में चौकी रखें। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां महालक्ष्मी की तस्वीर या गज लक्ष्मी स्वरूप की प्रतिमा स्थापित करें।
- चौकी पर चावल की ढेरी बनाकर उसके ऊपर जल से भरा कलश रखें। कलश पर आम के पत्ते और नारियल रखें। इसके बाद माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें। यादि आपने पहले से ही कलश की स्थापना की हुई है तो आपको इस प्रक्रिया को दोहराने की आवश्यकता नहीं है।
- व्रत के पहले दिन बांधा गया 16 गांठों वाला पवित्र डोरा भी माता के सामने रखें। उस पर रोली और अक्षत चढ़ाकर पूजा करें। इसके बाद मां लक्ष्मी को लाल वस्त्र, कमल का फूल और 16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। भोग में खीर, पूरियां और फल चढ़ाए जा सकते हैं।
- उद्यापन के दिन हवन करने की भी परंपरा है। हवन के दौरान 'ॐ महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र का जाप करते हुए 108 आहुति देने की मान्यता है। अंत में खीर और पूरियों की आहुति दी जा सकती है।
- इसके बाद 16 घी के दीपक जलाकर भगवान गणेश और मां महालक्ष्मी की आरती करें। पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए माता से क्षमा मांगें।
- उद्यापन के दिन 16 सुहागिन महिलाओं या 16 कन्याओं को भोजन कराएं। भोजन के बाद उन्हें अपनी सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, फल और दक्षिणा देकर सम्मानपूर्वक विदा करें।
कलश विसर्जन का शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में महालक्ष्मी व्रत का समापन 3 अक्टूबर, शनिवार को होगा। दिए गए मुहूर्त के अनुसार कलश विसर्जन के लिए ये समय बताए गए हैं-
- प्रातःकाल मुहूर्त: सुबह 6 बजकर 15 मिनट से 10 बजकर 45 मिनट तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 48 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक
कैसे करें कलश विसर्जन?
- व्रत के अंतिम दिन सबसे पहले मां महालक्ष्मी की पूजा करें। इसके बाद कलश पर हाथ रखकर भगवान वरुण और पूजा में आमंत्रित देवी-देवताओं से सम्मानपूर्वक विदाई की प्रार्थना करें।
- कलश का जल आम या अन्य पवित्र पत्तों से पूरे घर में छिड़क सकते हैं। बचे हुए जल को तुलसी या किसी पवित्र पौधे में डाल दें।
- कलश पर रखा नारियल प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांट दें और पूजन सामग्री के विसर्जन कर दें ।
16 गांठ वाले डोरे का क्या करें?
- महालक्ष्मी व्रत में 16 गांठ वाला डोरा विशेष माना जाता है। पूजा पूरी होने के बाद इसे फेंकने के बजाय पूजा स्थान या तिजोरी में सुरक्षित रख दें।
- यदि डोरा पुराना होकर टूट जाए या रखने योग्य न रहे, तो उसे सम्मानपूर्वक किसी पवित्र स्थान पर रख दें या बहते जल में प्रवाहित कर दें।
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