जीवन के हर भय को दूर करते हैं मां काली के 4 दिव्य स्वरूप, पढ़िए इनकी महिमा और उत्पत्ति की कथा
कम ही लोग इस बारे में जानते होंगे कि मां काली के 4 स्वरूप हैं। आज मां काली के इन्हीं ...और पढ़ें
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मां काली के चार दिव्य स्वरूपों की महिमा (Picture Credit: Freepik)
HighLights
अपने भक्तों को भय से मुक्त करती हैं मां काली
शास्त्रों में मिलता है मां काली के चार स्वरूपों का वर्णन
देवी काली के इन स्वरूप का है आध्यात्मिक महत्व
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान शिव यदि काल हैं और उनकी पत्नी काली कहलाती हैं। मां काली समय, शक्ति, विनाश और मृत्यु की देवी हैं। महाकाली, भद्रकाली, दक्षिण काली और श्मशान काली, देवी काली के ही दिव्य स्वरूप हैं। चलिए पढ़ते हैं देवी काली के इन चार स्वरूपों का महत्व और इनकी उत्पत्ति की कथा।
महाकाली
महाकाली सर्वोच्च ब्रह्मांडीय रूप हैं, जो समय, संहार और असीम शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है। देवी के इस स्वरूप को समय, मृत्यु और सीमाओं से परे माना जाता है। साथ ही वह संसार का संहार करने वाली आद्याशक्ति हैं। महाकाली केवल असुरों का ही विनाश नहीं करती, बल्कि मनुष्य के भीतर छिपे अज्ञान और अहंकार का भी विनाश करती हैं। इन्हें संपूर्ण सृष्टि के आरंभ और अंत की सर्वोच्च शक्ति माना गया है।
उत्पत्ति की कथा - श्री दुर्गा सप्तशती और श्रीमार्कण्डेय पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच हो रहे संग्राम में असुरों का वर्चस्व बढ़ने लगा, तो देवी दुर्गा के भीषण क्रोध से मां महाकाली का प्राकट्य हुआ। अपने इसी प्रलयंकारी रूप में उन्होंने चंड-मुंड और शुम्भ-निशुम्भ असुरों का संहार किया।
मां भद्रकाली
'भद्र' का अर्थ है मंगलमय या कल्याणकारी। इस प्रकार मां काली का भद्रकाली स्वरूप कल्याणकारी हैं, जो रक्षा और शुभता की देवी हैं। मां भद्रकाली सदैव अपने भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर रहती हैं। श्रीकुल परंपरा के अनुसार, माता भद्रकाली को माता मातंगी की बहन माना गया है।
उत्पत्ति की कथा - मां भद्रकाली की उत्पत्ति का वर्णन शिव पुराण, वायु पुराण और महाभारत जैसे ग्रंथों में मिलता है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब प्रजापति दक्ष के यज्ञ में माता सती ने अपमान के चलते अपने प्राण त्याग दिए, तो इससे भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो उठे। शिव जी के प्रचंड क्रोध से मां भद्रकाली की उत्पत्ति हुई और उन्होंने राजा दक्ष के अहंकार और उनके यज्ञ दोनों का विध्वंस कर दिया।

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दक्षिणा काली
दक्षिणा काली, देवी काली का सौम्य रूप हैं, जो गृहस्थों के लिए सबसे अधिक शुभ और फलदायी माना जाता है। माना जाता है कि मां काली का यह स्वरूप भक्तों को नरक से बचाता है। वह मां काली के अन्य रूपों की तरह उतनी क्रोधित नहीं हैं और सबसे सौम्य और दयालु रूप है।
उत्पत्ति की कथा - दक्षिणा काली से संबंधित कथा कालिका पुराण, महाकाली कल्प और देवी भागवत पुराण में मिलती है। पौराणिक कथा के अनुसार, राक्षसों का वध करने के बाद देवी बहुत ज्यादा क्रोधित थीं। तब उन्हें शांत करने के लिए भगवान शिव उनके चरणों में लेट गए। जैसे ही देवी के पैर शिव जी की छाती पड़े, तो उनका क्रोध तुरंत शांत हो गया। वह लज्जित होकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके खड़ी हो गईं, इसलिए देवी का नाम दक्षिणा काली पड़ा।

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श्मशान काली
जैसा की नाम से ही स्पष्ट है, श्मशान काली, श्मशान में निवास करती हैं। देवी काली का यह स्वरूप तंत्र और वैराग्य का गूढ़ स्वरूप है। साथ ही यह मां काली का सबसे उग्र रूप भी हैं, जो रूप, अज्ञान और वासना के संहारक के रूप में जाना जाता है। गृहस्थ इनकी पूजा नहीं कर सकते। इनकी साधना अघोरियों और तांत्रिकों द्वारा शत्रुओं के विनाश, भयमुक्ति और सिद्धियों की प्राप्ति के उद्देश्य से अर्धरात्रि में शमशान में की जाती है।
उत्पत्ति की कथा - श्मशान काली की उत्पत्ति की कथा मुख्य रूप से कालिका पुराण और मार्कण्डेय पुराण (देवी महात्म्य) में मिलती है। जब देवी सती ने पिता दक्ष के यज्ञ में देह त्यागी, तब शिव के क्रोध से भद्रकाली उत्पन्न हुईं। देवी भद्रकाली ही आगे चलकर श्मशान वासिनि या 'श्मशान काली' के रूप में तांत्रिकों द्वारा पूजी गईं। उनका यह स्वरूप जीवन-मृत्यु के सत्य को दर्शाने के लिए प्रकट हुआ था।
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